26.4.17

जबलपुर में दूध माफियाओं के आगे मुखयमंत्री शिवराज सिंह जी और जिला प्रशासन झुका ...

जबलपुर में गरमी शुरू होते ही दुग्ध माफियाओं का जोर बढ़ जाता है और वे हमेशा की तरह प्रशासन और जनता पर अपना दबाब बनाना शुरू कर देते हैं और मनमाने ढंग से दूध के रेट बढ़ा देते हैं . करीब पांच साल से दूध के रेट अन्य शहरों की अपेक्षा जबलपुर में सर्वाधिक हैं जबकि प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े शहर इंदौर में चालीस रुपये प्रति लीटर दूध बेचा जा रहा है .
 करीब पांच साल से प्रति वर्ष गर्मियों के दिनों में शहर के चंद दूध माफिया दूध के रेट बढ़ा देते हैं और कुछ दिन प्रशासन और दूध माफियाओं के बीच दामों को लेकर चर्चा होती है और सत्ता पक्ष के विपक्षी पार्टियां के नेता लोग दिखावे के लिये शासन को ज्ञापन देते हैं .
कुछ दिनों दिनों पहले जबलपुर के जिला कलेक्टर के द्धारा दूध के रेट 44 रुपये प्रति लीटर निर्धारित कर दिए गए थे चंद दूध माफियाओं के दबाब में राज्य शासन के द्धारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने की बात कह जिला कलेक्टर के द्धारा निर्धारित किये गए रेटों को वापिस करवा दिया गया है जिससे दूध माफियाओं को मंहगे रेट पर दूध बेचने की खुली छूट मिल गई है . इस वर्ष भी दूध के दाम बढाने की कोशिशें की जा रही हैं और जबलपुर में साठ से सत्तर रुपये प्रति लीटर बेचने की तैयारी चंद दूध माफिया कर रहे हैं .
चंद दूध माफियों की मनमर्जी शहर की तीस लाख जनता को हर साल परेशानी में डाल देती है और शासन और प्रशासन हक्का बक्का होकर मौन रहकर यह सब देखता रहता है और चंद दूध माफियाओं की मनमर्जी पर रोक नहीं लगा पा रहा है .
आम जनता में यह चर्चा है कि नेताओं के दिखावे के बाद हर हाल में इस साल भी दूध के दामों में भारी बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है . दूध नन्हें मुन्नों के लालन पोषण के लिए मुख्य आहार है और दूध के दाम बढ़ाकर बच्चों के मुंह से दूध का निवाला छीनने की फिर से कोशिशें की जा रही है और गरीबों को दूध से वंचित करने की कोशिशें की जा रही है ..
कल जबलपुर में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह के द्धारा यह कहा गया है कि दूध के दाम निर्धारित करना बाजार का काम है और शासन कुछ नहीं कर सकता है इससे यह साबित होता है कि मुखयमंत्री जी बाजारवाद को बढ़ाबा दे रहे हैं और इस तरह से मुनाफाखोरों को प्रोत्साहित कर रहे हैं और  दूध व्यापारियों के द्धारा जो मूल्यवृद्धि की जा रही है उसका मुख्यमंत्री जी का खुला समर्थन है . प्रदेश शासन और जिला प्रशासन का यह दायित्य है कि मुनाफाखोरी और मनमर्जी पूर्वक बढ़ाये जा रहे दाम रोकें .
मुख्यमंत्री जी के द्धारा दिए उनके गैर जिम्मेदाराना बयान से शहर की जनता में आक्रोश फ़ैल गया है और जबलपुर में इसका प्रबल विरोध करने की तैयारी चल रही है और कुछ संस्थाएं विरोध करने आंदोलनरत हैं . प्रदेश शासन को मुनाफाखोर दूध माफियों पर अब सख्ती से काम लेना चाहिये और अगर दूध माफिया शहर की तीस लाख जनता के हितों को ध्यान में नहीं रखते हैं तो प्रशासन को आवश्यक कार्यवाही करते हुए कठोर से कठोर कार्यवाही करना चाहिए और ऐसे समाज विरोधी मुनाफाखोर तत्वों को जनहित में जेल तक भेजने की व्यवस्था करना चाहिए .
 जनहित के इस मुद्दे पर यदि प्रदेश शासन के द्धारा गंभीरतापूर्वक कार्यवाही नहीं की गई तो निश्चित है कि इससे आगे प्रदेश शासन की छबि खराब होगी और इसका खामियाजा आगे सरकार को भुगतना पडेगा ..

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