4.5.16

माढ़ोताल तालाब जबलपुर को संरक्षित कर इसका सौंदर्यीकरण करवाया जाये ...

जबलपुर : माढ़ोताल तालाब - कभी गोड़वाना की रानी दुर्गावती के द्वारा अपने सैनिकों की छावनी एवम जनता के लिए 100 एकड़ का तालाब खुदवाया गया था अब अतिक्रमण के चलते और विकास की दौड़ के चलते इसका अस्तित्व खतरे में है  ... आधे तालाब में बस टर्मिनल बन गया है और बचे खुचे तालाब में चोई ही चोई दिखाई दे रही है  और थोड़े से ही हिस्से में पानी दिखाई देता है .



इस तालाब के कारण आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर बना रहता था इसके समाप्त हो जाने से भूमि के जल स्तर में कमी आयेगी  .. प्रशासन को चाहिए कि बच्चे खुचे ऐतिहासिक तालाब को संरक्षित करें और पक्के घाट का निर्माण कराकर साफ़ सफाई कराकर इसका सौंदर्यीकरण करवा दें जिससे इतिहास भी सुरक्षित रहें और आसपास की जनता को इसका लाभ मिल सकें  ...

27.4.16

"" ... जल संरक्षण हेतु वाटर हारवेस्टिंग से भी सस्ता घरो में सोकपिट जरुर बनवाये ..""

बारिश आने के पूर्व जल संरक्षण हेतु तैयार हो जाएँ ... कारगर और सस्ता तरीका

दिनोदिन भूमि का जलस्तर निरंतर कम होता जा रहा है जिसके कारण दिनोदिन पानी का संकट गहराता जा रहा है. यदि आप भी पानी की समस्या से ग्रस्त है तो आप अपने घरो में मुहल्लों में सोकपिट अवश्य बनवाये. वाटर हारवेस्टिंग प्रणाली में थोडा खर्चा आता है इसमें आपको बोरबेल खुदवाना पड़ता है और पाइप्स वगैरा की जरुरत पड़ती है जो आम गरीबजन के लिए मंहगा पड़ता है.

आज मै आपको सोकपिट के बारे में जानकारी दे रहा हूँ जिसमे कोई अधिक खर्च नहीं करना पड़ता है. भूमि का जलस्तर बढ़ाने के लिए वाटर हारवेस्टिंग और सोकपिट प्रणाली अपनाई जा रही है. आप समय रहते अपने घरो में और मुहल्लो में अपने जीवन में सोकपिट जरुर बनवाये. बरसात के पूर्व सोकपिट बनवाये. आप अपने घर या आसपास उपयुक्त स्थान पर बनवाये जहाँ पर छतो से या अन्य जगह से पानी बहकर आता हो.

 फोटो - सोकपिट जल संरक्षण हेतु ...

उपयुक्त स्थान पर पॉँच फुट गहरा पांच फुट चौडा और पांच फुट लम्बा गड्डा खुदवाये. गड्डे के अन्दर वगैर सीमेंट और मिट्टी की मदद से ईटो को जुडवाए. फिर इस गड्डे में एक फुट की ऊंचाई तक रेत भरवाए और रेत के बाद एक फुट की ऊंचाई तक कोयला भरवाए फिर कोयले के ऊपर एक फुट तक मोटी बजरी भरवाए. गड्डे के शेष बचे स्थान पर टूटे फूटे अद्धा पौना ईटो के टुकड़े भरवाए और गड्डे को चीपो से ढांक दे. गड्डे को अच्छी तरह से ढांक दे जिससे गड्डे में मच्छर और अन्य कीडे मकौडे न रह सके. छत या जहाँ से बरसाती पानी बहकर आता है को एक पाइप के जरिये इस गड्डे में जाने दे. लीजिये आपका सोकपिट तैयार हो गया इसके माध्यम से भूमि का कुंओ का जलस्तर बढेगा और काफी समय तक आपको पानी के संकट से निजाद दिला सकता है.

रिमार्क - जहाँ भी पानी बहता देखे उसे रोके और अन्य को भी बहते पानी को रोकने हेतु प्रेरित करें. जल ही जीवन है. जल है तो कल है ...

26.4.16

जबलपुर में चंद दुग्ध माफियाओं की मनमर्जी और नन्हें मुन्ने बच्चों के मुंहे से दूध का निवाला छीनने की कोशिशें ...

जबलपुर में गरमी शुरू होते ही दुग्ध माफियाओं का जोर बढ़ जाता है और वे हमेशा की तरह प्रशासन और जनता पर अपना दबाब बनाना शुरू कर देते हैं और मनमाने ढंग से दूध के रेट बढ़ा देते हैं  ... करीब पांच साल से दूध के रेट अन्य शहरों की अपेक्षा जबलपुर में सर्वाधिक हैं ...

