1.11.09

चिठ्ठी चर्चा : बन्दूक चलाने से पहले जरा मजबूती से खड़े तो होइए.....

आज रविवार का दिन है और मेरे लिए आपकी चिठ्ठी लिखने का दिन है . आज कई चिठ्ठो का अवलोकन किया जिनका उल्लेख करने का मैंने यथासंभव प्रयास किया है . चर्चा के पूर्व सामयिक विषयो पर चर्चा करना जरुरी है ....

आज हमारा प्रदेश मध्यप्रदेश अपनी स्थापना के ५३ वर्ष पूर्ण कर आज से ५४ वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है . देश के ह्रदय में स्थित मध्यप्रदेश दिनोदिन निरंतर विकास के नए सोपान स्थापित कर रहा है .आज से सप्तादिनी रंगारंग उत्साह समारोहों की शुरुआत हो रही है . आज प्रदेश में पचास जिले है और २७२ तहसीले, ३१३ विकास खंड है . प्रदेश में ५५,३९३ ग्राम है और २३०५१ ग्राम पंचायते है . इस समय प्रदेश में साक्षरता का प्रतिशत ६४.१ है . ७३०० किलोमीटर राजमार्ग और ६७ हजार ६०० किलोमीटर सड़के है . प्रदेश में १८०० कम्पनियाँ कार्यरत है और १.७१,००० लघु उद्योग चल रहे है. मध्यप्रदेश के आसपास के प्रदेशो की संस्कृति की झलक इस प्रदेश में बखूबी देखने को मिल सकती है .

मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिह जी की अपील -


मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिह जी ने नागरिको ने अपील करते हुए कहा है की वे प्रदेश के विकास और प्रदेश के हित में प्रति सप्ताह दो घंटो का समय दे तो इस प्रदेश की तस्वीर बदल जायेगी . नागरिक साफ़ सफाई , शिक्षा, साक्षरता , नशा मुक्ति , पेड़ पौधे लगाने , बिजली की बचत करने के आदि के काम अपने हाथो में ले सकते है . सरकार के सहारे प्रदेश का विकास नहीं हो सकता है इसमें नागरिको के साथ साथ समाज की भी एक अहम् भूमिका होती है . आम आदमी में यह जूनून पैदा किया जाना चाहिए की यह प्रदेश मेरा है और इसे बनाना उसके हाथो में है . इस अवसर पर प्रदेश वासियो को देश वासियो को बधाई और शुभकामनाये दी .


चिठ्ठी चर्चा की और से बहुत बहुत बधाई यह प्रदेश निरंतर विकास के नए आयामों को स्थापित करे...

आज एक अखबार में यह समाचार पढ़ा की करीब ३२ लाख वर्ग किलोमीटर में फैली रियासतों का एकीकरण कर आजादी के बाद बाद हामारे भारत देश को एकजुट करने वाले लौह पुरुष सरदार बल्लभभाई पटेल की समाधि बनाने के लिए सरकार के पास एक इंच जगह भी नहीं है. हमारे देश में स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले कई नेताओं की समाधियाँ है लेकिन किसी भी सरकार ने " लौह पुरुष " सरदार पटेल के लिए इसकी जरुरत नहीं समझी. सरदार पटेल का हार्ट अटैक की वजह से १९५० में निधन हो गया था. तब से अभी तक उनकी समाधि न बन पाना आश्चर्य की बात है और एक प्रश्न चिन्ह है ?

अमीर धरती गरीब लोग में भाई अनिल पुसदकर.... बधाई,बधाई,बधाई....

राजस्थान में कोटा, उदयपुर और बीकानेर संभागों में हाईकोर्ट की बैंच स्थापित किए जाने हेतु आंदोलन जारी है....कोटा में वकीलों को न्यायिक कार्य का बहिष्कार करते दो माह से अधिक हो चुका है. 30 अक्टूबर को कोटा संभाग बंद रहा..... जिस का व्यापक असर देखा गया.... तीसरा खंबा में राजस्थान हाईकोर्ट के भूतपूर्व न्यायाधीश श्री पानाचंद जी जैन का आलेख है ...न्याय सस्ता, सुलभ और त्वरित क्यों न हो ? . बहुत ही सही सटीक विचार है.....हाईकोर्ट की बैंच वैसे मेरी समझ से हर जिला संभागीय मुख्यालयों में खोले जाने चाहिए जिससे गरीब जनता को दूरदराज के क्षेत्रो में न्याय प्राप्त करने न जाना पड़े .

