15.2.09

चिठ्ठी चर्चा : वेलेंटाइन, पिंक चडडी, खतरनाक एनीमिया, गीत, गजल, व्यंग्य ,लंगोटान्दोलन आदि का भरपूर समावेश

आज की चिठ्ठी चर्चा में वेलेंटाइन, पिंक चडडी, खतरनाक एनीमिया, गीत, गजल, व्यंग्य आदि का भरपूर समावेश करने का प्रयास किया है चूंकि कल वेलेंटाइन डे है और कल का दिन हंगामाखेज रहेगा. कल के लिए सभी अपनी अपनी तरह से रणनीति तैयार कर रहे है . कल प्रेमी प्रेमिका और पुलिस की त्रिवेणी की लुका छिपी का खेल खेला जाना निश्चित है . मै भी अपनी कल अपनी और से पूरा पूरा जायजा लेने की भरपूर कोशिश करूँगा इसीलिए कल जिन चिठ्ठो की चर्चा करनी थी सो आज ही कर ली ........... कृपया जिन चिठ्ठो का उल्लेख किया है आप नए पुराने चिठ्ठाकारो को शुभाशीष प्रदान कर उनका मनोबल बढ़ाने का कष्ट करे . चिठ्ठी चर्चा आप सभी को प्रस्तुत कर रहा हूँ।



चडडी दिवस..........


जच्चा-बच्चा दोनों के लिए खतरनाक एनीमिया जानकारी जरुर ले क्योकि सबसे ज्यादा आबादी हमारे देश में बढ़ रही है इस प्रोसेस के कारण हमारे देश में लाखो जच्चा बच्चा असमय काल के गाल में समां जाते है.

* "व्यंग्यात्मक टिप्पणी: वेलेंटाइन डे पर बजरंगी का प्रेम-पत्र" बजरंगी का प्रेम पत्र कलम से उकेरा है भाई संजय ग्रोवर ने जरा बजरंगी का पत्र पढ़ ले.

* " क्या पाकिस्तान भी अफगानिस्तान की राह पर है " इंडिया बोल में बोल रहे है सुनील पुनेठा जरा उनके बोल पढ़ेजी.

* चोखेरबाली बता रही है गुलाबी चडडी अभियान का मूल तत्व ..... चले देखते है चडडी का मूल तत्व . अभी तक मालूम तो न.... था आ. अब मालूम करे ?



हमें गर्व है कि हमने उदारीकरण के बाद एक विशेष समूह में नंबर वन का स्थान प्राप्त किया है. सिर्फ़ एक बार इस वाक्य को गूगल कर के देखें : आप हैरानी में पड़ जायेंगे ..सच्चाई कुछ और है .......टपका लगाए "सच्चाई कुछ और है" पर।
* प्यार को प्यार ही रहने दो ना यार... इसका मजमा क्यों बना रहे हो...? [वेलेंटाईन डे के प्रचलन पर एक विमर्श] - * योगेश समदर्शी साहित्य शिल्पी में....

* गुरुदेव आप तो निकल लो, उसका भाई अपने दोस्तो के साथ किसी को ढूंढ रहा है? बहुत गुस्से मे है .....सतर्क कर रहे है अमीर धरती गरीब लोग में अनिल पुसादकर जी .........

* प्यार को प्यार रहने दो कह रही है राधिका बुधकर जी आरोही में . प्यार को प्यार रहने दो न जाने क्यो तेरी महफ़िल में ....

मेरा अपना जहान में प्रेमचंद की कलम से : अनाथ लड़की .......अनिल कान्त ने ब्लाक में देश के ख्यातिनाम साहित्यकार की कहानी इस ढंग से उकेरी है कि बस पढ़ने का बार बार मन करता है क्या आप नही पढेगे ?

