22.2.09

चिठ्ठी चर्चा : चिठ्ठी लेकर आया हूँ कोई देख तो नही रहा है

आज मै चिठ्ठो की चिठ्ठी चर्चा आज आपके समक्ष ले कर आया हूँ जिसमे नए पुराने ब्लागरो के चिठ्ठो को हल्का तड़का लगाकर प्रस्तुत कर रहा हूँ . आज की चिठ्ठी में कविता,गजल,कहानी और ब्लागरो के विचार आदि का पुरजोर समावेश करने की कोशिश की है
आज का चिठ्ठा मै शहरवासी उड़नतश्तरी जी से शुरुआत कर रहा हूँ .

किसी ने देखा तो उड़नतश्तरी ..........अरे भाई कोई देख तो नही रहा है


चलिए अब देख लीजिये हमारा आज का कारटून "उड़नतश्तरी"

ज़िन्दगी के मायने कुछ धुंधलाने लगे है
"फार्मोलों" से आगे "बिज़नस सूट" आने लगे है

हाई क्लास के "वाईनींग डायनिंग "करे हैं
बेकार "मिडनाईट आयल" जलाने लगे है
भीड़ में भी तन्हा है "कारपोरेट जिंदगी" गायत्री जी की रचना

चढी नस बड़ी नकचढ़ी होती है... पूजा जी.... लहरों में

फेसबुक,माइस्पेस से कैंसर का खतरा लंदन। क्या आप फेसबुक या माइस्पेस जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं ? यदि हां, तो आपके लिए एक बुरी खबर है । इन वेबसाइटों के ज्यादा उपयोग से कैंसर और डिमेंशिया जैसे खतरनाक रोगों के साथ-साथ हृदय संबंधी रोगों का खतरा .
बालसभा में कविता वाचक्नवी की चेतावनी ...संभल जाओ संभल जाओ आगे बहुत खतरे है.

किसने तूफ़ाँ को छेड़ा पुरवाई में बबाल की ललकार लाल न बबाल जुगलबंदी में


नारी मैं हूं उनके साथ खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़
.........टेढी रीढ़ वालो के साथ भी तो रहती है .... आखिर सीधी टेढी के लिए देखिये जी.

अब तो वास्तव में यह एक ग्रामीणों का मेला ना होकर एक संगम था “मेरा भारत महान”. बस घूम घाम कर लौट पड़े थे.
चलिए देखिये और जानिए ... बंगलूरू का मूंगफल्ली मेला ....मल्हार में.

भीगी गज़ल "अच्छी है यही खुद्दारी क्या" श्रध्दा जी की बेहतरीन गजल .......बातें तो कहे सच्ची "श्रद्धा"
वे सोचे मीठी खारी क्या

फागुन के संग पतझड़ आया
चुनावी मंजर देखिये फ़िर चुनावी दंगल देखिये

शीशे के घर पत्थर आया बहुत दिनों के बाद
अरे चुनावी मंजर आया बहुत दिनों के बाद

परिकल्पना में रवीन्द्र प्रभात जी की चुनावी मंजर पर एक ग़ज़ल फागुन के साथ ही चुनावी दंगल का आगाज

ताऊ रामपुरिया बतिया रहे है कै
सैम आजकल चुनाव जीतने की रणनीति बनाने मे जुटा हुआ है. बीनू फ़िरंगी उसका चुनाव संचालक है, चुनाव क्षेत्र मे एक पठ्ठे का लंबा चोडा हालनुमा आफ़िस खाली पडा है. वहां चुनाव कार्यालय खोल दिया गया है.......चुनाव ए नही नही ताऊ जी जे काहे को अभे से रानिग कमेंट्री जा तो कछु ....... कहत नही बन रहो हे तो तो रामपुरिया के ताऊ पे टपका लगाए और रानिग कमेंट्री का भरपूर आनंद ले

तस्लीम में एक पहेली इसे कोई भी बता देगा क्या आप बता सकते है तो जल्दी से तैयार हो जाए

मौत का लाइव टेलीकास्ट सभ्य समाज के मुह पर एक तमाचा .
अभी अभी यह जानकारी मिली कि जेड़ गुडी जो की एक रियलिटी शो में शिल्पा शेट्टी को लेकर कभी नस्लीय टिपण्णी कर बैठी थी, उनकी संभावित मौत को लाइव टेलीकास्ट करने की तयारी की जा रही है... जेड़ गुड्डी कैंसर से पीड़ित है . उनकी मौत को टीवी पर सीधा प्रसारित करने के बलि‍दानी में पत्रकार कौशलेंद्र मिश्र के विचार ...जानिए उनकी कलम से

स्त्री स्वतंत्रता के नाम पर वैचारिक मंथन का दौर जारी हैमामला ये है कि आप आधे भरे ग्लास को आधा खाली या आधा भरा हुआ कह सकते हैं.......एक बात कहना चाहूंगा कि स्त्री को आप मूल रूप से कब स्वतंत्र कहेंगे, जब वह बाहर घर की देहरी लांघ उन सारे मामलों का दायित्व .......नारी स्वतंत्रता के नाम पर अंधी बहस ....गपशप का कोना में बतिया रहे है भाई प्रभात गोपाल जी .....

