19.4.18

करेंसी संकट के लिए सरकार और बैंकिंग प्रबंधन और कई कारण जिम्मेदार है


देश में जब नोटबंदी शुरू की गई तो लोगों ने चढ़ बढ़ कर नोटबंदी का स्वागत इस उम्मीद के साथ किया था कि देश में काला धन की समाप्ति हो जायेगी और लोग बाग काला धन इकठ्ठा नहीं कर पायेंगें । एक समय सीमा में सरकार ने बंद की गई करेंसी वापिस लेकर देश के नागरिकों को नये नोट जारी किये । देश के नागरिकों ने करेंसी के लिये काफी दिक्कतों का सामना किया फिर भी उन्होंने सरकार की इस नीति का स्वागत किया कि नोट बंदी की प्रक्रिया से हमारे देश का अर्थतंत्र मजबूत होगा ।

सरकार ने एक हजार और पांच सौ के नोट बंद कर दो हजार का नया नोट निकाला और कैशलेश/ डिजिटल लेनदेन के लिये नागरिकों को प्रोत्साहित किया और लोगों को समझाईस दी कि अधिकाधिक डिजिटल लेनदेन करें । सरकार और नेताओं के द्धारा बीच बीच में अपने भाषणों के दौरान यह भी बताया था कि कैशलेश/ डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिये सरकार कम मात्रा में करेंसी प्रिंट करा रही है । दो हजार के बड़े नोटों से लोगों को लेनदेन में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था इसीलिए सरकार ने फिर से दो सौ रुपये का नया नोट जारी किया ।

मुद्राबंदी के ठीक एक साल बाद लोगबाग फिर से करेंसी के लिए भटक रहे हैं उन्हें खर्च के उनकी मेहनत से जमा पूँजी भी नहीं मिल पा रही है । देश के हजारों एटीएम खाली पड़े हैं और लाखों लोग कैश के लिये यहाँ वहां भटक रहे हैं और पूरे देश में फिर से नोट हदबंदी जैसी स्थिति निर्मित हो गई है । लोगों के यहाँ शादी विवाह हैं तो किसी के यहाँ कुछ कार्यक्रम हैं तो किसी को खरीददारी करने के लिए रुपयों की सख्त जरुरत है । लोगबाग कर्ज लेकर अपने खर्चे की पूर्ती कर रहे हैं । एक तरफ सरकार कह रही है कि देश में नोटों की कोई कमी नहीं है फिर भी लोगबाग रुपयों के लिए क्यों भटक रहे हैं  । देश में कम मात्रा में करेंसी प्रिंट करवाने के कारण अचानक करेंसी की कमी पड़  गई है अब फिर से प्रिंट कराने की नौबत आ गई है ।

एक बैंक के अधिकारी ने बताया कि ऊपर से आदेश हैं कि डिजिटल लेन देन को बढ़ावा देने के लिए 80 प्रतिशत एटीएम को खाली रखा जाए और लोग बागों को नगद कैश न देकर डिजिटल लेन देन करने को कहा जाये । नोटबंदी  के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के द्धारा डिजिटल ट्रांजेक्शन को सख्ती से बार बार लागू करने के लिए कहा गया और उन्होंने कैशलेश/ डिजिटल लेनदेन को लागू करने के लिए पुरजोर वकालत की और विदेशों के कई उदहारण दिये कि इंग्लैंड में 80 प्रतिशत अमेरिका में 67 प्रतिशत तो स्वीडन में 90 प्रतिशत डिजिटल लेनदेन किया जाता है इसीलिए इसे भारत में लागू किया जाए क्योंकि लोगों के पास स्मार्ट एंड्रॉएड फोन हैं पर ये भूल गए कि विदेशों में यह व्यवस्था तीस चालीस पहले से की जा रही है और वहां नेट संचार व्यवस्था बढ़िया है और वहां किसी प्रकार के सायवर क्राइम और किसी तरह के फ्राड नहीं होते हैं ।

