23.6.11

मनुष्य के व्यक्तित्व के प्रतिबिंब उसके विचार होते हैं ...

जिस दिशा में मनुष्य के विचार आकर्षित होते हैं उस मनुष्य की जीवन धारा उस दिशा में अग्रसर हो जाते हैं . सुगठित, क्रमबद्ध,सुव्यवस्थित विचार हों और उनका सुनियोजन करने से मनुष्य के अंदर संकल्प शक्ति का जन्म होता है जिनका समयानुसार उपयोग और प्रयोग करने से बड़े से बड़े लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है और जिनके सहारे रेगिस्तान में हिमालय खड़े करने जैसे असंभव कार्य को भी संभव बनाया जा सकता है .

महर्षि विश्वामित्र ने अपनी संकल्प शक्ति के बल पर जगतनियंता के समक्ष त्रिशंकु जैसी अभूतपूर्व स्थिति निर्मित कर दी थी और देवराज इंद्र को अपनी अँगुलियों पर नाचने को मजबूर कर दिया था .

भगवान राम के संकल्प बल के सामने समुद्र को लज्जित होना पड़ा और उन्हें समुद्र में राह देने हेतु मजबूर होना पड़ा था तो दूसरी ओर दुबले पतले महात्मा गाँधी जी ने अपनी संकल्पशक्ति के द्वारा विशाल अंग्रेज सम्राज्य को हिला कर रख दिया था और उन्हें नाकों चने चबवा दिए थे .

अक्सर देखा जाता है की संकल्प शक्ति के अभाव में लोग अक्सर अपने भाग्य को कोसने लगते हैं और असफलता का सारा दोष अपने भाग्य को देने लगते हैं और अकर्मण्यता की चादर ओढ़ कर सो जाते हैं .

मनुष्य का प्रथम कर्तव्य यह है की पहले वे अपने जीवन की प्राथमिकताएं तय करें और अपने दिशाहीन विचारों को संगठित कर संकल्प का रूप दें जिससे अपने लक्ष्य और उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा सके .


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23 टिप्‍पणियां:

  1. व्यक्ति के विचारों से हम उसके व्यक्तित्त्व को आंकते हैं ... सार्थक पोस्ट

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  2. लेकि‍न हमें यह भी वि‍चारना चाहि‍ये की वि‍चार हैं क्‍या चीज? इनका हमारे अस्‍ति‍त्‍व में क्‍या योगदान है? क्‍या हम केवल वि‍चारों का पुलि‍न्‍दा भर हैं या इससे अति‍रि‍क्‍त भी कुछ?

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  3. बहुत सुन्दर और सार्थक लेख|

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  4. बहुत सुन्दर सार्थक शिक्षा देती पोस्ट भईया....
    सादर....

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  5. सही कहा मिस्र जी । संकल्प हो तो मंजिल दूर नहीं होती ।

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  6. विचार ही व्यक्तित्व बनाते हैं।

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  7. मनुष्य का प्रथम कर्तव्य यह है की पहले वे अपने जीवन की प्राथमिकताएं तय करें और अपने दिशाहीन विचारों को संगठित कर संकल्प का रूप दें जिससे अपने लक्ष्य और उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा सके .

    एकदम सटीक ...!

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  8. आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!

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  9. आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!

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  10. बहुत सुन्दर, सार्थक और विचारणीय आलेख!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  11. मनुष्य का प्रथम कर्तव्य यह है की पहले वे अपने जीवन की प्राथमिकताएं तय करें और अपने दिशाहीन विचारों को संगठित कर संकल्प का रूप दें जिससे अपने लक्ष्य और उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा सके .

    बहुत सार्थक व प्रेरणादायक पोस्ट, आभार!

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  12. सार्थक प्रस्तुति है बड़े भैया.
    - विजय

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  13. आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!
    मगर वो पोस्ट तो आपके ब्लॉग पर है ही नहीं जो आपने आज पोस्ट की थी!

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  14. संकल्प शक्ति मजबूत हो तो रेगिस्तान मे भी गुलस्थान बन जाये, बहुत सुंदर विचार

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  15. आदरणीय शास्त्री जी,
    कल नेट कम्प्युटर सिस्टम में अचानक खराबी आ जाने के कारण त्रुटिवश कल की पोस्ट डिलीट हो गई है ... जिस हेतु क्षमाप्रार्थी हूँ .... पर मेरे लिए ख़ुशी की यह बात है की कल मेरा ब्लॉग समयचक्र हैक होते होते बच गया ...
    महेंद्र मिश्र

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आपका ब्लॉग समयचक्र में हार्दिक स्वागत है आपकी अभिव्यक्ति से मेरा मनोबल बढ़ता है .