किस से कहे में मीत जी कह रहे है कभी तो निगाहे साकी तू ख़ुद को अजमा ले

चार्ल्स डार्विन और जिंदगी के खटके .......स्वप्नदर्शी जी से जानिए

सुना है
कोई स्त्री गाती थी गीत
सन्नाटी रात में।
उजाले के गीत का
कोई श्रोता नहीं था,
नहीं कोई सहृदय
व्यथा की धुन को सुनने वाला

स्त्री के गीत "शेष है अवशेष" अनुराग अन्वेषी की कलम से

" माँ फिर से मुझे अपना नन्हा मुन्हा बना लो ना " मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति में कह रहे है भाई अनिल कान्त जी.
हाँ माँ कहने को तो मैं अभी - अभी लौटा हूँ घर से ...पर तुम्हारा प्यार भरा नर्म स्पर्श अभी भी महसूस करता हूँ .....और वो तुम्हारी आँखों से ओझल ना हो जाने तक ...तुम्हे मेरा देखते रहना ....जब चलता हूँ घर से .... तो लगता है रुक जाऊँ,थम जाऊँ .....यहीं ठहर

पराया देश में भाई राज भाटिया जी के प्रवचन "आज का विचार चिन्तन और मोक्ष" . प्रवचन में कई पाठको ने अपनी सहमति जताई ....

नुक्कड़ पे सागर की पुकार....... काय का हो गओ चलिए देखते है क्या पुकार है ...

विष्णु की नाभि से जन्मे हैं ब्रह्मा ( सौजन्य - द वैष्णव वायस ) पुरूष पेट के मानचित्र पर नाभि एक पूरा द्वीप ही है ! और एक खान्च्दार (डिप्रेसन ) रेखा भी नाभि से वक्ष के निचले हिस्से तक जाती है - मगर यह नाभि रेखा ( लीनिया अलवा ) तुंदियल लोगों में नही दिख .....
तुदियल लोगो का पेट लटक जाता है नाभि क्या दिखेगी छुप जाती है पुरूष पर्यवेक्षण में नाभि दर्शन करा रहे भाई अरविंद मिश्र जी साईब्लाग में देखिये नाभि तरह तरह की



बरसों बाद गाँव गया
बरसों बाद गाँव गया सब चिर-परिचित चेहरे दिखे सब पहले सा न था वो बच्चे जो छोटे थे अब बड़े हो गए कभी गोद से न उतरने वाले अचरज से देखते पौधे पेड़ बन चुके थे शायद वो अब भी मुझे पहचानते झूम कर दे रहे अपना परिचय लेकिन वो बरगद का पेड़ न दिखा एक लम्बे इतिहास का मित्र-धन में विष्णु बैरागी ? काय भैय्या इतने दिनन बाद काय

आप सबकी खट्टी-मीठी टिप्पणियों की बदौलत ब्लॉग ने पूरे किए दो साल आज इस ब्लॉग्गिंग परिवार मे हमारा दूसरा जन्मदिन है (अरे मतलब आज ही के दिन हमने ब्लॉग्गिंग शुरू की थी ) इस दो साल के सफर मे हमें एक ऐसे परिवार का साथ मिला जिसमे दूरियां कोई मायने नही रखती है और इस परिवार से एक अटूट रिश्ता बन गया है
दो वर्ष पूर्ण होने पर
......ममता जी बहुत बहुत बधाई ......ढेरो शुभकामना

हमारी एक मित्र है और वो बहुत अच्छा लिखती हैं .... आज ऐसे ही बात बात मैं पता चला कि उन्होंने अपना ब्लॉग भी शुरू किया था पर लिखना छोड़ दिया और काफ़ी महीने से उन्होंने उस पर कुछ नही लिखा है ....उनकी रचना इतनी सुंदर, इतनी भावुक होती हैं कि मत पूछिए खुली आँख से सपना देखा"खट्टी कुछ मीठी" में सभी बंद आँखों से देखते है हमारे भाई अमित जी ने खुली आँखों से देखा गजब है भैय्या जी

०फक्कड़ कवि थे निराला [ निराला के जन्म दिवस पर विशेष ] कृष्ण कुमार यादव जी साहित्य शिल्पी में

एक लाइना

0 कबीर के दोहे: गुरु की अवज्ञा करने वाला कभी तर नहीं सकता ......शब्दयोग सारथी पत्रिका
0 लहरों पे सवार फिदादीन डाक्टर विनीता गुप्ता जी
0 सोनम से चिढ़ने लगी है ऐश्वर्या
0 मरुस्थल का सौन्दर्य जैसलमेर मोतीमहल में
0 सुनो कहानी : प्रेमचंद की 'पत्नी से पति'
उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'पत्नी से पति'

0 जरा देखें तेरे चेहरे पे क्या क़यामत बरस रही है महेन्द्र मिश्र
.....

