8.5.16

" परशुराम जयंती " के अवसर पर हार्दिक बधाई शुभकामनाएं ...

जय परशुराम : सभी मित्रों स्नेहीजनों शुभचिंतकों को " परशुराम जयंती " के अवसर पर हार्दिक बधाई शुभकामनाएं ...

ब्रामण महिमा ...



ब्रामण लात हनी, हरी के तन
ब्रामण, साठ हजार को जारे ।
ब्रामण पैठि पाताल, छले बलि
ब्रामण ही, क्षत्रिय दल मारे ।
ब्रामण शोख, समुद्र लियो
ब्रामण ही यदुवंश, उजारे ।
ब्रामण जन से बैर करे तो
ब्रामण से, परमेश्वर हारे ।

लेखक कवि - डॉ आचार्य भृगुनंदन
( शारदा प्रसाद जी भार्गव )
बुरहानपुर एमपी .

6.5.16

दूध माफियों पर लगाम कसने के लिए जबलपुर कलेक्टर की भूमिका सराहनीय ...


मध्यप्रदेश में जबलपुर शहर में इन दिनों दूध के रेट अन्य शहरों की तुलना में सबसे अधिक है जिससे शहर के वाशिंदे अत्याधिक त्रस्त हो गए हैं .  इस शहर में दो तीन माहों में दूध माफिया दूध के रेट सीनाजोरी के बल पर बढ़ा देते हैं और राजनीतिक संरक्षण  के चलते आयेदिन शासन और प्रशासन को खुली चुनौती देते रहते हैं .  इस समय शहर में दूध के रेट 48/- से 5o/- के बीच चल रहे हैं और दूध विक्रेता दूध के रेट और बढ़ाने की बात को लेकर आन्दोलन की बात कर रहे हैं . भीषण मंहगाई के समय में दूध के मूल्य बार बार बढ़ाना न्योयोचित नहीं है .
एक रपट में मैंने पढ़ा है कि  हमारे देश में गरीब ग्रामीण परिवार 35 /- रुपये प्रतिदिन और शहरों में गरीब परिवार 65 /- रुपये प्रतिदिन में भीषण मंहगाई के ज़माने में बामुश्किल अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं .  इतनी कम आय में इस ज़माने में परिवार चलाना बहुत ही मुश्किल है .  हमारे देश में अभी भी गरीब जन बहुत अधिक है .

कई गरीब अल्प आय वाले परिवार आज के समय में अपने बच्चों को मंहगा दूध पिला सकने की स्थिति में नहीं हैं  जिससे बच्चों में कुपोषण बढ़ रहा हैं और बच्चे कमजोर और बीमार हो रहे हैं .  इस शहर में दूध माफिया सर्वाधिक फायदा उठा रहे हैं .  जो दूधिया दो साल पहले साईकिल पर दूध बांटता था आज वह फॉर व्हीलर में दूध बाँट रहा हैं ऐसे कई दूध विक्रेता इस शहर में देखे जा सकते हैं ..  यदि आपने 50 /- में एक लीटर दूध खरीद भी लिया है तो उसकी यह गांरटी नहीं है कि  वह १०० प्रतिशत शुद्ध हो और ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के उपयोग से उत्पादित दूध हो और उसमें २० से २५ प्रतिशत तक पानी मिला हो .

इस समय जबलपुर शहर के मुखिया श्री चौधरी साहब जी नेतृत्व में इन दूध माफियों के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया जा रहा है .  डेयरियों की प्रशासन के द्वारा जोरदार नाकाबंदी की जा रही है .  प्रतिदिन दूध विक्रेताओं से दूध के सेम्पल लिए जा रहे हैं और भारी तादाद में मिलावटी दूध भी पकड़ा जा रहा है .  कई समाजसेवी संस्थाओं द्वारा शासन और प्रशासन को दूध के मूल्यों में कमी करने हेतु ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं और दूध 45/- लीटर उपलब्ध कराने हेतु मांग की जा रही है .

इस समय जिला प्रशासन द्वारा दूध माफियों के खिलाफ नाकाबंदी की गई है उससे शहर में दूध की सप्लाई में भारी कमी आ गई है और दूध विक्रेताओं में हड़कंप की स्थिति मच गई है .  कई दूध विक्रेता अब 50/- रुपये लीटर दूध बेचने की बात भी करने लगे हैं .  जबलपुर में बड़े दूध संचालकों के द्वारा दूध वेंडरों को कम  रेट पर दूध दिया जाता है और दूध के दाम बढ़ाने में इनकी और शहर के राजनीतिक नेताओं की भूमिका संदिग्घ है  ...  प्रशासन और शासन को इनके ऊपर कठोर कार्यवाही करना चाहिए  ...