* गुलाब जहाँ चूक जाए वहां जूता चल निकलता है फुटपाथ पर भाई जूता तो सड़क से लेकर आज कल कही भी चलने लगते है . जूते ने बुश को भी नही छोडा भाई अब जूता बहुउपयोगी हो गया है .....

* कीर्तीश भट्ट जी ने सजाई है कारटून में "चड्डी की दुकान" जिनके पास नही है वे चडडी खरीद ले .........


अन्हागाई और स्वप्न - भाई प्रदीप मनोरिया जी कलम से
ऐसी दहकती मंहगाई की आग में क्या क्या बचायेगी
एक एक रुपयों के छीटो से भी क्या यह आग बुझ पायेगी
* सच कह रहे है मनोरिया जी इस आग को कभी कोई न बुझा पायेगा ....मंहगाई और स्वप्न पर क्लिक करे जी........

* भक्त प्रहलाद जब प्रभु प्रेम सरिता में आकंठ निमग्न हो तन मन की सुधि बिसरा तन्मय हो प्रभु वंदन में लीन हो जाते और झूमकर गायन और नृत्य में मग्न हो जाते थे तो उस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए देवता भी विभोर हो इस विहंगम दृश्य का अवलोकन करने और इस दुर्लभ रस का पान करने लगते थे. पढ़कर हम होली के पहले से झूमने लगे वाह .
झूम झूम
रंजना जी की कलम से.

* हास्य कवि दरबार सजा रहे है भाई अविनाश वाचस्पति - कविता तरह तरह की वो भी हास्य व्यंग्य से लबरेज लिखना सीखना हो तो भाई अविनाश से सीखे = इनके हर पोस्ट कमेंट्स में भी हमेशा व्यंग्य ही झलकता है यह अभी तक का अनुभव कहता है . चलिए अब निशाना साधे "हास्य कवि दरबार" पर और हंस ले जी भरकर ......

अरब की लोक कथाओं की पुस्‍तक ‘सितारों की भाषा’ पर उत्‍तर प्रदेश हिन्‍दी संस्‍थान, लखनऊ ने बलभद्र प्रसाद दीक्षित ‘पढीस’ पुरस्‍कार घोषित किया है ....किसको पुरुस्कृत किया गया है ....और .जाने .......मेरी दुनिया मेरे सपनों में. ...भाई जाकिर अली "रजनीश" की कलम से ........

* हम ब्लॉगर संसकृति के ठेकेदार क्यो बन बैठे है .....

* पिंक चड्ढी विवाद के रास्ते अब बहस भारतीय संस्कृति की प्रतिष्ठा का बनता जा रहा है। दस में से सात ब्लाग तो शायद इसी विषय पर पोस्ट डाल रहे हैं। सारे ब्लागों को पढ़ने के बाद एक बात साफ है कि सारे लोग भारतीय संस्कृति के गिरते स्तर को लेकर चिंतित हैं. आइये गपसप करे में ...भाई प्रभात गोपाल जी ...

* चड्ढी-साड़ी आर्बिट्राज ट्रेडिंग स्ट्रेटजी : ओझा उवाच

भाई ये सप्ताह तो चडडी मय हो गया जी ......क्या बात है अभिषेक जी ..
*

मै जानती हूँ ...
मेरे खत का उसे इंतजार नही
मेरे दुख से उसे सरोकार नही,
मेरे मासूम लफ्ज उसे नही बहलाते,

सीमां जी कह रही है.... कुछ लम्हों.... में.

* परिकल्पना में रवीन्द्र प्रभात जी कह रहे है कि प्यार में दूरिया ठीक है ऐसा क्यो .....

* मसिजीवी में मसिजीवी जी कह रहे है कुतर्क की संरचना चडडी तो एक बहाना है . . अब कोई दिवस मनाने रह नही गया है सो इस वर्ष से प्रतिवर्ष इस बार का वेलेंटाइन "चडडी वेलेंटाइन" के नाम से जाना जाएगा ...भाई जी...

