16.1.10

आखिर जा टंकी का है बला ?

....
बड्डे - काय छोटे तैने कबहु जा बात सुनी है

छोटे - दादा कौन सी बात तनिक हमखो सो बताई दी

बड्डे - अरे ब्लागर नगर की टंकी के बारे में . जबसे मै करीब तीन साल से ब्लाग लिख रहा हूँ . इस ब्लाग नगर में १७६० तरह के ब्लॉगर रहते है . सबका व्यक्तित्व और कृतित्व अलग अलग तरह का है . कुछ मौजी टाइप के है . कुछ कुछ आगी लगाके पानी डारबे में माहिर है तो कुछ दूसरे का चीर हरण करने में कोई कसर नहीं रखते है और वे बस मौके की तलाश में रहते है की कैसे धुँआ देखा जावे ॥

कुछ अपनी ढपली अपना राग अलापने में निपुण होते है . कुछ शालीनता का लिबास पहिनकर दुर्गुणों का व्यवहार करते है . कुछ आत्म प्रशंसा के भूखे होते है और हमेशा बरसाती मेढको की तरह ब्लॉग नगर में टर टर करते रहते है . कुछ तो भैय्या प्रतिष्टा के शीर्ष पर बैठकर गर्रा रहे है . कुल मिलाकर जा कहो सब अपनी ताल पे ताल ठोक रहे है और हमेशा मिले सुर हमारा तुम्हारा का नारा देते रहते है

छोटे - दादा ब्लागर नगर की टंकी के बारे में बता रहे थे और हमखो तुम ब्लॉगर नगर के बारे में और वहां के निवासियो के बारे में बतान लगें . जा कोई बात भाई . पूछो खेत की तो बातन लगे खलिहान की .. हा हा हा

बड्डे - अरे हाँ टंकी के बारे में बताना ही भूल गया था . तो सुनो जो उगता सूरज अच्छा लिख रहा हो तो पहले तो यहाँ ब्लॉगर नगर में उसे खूब चढ़ाया जाता है ... और जब सर के ऊपर से पानी गुजरने लगता है तो उसे ब्लागर नगर की पानी की टंकी पे चढ़ा दिया जाता है और जब उस बड्डे भैय्या से पानी की टंकी से नीचे उतरते नहीं बनता है तो ब्लागर नगर के निवासी हंसी ठिठोला कर उसे नीचे उतारते है . एक तरीका जा हो गओ छोटे

..फिर ठंडी से कुकरते हुए कहा दूसरा तरीका ये है की उसे इतना परेशान कर दो के बेचारा वो खुदई चढ़ जाए . टंकी पर चढ़ा जाए . तीसरा तरीका ये है कै एक यदि टंकी पे चढ़ता है तो दूसरा भोला भाला साथी देखा साखी धुन्नस में टंकी पे चढ़ जाता है .... अब का कहें भैय्या तैने सुनी नहीं है कै हमारे दो साथी भी ब्लागर नगर की टंकी पे बेवजह चढ़ गए है . अब हमारे परिवार के उन मासूम अच्छे साथियो को उतारने के लिए कछु तो करने पड़े . कायसे हमारे परिवार में टंकी पे चढ़ने या चढाने की परम्परा नहीं है

छोटे - अरे बड्डे भाई अजय जी और पीछे पीछे टंकी पे चढ़ गए ललितजी को उतारने के लाने के लिए कुछ तो करो

बड्डे उस पानी की टंकी के पास गए और जोर जोर से आवाज देकर टंकी पे चढ़े भाई अजय जी और भाई ललित जी को पुकारा और कहा आपके वगैर हम अधूरे है सूना सूना सा लगता है . भाई आप ब्लॉगर नगर की शान हो . ऐसी कौन सी बात हो गई की आप उन लोगो की तरह टंकी पे चढ़ गए जिनका काम उतरना और चढ़ाना है . अपुन तो ऐसे नहीं है जी की चार दिन साथ न रह सकें ...लोग क्या कहेंगे जी ...गुस्सा भूल जाओ....देखो छोटे तुम्हारी गुस्सा दूर करने के लिए मिन्टास लाया है . अभी उतर जाओ मेरे प्यारे मित्रो. अरे टंकी पे चढ़ने उतरने का काम ब्लॉगर नगर के वरिष्ट निवासी करते है अरे आप लोग तो अभे नए नए हो .