करीब पांच साल से प्रति वर्ष गर्मियों के दिनों में शहर के चंद दूध माफिया दूध के रेट बढ़ा देते हैं और कुछ दिन प्रशासन और दूध माफियाओं के बीच दामों को लेकर चर्चा होती है और सत्ता पक्ष के नेतालोग दिखावे के लिये शासन को ज्ञापन देते हैं और विपक्षी पार्टियां जनता को कम रेट पर दूध देने का नाटक करती हैं और शहर में कम  दाम पर पचास रुपये लीटर का बोर्ड लगाकर दूध बेचने हेतु स्टॉल खोल कर बैठ जाती हैं  ...

कुछ दिनों तक प्रशासन भी दूध का फेट चैक करने के नाम पर सख्ती बरतता है और कुछ दिनों बाद नेता और विपक्षी पार्टियां और प्रशासन खामोश बैठ जाता है और दूध के रेट मनमाने ढंग से बढ़ जाते हैं . इस वर्ष भी दूध के दाम बढाने की कोशिशें की जा रही हैं और जबलपुर में साठ  से सत्तर रुपये प्रति लीटर बेचने की तैयारी चंद दूध माफिया कर रहे हैं और विपक्षी पार्टियों के द्वारा सस्ते दामों पर दूध बेचने  के लिए दूध के स्टाल लगा लिए गए हैं ...

चंद दूध माफियों की मनमर्जी शहर की तीस लाख जनता को हर साल परेशानी में डाल देती है . आम जनता में यह चर्चा है कि नेताओं के दिखावे के बाद हर हाल में इस साल भी दूध के दामों में भारी बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है . दूध नन्हें मुन्नों के लालन पोषण के लिए मुख्य आहार है और दूध के दाम बढ़ाकर बच्चों के मुंह से दूध का निवाला छीनने की फिर से कोशिशें की जा रही है और गरीबों को दूध से वंचित करने की कोशिशें की जा रही है ..

प्रशासन को मुनाफाखोर दूध माफियों पर अब सख्ती से काम लेना चाहिये और अगर दूध माफिया शहर की तीस लाख जनता के हितों को ध्यान में नहीं रखते हैं तो प्रशासन को आवश्यक कार्यवाही करते हुए कठोर से कठोर कार्यवाही करना चाहिए और ऐसे समाज विरोधी मुनाफाखोर तत्वों को जनहित में जेल तक भेजने की व्यवस्था करना चाहिए ...

19.4.16

" और छूटने लगा है लोटा " और "छूट भी नहीं रहा लोटा ..."

लोटा संस्कृति अपने देश में बहुत पुरानी है 21 वीं सदी में हम भलाई पहुँच जाएँ पर इसका मोह कभी न छोड़ सकेंगें ... लोग बाग गांवों में और स्मार्ट बनने जा रहे शहरों में लोग बाग आज भी लोटा लेकर शौच करने जाते हैं गांवों में सुबह सुबह सड़क के किनारे लोगबाग शौच करते दिखाई देते हैं ...


देश में तन से और मन से और धन से स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है और घर घर में शौचालय बनाने की बातें खूब की जा रही हैं . यदि कहीं भी शौचालय बनाये भी गए हैं तो वे व्यवस्थित नहीं हैं .. खूब प्रचार प्रसार किया जाता है और खूब रैलियां निकाली जाती हैं और इसके समर्थन में प्रिंट मीडिया के द्वारा कभी कभी लल्लू चप्पूगिरी करते हुये अधिक वाहवाही छाप दी जाती है जैसा कि मैंने आज दैनिक  जागरण के समाचार पत्र में पढ़ा कि " अब छूटने लगा है लोटा " जबकि हकीकत यह है कि " अभी भी छूट नहीं रहा लोटा " ... मैं जबलपुर जैसे शहर में प्रातः जब घूमने जाता हूँ तो मुझे कई गरीब महिलायें सड़क के किनारे शौच करती दिखाई देती हैं तब मन गहरी सोच में पड जाता है कि हम चाँद मंगल पर क्यों न पहुँच जाएँ कितना भी आधुनिक बनने का प्रयास करें और झूठा प्रसार प्रसार कर लें पर अपने देश में " लोटा एकदम नहीं छूट " सकता यह कटु सत्य है  ... टीव्ही और प्रिंट मीडिया के समाचारों पर अब भरोसा नहीं होता है ...

प्रिंट मीडिया एक जगह की केवल एक फोटो छापकर यह प्रदर्शित करने की कोशिश करता है कि जैसे ऐसी समस्या और कहीं नहीं है और थोथी वाहवाही लूटने का प्रयास करता है .. आबादी के हिसाब से देश में अभी भी काफी शौचालयों की कमी है और अभी भी इस दिशा में काफी ठोस प्रयास  की जरुरत है साथ ही लोगों को भी जागरूक किया जाना जरुरी है कि वे खुले में शौच ना जाये तभी लोटा संस्कृति में कमी आएगी ...