भारत में यह व्यवस्था जोर जबरजस्ती डंडे के साथ लागू करना उचित नहीं हैं । भारत देश में करीब चालीस प्रतिशत गरीब जन निवास करते हैं अशिक्षित हैं और ठीक तरह से मोबाईल का इस्तेमाल करना भी नहीं जानते हैं और तो और देश के कई क्षेत्रों में फोन लगाने पर नेटवर्क नहीं मिलता है । पढ़े लिखे लोग भी सायवर क्राइम होने के डर से डिजिटल लेनदेन करने में डरते हैं । देश में अनेकों घटनाएं हो चुकी हैं । देश में कई जगहों में नेट सर्वर नहीं मिलता है इस स्थिति में डिजिटल ट्रांजेक्शन करने की व्यवस्था सुचारु ढंग से काम नहीं करती है तो लोगबाग असहाय की स्थिति में आ जाते हैं कि अगले को कैसे भुगतान करें । घर के खर्चे चलाने के लिए लोगों को नगद रुपयों की जरुरत पड़ती है दूध वाले को किराना वाले को धोबी को सब्जी वाले को और सभी जगह आवश्यक वास्तु खरीदने के लिए नगद रुपयों की जरुरत पड़ती है ।

देश में सभी व्यापारियों के पास स्वाइप मशीन नहीं हैं । दो हजार से अधिक की खरीद करने पर स्वाइप मशीन में स्वैप करने पर या क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर लोगों को अतिरिक्त भुगतान टेक्स के रूप में करना पड़ता है इसीलिए अधिकांश लोगबाग़  इस व्यवस्था से परहेज करते हैं और लोग बाग़ नगद भुगतान करना पसंद करते हैं कि इससे उनका टेक्स बचेगा । सरकार को डिजिटल लेन देन को यदि बढ़ावा देना है तो  टेक्स लगाना बंद कर देना चाहिये ।

इस समय मध्यप्रदेश में करेंसी की कमी का एक कारण यह भी हजारों करोड़ों रुपयों भावान्तर जैसी योजनाएं में भुगतान किये जा रहे हैं जिससे बैंकों में करेंसी की कमी बन गई हैं । नोटबंदी  के बाद दो हजार और दो सौ के जो नए नोट निकाले गए थे उनके लिए बैंकों के द्धारा अपने अपने एटीएम के सॉफ्टवेयर फार्मेट नहीं कराये गये । कई एटीएम में दो सौ के नोट कभी निकले ही नहीं हैं । धीरे धीरे बाजार से अन्य जगहों से दो सौ और दो हजार के नोट गायब हो गए हैं जिससे देश के करोड़ों लोगों को खर्च चलाने के लिए करेंसी के लिए अब भटकना पड़  रहा है इससे अब लोगों के मन में अब गलत संदेश  जा रहा है कि खर्चा चलाने के लिए उनकी बैंकों में जमापूंजी उन्हें मिलेगी कि नहीं संदेह भ्रम की स्थिति बन रही है और लोगों का सरकार और बैंकों के प्रबंधन से विश्वास  उठने लगा है ।  लोगों के मन में सरकार के प्रति गलत संदेश जा रहा है ।

सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द नए नोट जारी करें और डिजिटल लेन देन को सख्ती से लागू न करें इसमें नियमों में कुछ लचीलापन लाये । देश में डिजिटल लेन देन की व्यवस्था सुचारु रूप से चलने में अभी करीब दस पंद्रह साल का समय और लगेगा तब तक सरकार देश के लोगों को जागरूक करें अभी इस समस्या का तात्कालिक निराकारण करने हेतु देश के लोगों को नगद नारायण जल्द से जल्द उपलब्ध करायें अगर इसी तरह की स्थिति बनी  रही तो आगे सरकार को काफी संकट का सामना करना पडेगा और आगामी चुनावों में इसका असर देखने मिलेगा ।

जय हो नगद नारायण

2 टिप्‍पणियां:

  1. वर्तमान की एक ज्वलंत समस्या की ओर ध्यान दिलाता समसामयिक लेख

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (20-04-2017) को "कहीं बहार तो कहीं चाँद" (चर्चा अंक-2946) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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आपका ब्लॉग समयचक्र में हार्दिक स्वागत है आपकी अभिव्यक्ति से मेरा मनोबल बढ़ता है .