8.4.09

भाई समीर लाल जी "उड़नतश्तरी" के काव्य संग्रह "बिखरे मोती" का अंतरिम विमोचन जबलपुर संस्कारधानी में आयोजित किया गया .

ब्लागिंग जगत के जाने माने हस्ताक्षर भाई समीर लाल जी "उड़नतश्तरी" की पुस्तक "बिखरे मोती" काव्य संग्रह का अंतरिम विमोचन दिनाक 6 अप्रेल 2009 को जबलपुर स्थित होटल सत्य अशोका में जबलपुर के ब्लागरो की गरिमामय उपस्थिति में किया गया. इस अवसर पर आचार्य संजीव सलिल जी विवेक रंजन श्रीवास्तव जी भाई बवाल जी आनंद मोहन जी"बी.एस.एन.एल" गिरीश बिल्लौरेजी भाई राजेश दुबे "डूबेजी" इलाहाबाद से भाई प्रेमेन्द्र सिंह जी "महाशक्ति" संजय तिवारी जी भाई ताराचंद जी "हरिभूमि" उपस्थित थे.

इस अवसर पर आचार्य संजीव सलिल जी विवेक रंजन श्रीवास्तव जी श्री आनंद कृष्ण जी "बी.एस.एन.एल" गिरीश बिल्लौरेजी भाई राजेश दुबे "डूबेजी" भाई बवाल जी, इलाहाबाद से भाई प्रेमेन्द्र सिंह जी "महाशक्ति" संजय तिवारी जी भाई ताराचंद जी "हरिभूमि" और महेंद्र मिश्र ने काव्य संग्रह "बिखरे मोती" पुस्तक के सन्दर्भ में अपने अपने विचार व्यक्त किये और पुस्तक की समीक्षा करते हुए भाई समीर लाल जी के प्रयासों की भूरी भूरी प्रशंसा की और उन्हें बधाई और शुभकामना दी और बिखरे मोती काव्य संग्रह पुस्तक में से एक एक रचना सभी उपस्थितों ने पढ़कर सुनाई . भाई बवाल जी ने विमोचन कार्यक्रम का संचालन किया और कव्वाली सुनाकर जलबे बिखेर दिए . बिखरे मोती काव्य संग्रह में से बढ़कर एक रचनाये है और पुस्तक का कलेवर तो देखते ही बनता है . यह पुस्तक समीर लाल जी द्वारा अपनी माँ को समर्पित करते हुए लिखी गई है वास्तव में दुनिया में माता और पिता से बढ़कर कोई नहीं हो सकता है और उनका कर्ज आजीवन नहीं चुकाया जा सकता है . समीर जी के इस दिशा में किये गए प्रयास की जितनी भी सराहना की जाये कम ही होगी. कार्यक्रम की कुछ फोटो प्रस्तुत कर रहा हूँ .


आचार्य संजीव सलिल जी विवेक रंजन श्रीवास्तव जी भाई बवाल जी आनंद कृष्ण जी "बी.एस.एन.एल" गिरीश बिल्लौरेजी भाई राजेश दुबे "डूबेजी" इलाहाबाद से भाई प्रेमेन्द्र सिंह जी "महाशक्ति" संजय तिवारी जी भाई ताराचंद जी.


फोटो-भाई समीर लाल प्रेमेन्द्र सिह आचार्य संजीव सलिल जी .

फोटो-भाई समीर लाल प्रेमेन्द्र सिह

फोटो-श्री विवेकरंजन जी श्रीवास्तव श्री गिरीश बिल्लौरे जी भाई राजेश दुबे डूबेजी

फोटो - महेंद्र मिश्र आनंद कृष्ण जी समीर लाल जी संजू तिवारी जी (खड़े हुए)प्रेमेन्द्र जी संजीव जी और ताराचंद जी

फोटो - मै, भाई आनंद कृष्ण जी और समीर लाल जी

फोटो-भाई बवाल जी महेन्द्र मिश्र श्री आनंद कृष्ण जी भाई समीर जी और संजीव जी



भाई बबाल जी और मै

फोटो - गिरीश जी और प्रेमेन्द्र भाई

फोटो - भाई बबाल जी

फोटो - मै, भाई आनंद कृष्ण जी

फोटो- महेंद्र मिश्र

18 टिप्‍पणियां:

  1. photos aapne bahut sahi lagaye...kam se kam pata to chala ki kaise kaise kya kya hua

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  2. aapne badi mehnat ki , hamen jaankari di dhanyawaad, aur sameer lall ji ko pustak vimochan par dheron badhaai.