व्यंग्य - एक निवेदन
आलेख- महेंद्र मिश्र
जबलपुर.

19 टिप्‍पणियां:

  1. महेंद्र जी,
    शानदार टंकी पुराण के लिए बधाई...आज रात को टंकीबाज़ी के महत्व पर एक पोस्ट डालूंगा...पढ़िएगा ज़रूर...

    जय हिंद...

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  2. अरे वाह हम ने तो अभी महुर्त भी नही किया अपनी टंकी का, ओर आप ने तो हमारे से पहले ही दो लोगो को टंकी पर चढा कर रिकार्ड कायम कर दिया, अब मेरी टंकी पर कोन चढेगां , चलिये कभी खुद ही चढ जायेगे ताऊ को संग ले कर

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  3. राज जी
    हमने नहीं चढ़ाया है टंकी पर..... समय की लीला भैय्या लोग खुदई चढ़ गए है ....हमारे छोटे और बड्डे उतारने के लिए पुरजोर प्रयास कर रहे है .... मेरी शुभकामनाये उनके साथ है .... दादा अभी आपकी टंकी निर्माणाधीन है अतः आप ताऊ को लेकर टंकी पर न चढ़े . पहले ठेकेदार का पता कर लें ... ठेकेदार नंबर दो का काम बहुत कर रहे है .... पहले टंकी बन जाने दें टेस्ट रिपोर्ट बन जाने के बाद चढ़े ..... हा हा हा

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  4. खुशदीप जी
    कहाँ है आपका टंकी के महत्त्व के बारे में लेख ? अब रात हो गई है ...अभे तक हम राह देख रहे है ....

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  5. अब तो यहाँ भी पोर्टेबल टंकी का जुगाड़ बैठाना पड़ेगा...साथ में लेकर घूमो और सुविधानिसार चढ़्ते उतरते रहो. :)

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  6. आदरणीय समीर जी
    कम से कम आप तो जुगाड़ न करें हा हा हा ....

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  7. ये टंकी अब तोड़ देनी चाहिए

    ब्लोगिंग के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है यह निगोड़ी टंकी !

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  8. महेंद्र जी,

    मेरी रात बारह बजे के बाद होती है...

    जय हिंद...

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  9. @ उड़नतश्‍तरी
    @ अलबेलाखत्रीडॉटकॉम

    टंकी में अधुनातन तकनीक स्‍थापित की जा रही है। इसमें लिफ्ट लगवाई जा रही है। जिसके जरिए चढ़ने उतरने में सुविधा रहेगी। लिफ्ट के उस द्वार से चढ़ने वाले सहज ही चढ़ और उतरने वाले सहज ही उतर सकेंगे। बशर्ते बिजली न जाये। वैसे बिजली जाने से बचने के लिए इस टंकीरूपीलिफ्ट में एक इनवर्टर भी लगवाया जा रहा है ताकि इसके रूकने की समस्‍या न आये।

    अब यह बात अलग है कि इसमें घुसें तो अजय भाई और जब दरवाजा खुले तो भीतर से समीर भाई बाहर आयें। तो नमकहलाल का वह दृश्‍य याद हो आएगा, जिसका जिक्र मैं नहीं करूंगा। आप सबको अपनी स्‍मृति उष्‍मा का प्रयोग करना होगा।