जिला प्रशासन द्वारा इन दूध माफियों के खिलाफ जो अभियान चलाया जा रहा है उससे आम नागरिक भी खुश हैं और जिला प्रशासन को इस हेतु साधुवाद दे रहे हैं .  दूध माफियों के खिलाफ इस तरह के अभियान बिना राजनीतिक दबाब के लगातार चलाये जाने की नितांत जरुरत हैं जिससे गरीब आम नागरिक को भी दूध सुगमता के साथ उपलब्ध हो सकें और नन्हें मुन्ने से उनके मुंह से दूध का निवाला न छिन सकें .

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4.5.16

माढ़ोताल तालाब जबलपुर को संरक्षित कर इसका सौंदर्यीकरण करवाया जाये ...

जबलपुर : माढ़ोताल तालाब - कभी गोड़वाना की रानी दुर्गावती के द्वारा अपने सैनिकों की छावनी एवम जनता के लिए 100 एकड़ का तालाब खुदवाया गया था अब अतिक्रमण के चलते और विकास की दौड़ के चलते इसका अस्तित्व खतरे में है  ... आधे तालाब में बस टर्मिनल बन गया है और बचे खुचे तालाब में चोई ही चोई दिखाई दे रही है  और थोड़े से ही हिस्से में पानी दिखाई देता है .



इस तालाब के कारण आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर बना रहता था इसके समाप्त हो जाने से भूमि के जल स्तर में कमी आयेगी  .. प्रशासन को चाहिए कि बच्चे खुचे ऐतिहासिक तालाब को संरक्षित करें और पक्के घाट का निर्माण कराकर साफ़ सफाई कराकर इसका सौंदर्यीकरण करवा दें जिससे इतिहास भी सुरक्षित रहें और आसपास की जनता को इसका लाभ मिल सकें  ...

27.4.16

"" ... जल संरक्षण हेतु वाटर हारवेस्टिंग से भी सस्ता घरो में सोकपिट जरुर बनवाये ..""

बारिश आने के पूर्व जल संरक्षण हेतु तैयार हो जाएँ ... कारगर और सस्ता तरीका

दिनोदिन भूमि का जलस्तर निरंतर कम होता जा रहा है जिसके कारण दिनोदिन पानी का संकट गहराता जा रहा है. यदि आप भी पानी की समस्या से ग्रस्त है तो आप अपने घरो में मुहल्लों में सोकपिट अवश्य बनवाये. वाटर हारवेस्टिंग प्रणाली में थोडा खर्चा आता है इसमें आपको बोरबेल खुदवाना पड़ता है और पाइप्स वगैरा की जरुरत पड़ती है जो आम गरीबजन के लिए मंहगा पड़ता है.

आज मै आपको सोकपिट के बारे में जानकारी दे रहा हूँ जिसमे कोई अधिक खर्च नहीं करना पड़ता है. भूमि का जलस्तर बढ़ाने के लिए वाटर हारवेस्टिंग और सोकपिट प्रणाली अपनाई जा रही है. आप समय रहते अपने घरो में और मुहल्लो में अपने जीवन में सोकपिट जरुर बनवाये. बरसात के पूर्व सोकपिट बनवाये. आप अपने घर या आसपास उपयुक्त स्थान पर बनवाये जहाँ पर छतो से या अन्य जगह से पानी बहकर आता हो.

 फोटो - सोकपिट जल संरक्षण हेतु ...

उपयुक्त स्थान पर पॉँच फुट गहरा पांच फुट चौडा और पांच फुट लम्बा गड्डा खुदवाये. गड्डे के अन्दर वगैर सीमेंट और मिट्टी की मदद से ईटो को जुडवाए. फिर इस गड्डे में एक फुट की ऊंचाई तक रेत भरवाए और रेत के बाद एक फुट की ऊंचाई तक कोयला भरवाए फिर कोयले के ऊपर एक फुट तक मोटी बजरी भरवाए. गड्डे के शेष बचे स्थान पर टूटे फूटे अद्धा पौना ईटो के टुकड़े भरवाए और गड्डे को चीपो से ढांक दे. गड्डे को अच्छी तरह से ढांक दे जिससे गड्डे में मच्छर और अन्य कीडे मकौडे न रह सके. छत या जहाँ से बरसाती पानी बहकर आता है को एक पाइप के जरिये इस गड्डे में जाने दे. लीजिये आपका सोकपिट तैयार हो गया इसके माध्यम से भूमि का कुंओ का जलस्तर बढेगा और काफी समय तक आपको पानी के संकट से निजाद दिला सकता है.

रिमार्क - जहाँ भी पानी बहता देखे उसे रोके और अन्य को भी बहते पानी को रोकने हेतु प्रेरित करें. जल ही जीवन है. जल है तो कल है ...