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  3. बिखरे मोती विमोचित, कर पाया है हर्ष.

    यही कामना सलिल की, हो सबका उत्कर्ष.

    हो सबका उत्कर्ष, ब्लॉग दुनिया विकसित हो.

    समय चक्र दे साथ, नव समाज निर्मित हो.

    कहे 'सलिल' कविराय, नहीं अनहोनी होती.

    जबलपुर में हुई विमोचित बिखरे मोती

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  4. सच है जी; ब्लॉग जगत में भी बिखरे को समेटने का काम कर रहे हैं समीरलाल!

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  5. "बिखरे मोती" सहेजने के लिए एक कापी इधर भी सरकाओ भाई ! समीर जी को बधाई और शुक्रया भी इस नायाब उपहार के लिए !

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  6. Jabalour Sanskardhani mei, Sameer bhai ki "Bikhre Moti " pusatk ke vimochan per aap sabhee ko hardik badhayee .......

    Deepak & Lavanya

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  7. समीर जी को बधाई.....लिखते तो हैं ही वे खैर गजब का....
    महेंद्र जी अन्यथा न लें शायद तकनीकी समस्या है कुछ शब्द गलत छप गए हैं
    गरिमामय के स्थान पर गरिमामयी
    भूरी-भूरी के स्थान पर भूरि भूरि
    जलबे के स्थान पर जलवे होना चाहिए.....
    भाषा की शुद्धता ही भाषा को बचाएगी....
    क्षमा सहित
    आपका मयंक

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  8. aaj mera din me net band ho gaya hai isiliye uch naam galat hai or takanikee truti hai .kasht ke liye kshamaprathi hnu.

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  9. @भाई समीर लाल जी के प्रयासों की भूरी भूरी प्रशंसा...


    १.प्रशंसा भी की गयी तो भूरी? अरे करना ही था तो चकाचक लाल, पीला, हरा, नीला कर लेते। पूरे इन्द्रधनुष में भी भूरा रंग नहीं है जी।

    २.हम तो पहली बार अन्तरिम विमोचन का कार्यक्रम जानकर चौक ही पड़े। जब एक बार पर्दा हट ही जाएगा तो क्या दुबारा घूंघट उठाने वाले को वही आनन्द आएगा? एक साल में कई जन्मदिन मनाने वाले तो सुने थे, अब एक ही किताब का कई बार विमोचन भी सुन लिया। वाह! बड़ी तरक्की कर रहे हैं हम...! :)

    लो भैया, हम भी अन्तरिम बधाई दिए देते हैं। फाइनल वाली के फिर खबर देना।

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  10. इलाहाबाद पहुँच गया हूं,

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  11. प्रिय बन्धु
    कल इस पोस्ट को प्रकाशित करने के बाद मेरे नेट सिस्टम में अचानक ख़राबी आ गई थी जिसके फलस्वरूप मुझसे कई गल्त्तियां हो गई थी . किसी का नाम गलत लिख दिया तो आयोजन की तारिख गलत हो गई थी जिसे मई सुधार नहीं पाया था . ध्यान जाने के बाद मैंने समस्त शब्दों में अभी सुधार कर दिया है . मेरा नर अभी अभी आधी घंटे पूर्व सुधार गया है . जो त्रुटियां तकनीकी कारणों से मुझसे हो गई है उस हेतु मै क्षमा प्रति हूँ .

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  12. समीर लाल जी को प्रथम कविता-संग्रह के प्रकाशन पर बहुत-बहुत बधाई!

    Regards

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  13. chori kar raha hoon bata ke. kisliye aap jante hai. nahi jante hai to padh ligiyega./

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  14. आदरणीय पण्डितजी,
    बहुत ही सुन्दर सचित्र वर्णन किया आपने उस दिन के कार्यक्रम का। जितना वहाँ आनंद आया उतना ही यहाँ भी आया जी। और नर्मदे हर का संदेश पुन: प्रेषित करती हुई इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार और बधाई।

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  15. चित्र-चित्र में कथा है. चित्र-चित्र में मित्र.
    नया करे कुछ तो लगे युग को बहुत विचित्र.

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आपका ब्लॉग समयचक्र में हार्दिक स्वागत है आपकी अभिव्यक्ति से मेरा मनोबल बढ़ता है .