* प्रेम की स्थिति सच में बहुत विचित्र होती है मन की अनन्त गहराई से प्यार करने पर भी यदि निराशा हाथ लगे तो ना जिया जाता है ना मरा........कुछ मेरी कलम से रंजना जी बता रही है ढाई अक्षर .....

दुल्हन रही न दुल्हन, डोली रही न डोली
जब क़ातिलों के उन पर ख़ंजर के वार गुज़रे।
सैलाब आँसुओं के, बिखराव गेसूओं के
आँचल उतर के सर से हो तार-तार गुज़रे
* लेखिका-लीलावती बंसल
प्रस्तुतकर्त्ता- भावना कुँअर

* मल्हार में सुब्रमनियम जी थाईलेंड जाने की सलाह क्यो दे रहे है. . दादा अपना सुंदर देश काहे को छोड़ने की सलाह दे रहे है का हमारो से ब्लागरो से कोई गलती हुई गई है का ..........

हिन्दी गद्य लेखन के शुरूआती दौर के लेखकों में एक महत्वपूर्ण नाम बाल कृष्ण भट्ट का है. भट्ट जी ने प्रेम की व्याख्या इन शब्दों में की है. -
"भक्ति,आदर,ममता,आनंद,वैराग्य,करुणा आदि जो भाव प्रतिक्षण मनुष्य के चित्त में उठा करते हैं,उन सबों के मूल तत्व को एक में मिला कर उसका इत्र निकाला जाय, तो उसे हम 'प्रेम' इस पवित्र नाम से पुकार सकेंगे....शकुनाखर में भाई में भाई हेम पांडे जी को पढ़े ....

* कागज की पर्चियों को अब बेगारी भी नही मिलती
देर रात तक "एस.एम् एस " ही गुलाब तक ढोता है .......
ये इश्क भी इन दिनों कितना पेचीदा है...........डाक्टर अनुराग दिल की बात बता रहे है ....आखिर ये इश्क मुश्क का चक्कर बड़ा पेचीदा होता है ..........

भक्त प्रह्लाद। भगवान का परम भक्त . भक्ति भी ऐसी कि उसके पिता को अपनी जान गंवानी पड़ी... उसी का बेटा विरोचन और विरोचन का बेटा बलि......* "अलग सा" में गगन शर्मा जी फरमा रहे है ......देवताओ ने किसी को भी नही बक्सा.........

* आंख की किरकिरी ........गुलाबी अंतवस्त्र किसको लाजयेगा .....नीलिमा जी की कलम से . गुलाब और गुलाबी सबको पसंद रहते है ...........

* यह बात बहुत पुरानी है, एक बार एक आदमी अपनी बहिन से मिलने जा रहा था,पुराना समय था, कोई कार, स्कुट्रर वगेरा नही थे, लोग पेदल ही एक जगह से दुसरी जगह जाते थे, तो यह आदमी भी पेदल ही घर से चल पडा, चलते चलते,शाम हो गई, ओर वो आदमी भी थक गया,उस से सोचा चलो कही किसी गांव मे किसी के घर रात गुजार लेता हूं,होटल तो होते नही थे, ओर जमाना अच्छा था, लोग मेहमान को भगवान समझ कर रखते थे.
छोटी छोटी बातो में बता रहे है तुम आज मेरे साथ जरा हंस लो राज भाटिया जी.


* योगेश स्वप्न जी की तीन लघु रचना ....... स्वप्न पर किलिक करे जी ...

* महेन्द्र मिश्र ........निरन्तर में व्यंग्य (हास्य) साफ्टवेअर इंजिनियर और फिल्मी नाम पर नेट का तड़का.

आज की ग़ज़ल.
मनोहर शर्मा "सागर" जी की तीन ग़ज़लें
...द्विज जी बढ़िया शानदार प्रस्तुति .............गजल में .....
अब प्रति रविवार चिठ्ठा चर्चा करने की कोशिश करूँगा. अच्छा चलता हूँ.