कल्पतरु में विवेक रस्तोगी की कलम से ..... सूर्यपुत्र महारथी दानवीर कर्ण की अद्भुत जीवन गाथा “मृत्युंजयशिवाजी सावन्त का कालजयी उपन्यास से कुछ अंश – १४, महाराज धृतराष्ट्र से मुलाकात और युद्धशाला में शिक्षण का प्रयोजन....

सिर्फ दिल्‍ली को भिखारीमुक्‍त किया जाएगा....अविनाश वाचस्‍पति.....भाई ये समस्या सिर्फ देहली की नहीं है वरन सारे देश की है....

सुप्रीम कोर्ट ने खैर के पेड़ काटने पर लगा प्रतिबंध हटाया....अदालत लोकेश लोकेश.

रामप्यारी का सवाल - 99 ...ताऊ-भतीजे के चुटकुले में ताऊ रामपुरिया ...आज की विजेता : अल्पना वर्मा.

मेरी भावनायें... रश्मि प्रभा ...कंजूसी कैसी.

चर्चा पान की दुकान पर....शरद कोकास....बतिया रहे है ...शतरंज के खेल में वे ऊँट पसन्द नहीं करते .... ऊंट न हो तो शतरंज कैसे हो ?

हरी शर्मा जी सुझाव दे रहे है ....राष्ट्रमंडल खेल और कुछ सुझाब राष्ट्र हित मे

मयंक में " सोच-समझ कर उत्तर दो ! " डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

काठ की हंडी बार बार नहीं चढ़ती . इसका मतलब है कि किसी भी व्यक्ति को बार - बार मूर्ख नहीं बनाया जा सकता है सिर्फ एक बार बनाया जा सकता है . जैसे काठ की हांडी चुलेह पर सिर्फ एक बार चढ़ती है बार - बार नहीं वैसे ही किसी को एक बार मूर्ख बनाया जा सकता है. ...मेरे अंचल की कहावतें.

बड़ी होती स्कॉलर बेटी.....एक आलसी का चिठ्ठा में गिरिजेश राव.

क्षमा मांग पाना किसी के लिए आसान नहीं होता !!
गत्यात्मक ज्योतिष में संगीता पुरी ...

कविता: जंगल में घुस गई एक बकरी.....बाल सजग में...

दिल में दुकान....ज़ज्बात एम.वर्मा की रचना...

इस्‍लाम का संदेश आतंक मचाओ हूर मिलेगी....महाशक्ति में.

बच्चों की मासूमियत छीनते ये विज्ञापन...गगन शर्मा..कुछ अलग सा में....

बन्दूक चलाने से पहले जरा मजबूती से खड़े तो होइए...विनोद कुमार मिश्र

स्वप्नलोक.... मठाधीश बाबा के आश्रम में....विवेक सिंह.

कई सपने संवर कर टूट जाते, रात भर में अब, सुबह के गुनगुनाने की, कभी नौबत नही आयी....चर्चा हिन्दी चिट्ठो की...चर्चा हिन्दी चिट्ठो की कर रहे है पंकज मिश्र....

प्रस्तुति स्टार न्यूज़ एजेन्सी " नारी तेरे कितने नाम : संस्कृत में नारी के 352 पर्यायवाची मिले " जानिए नारियो के ३५२ पर्यायवाची नाम...

इस्लाम में नारी की दशा व इसके परिणाम...स्वच्छ सन्देश:हिन्दोस्तान की आवाज़

संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण प्रस्तुति जी.के.अवधिया...दशरथ की अन्त्येष्टि - अयोध्याकाण्ड (22)

कबाड़खाना में भाई अजय कुमार झा की प्रस्तुति .... तुम्हारी हसरतों का फ़साना कह जाती हैं अंगडाईयां..