25 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही ग़ज़ब की चिट्ठी चर्चा की पण्डितजी आज फिर आपने। इतनी मेहनत कैसे कर लेते हैं जी आप ? बहुत उम्दा।

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  2. वाह जी लाजवाब चिठ्ठी चर्चा रही ये तो. बिल्कुल नया स्टाईल. पर हमने तो आपकी चिठ्ठी देख भी ली और बांच भी ली. :)

    रामराम.

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  3. क्या बात है आज से एक लाईना भी..:) सरस छे!!

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  4. बहुत जबरदस्त यत्न। इतनी मेहनत पर सेहत का ख्याल रखियेगा।

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  5. काफ़ी उपयोगी लिंक मिले ...बहुत अच्छी चिट्ठी चर्चा

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  6. सार्थक चर्चा. समीरलाल जी तो गजब ढा रहे हैं. आभार.

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  7. बेहतरीन चर्चा...कार्टून यहाँ भी चेंपा गया..हा हा!!!

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  8. वाह! महेन्द्र जी,बहुत ही मजेदार चर्चा पेश की.

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  9. चर्चा अच्छी लगी. काफी सारे अच्छे आलेख इस चर्चा में आ गये हैं.

    सस्नेह -- शास्त्री

    -- हर वैचारिक क्राति की नीव है लेखन, विचारों का आदानप्रदान, एवं सोचने के लिये प्रोत्साहन. हिन्दीजगत में एक सकारात्मक वैचारिक क्राति की जरूरत है.

    महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)

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  10. बाप रे! कितना परिश्रम करते हैं आप? मेरे लिए तो यह सब कल्‍पनातीत है। आपके इस परिश्रम को नमन। चिट्ठाजगत की जिजीविषा ऐसे ही प्रयासों से उजागर होती है। इसे कहते हैं 'खून-पसीने से सींचना'।

    मेरा और मेरे ब्‍लाग का उल्‍लेख करने के लिए अतिरिक्‍त आभार। आपकी नजरों में, यही बहुत है मेरे लिए।

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  11. फोटो ऐसा लगाया है कि .....कसम उड़ान झल्ले की ...खामखाँ कहते है हमारी शक्ल ऐसी है...अम आजकल तो ये दादी वैसे ही फैशन में है......चिटठा चर्चा मेहनत का काम है .बस कलर बदल दीजिये .ब्लेक से पढने में असुविधा होती है

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  12. चिट्ठी आई है आई है चिट्ठी आई है
    बिल्‍कुल समय से चिट्ठी आई है
    चक्र बना सुदर्शन चक्र
    चिट्ठी आई है
    चिट्ठी भाई है


    अपने सही समय पर
    छुट्टी से पहले ही देखी
    चिट्ठी आई है
    चिट्ठी बहन है।

    ब्‍लॉग घर है सदन है भवन है
    प्‍यार विचार भर कर लाई है
    चिट्ठी आई है
    चिट्ठी सहन है।

    पोस्‍टें हैं चित्र हैं
    कार्टून हैं उड़न तश्‍तरी है
    टिप्‍पणी उड़ न पाई है
    चिट्ठी आई है
    चिट्ठी कहन है।

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  13. अरे इतनी मेहनत करते है आप लोग, मुझे तो टिपण्णी के लिये भी शव्द ढुढने पडते है.
    समीर जी का लाल लाल चेहरे वाला चित्र बहुत सुंदर लगा, ओर आप का यह लेख भी अति सुंदर.
    धन्यवाद

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  14. ahhaha aaj sameer ji ko dekh kar maja aa gaya
    aapne gazab ki charcha ki hai
    bhaut mehnat aur dimagi tikdam
    itne sunderta se kiya gaya hai bahut achha laga

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  15. बड़ी मेहनत कर रहे हैं महेंद्र जी जमाए रहिये !

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  16. महेंद्र जी,लाजवाब चिठ्ठी चर्चा ....ओर मेरे ब्‍लाग का उल्‍लेख करने के लिए आपका आभार।

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  17. ham to bhai sameer ji kaa chitr dekhkar khush ho gaye aur lagaa aap hi asal holi khilaa sakte hain

    jangle bachaate bachaate hum jo mogli ban gaye hai

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  18. bahut badhiya mahendra bhai, ee charcha nahin paricharcha thee jee, hamein to bahut pasand aaye.

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  19. यह दूसरी चिट्ठीचर्चा भी बहुत अच्छी है।

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  20. बहुत मेहनत से की गयी उपयोगी चिट्ठी चर्चा के लिए साधुवाद.

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  21. महेन्द्र जी, लजवाब छिट्ठी चर्चा है्। बहुत से सुंदर चिट्ठाकारों के लिंक मिले, समीर जी का कार्टून तो लाजवाब है।
    भई, आपकी मेहनत सफल हुई।
    महावीर शर्मा

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  22. सार्थक चर्चा के लिए साधुवाद.

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  23. अदभुत चर्चा गुरु
    हार्दिक बधाइया

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आपका ब्लॉग समयचक्र में हार्दिक स्वागत है आपकी अभिव्यक्ति से मेरा मनोबल बढ़ता है .