    तो टंकी को तोड़ने पर जितना व्‍यय आ रहा है उसी व्‍यय में टंकी को एक अधुनातन लिफ्ट के रूप में बदलने का प्रस्‍ताव ब्‍लॉगर जगत की सहमति से पारित कर लिया जाये।

    आवश्‍यक समझें तो महेन्‍द्र भाई इस पर एक अलग पोस्‍ट लगा सकते हैं। उनको सभी अधिकार यहीं पर प्रदान किए जा रहे हैं।

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  10. वैसे यह अधिकार रात बारह बजे तक ही वैध है उसके बाद यह अधिकार स्‍वयंमेव खुशदीप सहगल जी के पास चला जाएगा और वे इस पर पोस्‍ट लगाने के एकाधिकारी होंगे।

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  11. हा हा हा पंडितजी आप भी ना। अब तो सचमुच आप मस्त हो गए हो सर। रिटायरमेंट के बाद की तनाव मुक्ति साफ़ नज़र आती है आपके सुन्दर लेखन में। हमको ऐसा मालूम होता तो बहुत पहले आपको रिटायर करवा कर आपके साथ आनंद उठाना शुरू कर दिया होता। एम आय राँग सर जी ? जय हिंद !

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  12. टंकी पे जो चढ़ा
    रहे वही बौराय
    ब्लोगजगत की ये कथा
    खतम न होने आए

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  13. महेन्द्र भाई , आप भी ऊपर से हमरी फ़ोटो भी लगा दी (गौर से देखिए टंकी पर एकदम ऊपर एक ठो मंकी टाईप बंदा खडा है )अरे कोई टंकी अभी इतनी ऊंची नहीं है कि आप लोगों का आदेश और स्नेह की उष्मा वहां तक नहीं पहुंच सके , बस समझिए कि टंकी पर चढा मंकी , हनुमान बनने के तैयारी में है ,पटरियां बहुत बिछ गई अब चिट्ठा चालीसा पढिएगा
    अजय कुमार झा

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  14. झा जी उतर आईन टंकी से,मिसिर जी होई मनोरथ पुर्ण
    दु दिन भुख हड़ताल होईगे, अब ले भी आओ आटा चून
    अब ले भी आओ आटा चून,बने गरमा-गरम लिटी चोखा
    ई अतवार हो जाय पिकनिक,हंडी चढ जाय चिट्ठा चालिसा
    कह रहे भैया"ललित"कविराय,सुनो बात हमारी धियान से
    तबहिं हम चढे रहे पीछे पीछे,झा जी उतर आईन टंकी से

    मिसिर जी-जब झा जी टंकी चढिन तो हम भी चढ गए देखे के लाने के टंकी का होत है और लोगन समझे दुनो चढे टंकी पे, भैया अपुन तो झा जी के उतारे के लाने चढे रहे टंकी पे, अब झा जी चालिसा करी ता हमहु कछु बत्तीसा-उत्तीसा जप लई, टंकी मा चढे से नजारा बहुत बढिया दिखत है। लम्बाई-उंचाई सब पतो चल जात है,
    जय टंकी माई, तोरी लीला अपरम्पार

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  15. बसंती को बुला लाएं का मिश्र जी...

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  16. भैय्या यहाँ ब्लागिंग में बसंती न कहना किसी को ... वरना नोटिस मिल जायेगा.... ये समझ लीजिये ब्लागर नगर की टंकी पे जो चढ़ गया यहाँ उसे बिना बसंती के नीचे उतरना पड़ता है ...... इस टंकी के नीचे बसंती नहीं बसंता बहुत से मिलेंगे महादेव हा हा हा हा .

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  17. भाई ये टंकी पुराण भाटिया जी के ब्लॉग से आपके ब्लॉग तक आ गया ......... मज़ा आ गया .......

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आपका ब्लॉग समयचक्र में हार्दिक स्वागत है आपकी अभिव्यक्ति से मेरा मनोबल बढ़ता है .