दिये क्यूं जलाये चला जा रहा है - मन्ना दा का एक और मधुर गीत हमारे प्रिय मन्ना दा की प्रसिद्धी में एक और यशकलगी दादा साहब फाल्के पुरस्कार के रूप में जुड़ गई, लेकिन मुझ आलसी को एक पोस्ट मन्नादा को बधाई देते हुई एक पोस्ट लिखने का समय भी नहीं मिल पाया... मन्नादा के लगभग सभी गाने आपने सुने होंगे,.. लेकिन फिर भी कुछ ऐसे....गीतों की महफिल में प्रस्तुति सागर नाहर...

क्या आप भी 'बाप के ज़माने' के गाने सुनते हैं ?....बैठक में.

एको रसः करुण एव -क्या सचमुच ?
संस्कृत के एक महान कवि हुए हैं भवभूति . उन्ही ने कहा है यह - एको रसः करुण एव - मतलब करुणा ही प्रबल मानव भाव है ! क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार दिए जाने पर आदि कवि वाल्मीकि की वाणी से भी सहसा करुणा ही फूट.... क्वचिदन्यतोअपि ...में अरविन्द मिश्र की प्रस्तुति ...

नामवर सिंह अगर ब्लॉग लिखते तो... शरद कोकास के विचार...

सचमुच प्‍यार को दिल में छिपा लेना आसान नहीं है... बेदखल की डायरी....मनीषा पांडे...

हास्यकवि अलबेला खत्री ....रोटियाँ माँ जैसी....तो आटा बाप जैसा...


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24 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत शानदार चिट्ठा चर्चा।

    निरंतर समय चक्र चलता रहे

    दिया अंधेरों में एक रोशनी के लिए बलता रहे।

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  2. आज ही मालूम हुआ कि मध्‍य प्रदेश और छत्‍तीसगढ दोनो का जन्‍मदिन एक ही है .. आपके पोस्‍ट से मध्‍य प्रदेश के बारे में और बहुत सी जानकारी मिली .. 'लौह पुरूष' के बारे में आपकी सोंच बिल्‍कुल सही है .. चिट्ठा चर्चा भी आपने बहुत मेहनत से की .. मेरे चिट्ठे को शामिल करने के लिए धन्‍यवाद !!

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  3. मिसिर जी, लौह पुरुष की समाधि की भुमि न देने पर, समाधि के लिए भुमि के आरक्षण पर तो एक विशेष परिवार का ही अधिकार है,
    चिट्ठा चर्चा के लिए बधाई

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  4. सुन्दर चर्चा मिश्रा जी ....धन्यवाद

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  5. मिश्रा जी,

    मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस की बहुत बहुत बधाई!

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  6. बढिया रही चर्चा....
    धन्यवाद्!!

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  7. बहुत बढ़िया चिट्ठा चर्चा..धन्यवाद महेंद्रा जी!!!

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  8. महेन्द्र भाई, चर्चा अच्छी है पर आज तीसरा खंबा में मेरा नहीं राजस्थान हाईकोर्ट के भूतपूर्व न्यायाधीश श्री पानाचंद जी जैन का आलेख है और विचार भी उन्हीं के हैं।

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  9. जी जानकारी के लिए आभार . अभी त्रुटी शुधार रहा हूँ . आभार

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  10. बहुत सुन्दर चर्चा. संतुलित और बेहतरीन

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  11. बढि़या मेहनत किया है, बढि़या प्रयास

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  12. बेहद सटीक और सुंदर चर्चा, आभार.

    रामराम.

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  13. बधाई हो जी badhaai .... बहुत बहुत badhaai आपको भी और anil जी को भी ...... अच्छी charcha है .... ..........

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  14. कुछ लिंक जो नहीं देखे थे, यहां मिल गए....अच्छी चर्चा।
    संगीताजी जानकारी के लिए... आज आंध्रप्रदेश का भी जन्मदिन है:)

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  15. मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर हार्दिक बधाई.


    बेहतरीन चर्चा, बधाई. जारी रहिये.

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  16. बेहतरीन चर्चा।बधाई हो महाराज।बंटवारे के बाद भी आप हमारे बड़े भाई ही हो।

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  17. बहुत सुंदर चर्चा जी. धन्यवाद

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  18. मिश्र जी कम स्पेस मे अधिक लोगों के ब्लॉग्स की चर्चा करने का यह प्रयास सराहनीय है । धन्यवाद ।

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आपका ब्लॉग समयचक्र में हार्दिक स्वागत है आपकी अभिव्यक्ति से मेरा मनोबल बढ़ता है .