जय वेलेंटाइन जय पिंक चडडी

इजहार करना है तो
छिप छिप कर न करे
खुलकर प्यार करे प्यार करे
छोटा हो बड़ा या बूडा हो
उन्हें प्यार भरा इजहार करे.

मानसिक हलचल में ज्ञान जी का लंगोटान्दोलन ........चलिए देखते है लंगोट कैसे घुमा रहे है ...

लाल और बबाल जी की जुगलबंदी ..............लिखा जो खत तुझे वो तेरी याद में .......पुराना दर्द उखाडा इस वेलेंटाइन पर .....

20 टिप्‍पणियां:

  1. उम्दा चर्चा है. कई ऐसी चीज़ें भी पढने को मिल गईं जिनसे वंचित रह गए थे.

    उत्तर देंहटाएं
  2. चर्चा में रोचकता बढती ही जा रही है , महेंद्र भाई.
    -विजय

    उत्तर देंहटाएं
  3. अच्छी चर्चा. धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेहतरीन कवरेज के साथ इत्मिनान से की गई चर्चा. बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  5. बढ़िया है! अच्छा कवरेज!

    उत्तर देंहटाएं
  6. क्या बात है पंडितजी, बहुत सुन्दर रंगों से सजी ये चिट्ठा चर्चा अब गुल खिलाएगी। बहुत बढ़िया मेहनत नज़र आ रही है इसमें आपकी। वाह वाह!

    उत्तर देंहटाएं
  7. Bhai Mishraji,
    mere blog ki charcha ke liye bahut-bahut aabhar. Achchha sanyojan-sanklan kiya hai aapne. Magar ek bahut zaruri sanshodhan rah gaya hai, use bhi kar deN to kya hi achchha ho. Bajrangi ka prem-patra meri nahiN,bhai ABBAS ki kalam se nikla hai jise maine Patrika "Yuddhrat AamAdmi" se sabhar liya hai. Pure details neeche haiN :-
    संपर्क: अब्बास, नूर-ए-इलाही, घौंडा, दिल्ली-110053
    (युद्धरत आम आदमी, अप्रैल-जून, 2008 से साभार )

    उत्तर देंहटाएं
  8. मेहनत साफ़ नजर आ रही है इस चर्चे में अच्छा लिखा है आपने

    उत्तर देंहटाएं
  9. इसी बहाने चर्चा के नये आयाम पता लगे... बधाई दादा..

    उत्तर देंहटाएं
  10. बढिया समानांतर चिट्ठा चर्चा .....सार्थक और सारगर्भित .....अच्छा लगा आपकी यह प्रस्तुति देखकर, सुखद अनुभूति हुयी !

    उत्तर देंहटाएं
  11. " रंग बिरंगी चर्चा अच्छी लगी .......कोई शक नही की दिल से लिखी की है....और सभी को स्थान दिया गया है..."

    Regards

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपकी मेहनत की दाद देनी पड़ेगी. साधुवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत चकाचक चर्चा रही दद्दाजी.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  14. गागर में सागर भर दिया आपने।

    उत्तर देंहटाएं
  15. इस चिट्ठी का रहेगा इंतजार
    पर कब आएगा अगला रविवार
    रविवार को तो होती छुट्टी है
    चिट्ठा मिल सकता है जरूर
    पर चिट्ठी कैसे मिलेगी हजूर

    आप चिट्ठी ही बंचवाते रहेंगे
    तो मजे खूब सारे आते रहेंगे
    चिट्ठी लिखने वाला जी नेक
    पढ़ने वाले बन गए हैं अनेक

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत मेहनत कर रहे आओ.. सार्थक प्रयास.. बधाई..

    उत्तर देंहटाएं

आपका ब्लॉग समयचक्र में हार्दिक स्वागत है आपकी अभिव्यक्ति से मेरा मनोबल बढ़ता है .