6.7.16

मेरा फोटोग्राफी का शौक : तब और अब

एक समय बचपन में यदि कोई फोटोग्राफर फोटो खींचता था तो मैं उसे और उसके कैमरे को बड़े ध्यान से देखता था । उस समय बॉक्सनुमा कैमरा होता था । कैमरे में आगे लैंस लगा होता था और उस बॉक्स के पीछे एक काला कपड़ा लगा होता था फोटो खींचते समय फोटोग्राफर बॉक्स के अंदर अपना सिर घुसेड़ लेता और अपना सिर काले कपडे से ढँक लेता था और उस बॉक्स के पीछे खड़े होकर फोटो खींचता था । यह सब देखकर मन में बड़ी इच्छा होती थी कि मैं भी कभी फोटो खींचूंगा । पास में कैमरा नहीं था तो बचपन में फोटो खींचने का मौका नहीं मिला । नौकरी में आने के बाद सन् 1982 में करीब 34 साल पहले अपनी हैसियत के अनुसार हॉट शॉट - 110 कैमरा लिया था ।

फोटोग्राफी सिखाने के लिए कोई गुरु नहीं था बस अंधाधुंध फोटो लेना शुरू कर दिया था और इतना भी तरीका नहीं था कि सूर्य के सामने कैमरे की आँख कर फोटो नहीं ली जाती । उस समय कैमरे में 110 एमएम की रील लगती थी जिसमें करीब 22 फोटो खींच सकते थे । कैमरे से फोटो तो खींच लेता था पर फोटो का रिजल्ट फोटो की धुलाई करवाने के बाद नेगेटिव और फोटो के प्रिंट निकलवाने के बाद ही पता चलता था कि फोटो अच्छी या खराब आई हैं । मार्केट में कैमरे की रील खरीदने और फिर उसको धुलवाने के लिए भागदौड़ करना पड़ती थी । उस समय के हिसाब से कैमरे की रील और उसकी धुलवाई और प्रिंट निकलवाना थोड़ा मंहगा लगता था और फोटो खराब निकल आने पर मन भी खराब हो जाता था ।

 फोटो - हॉट शॉट कैमरा - 110 एमएम

फोटो - हॉट शॉट कैमरा - 110 एमएम

एक दिन लगा कि फोटो खींचना अपने बस की बात नहीं है तो अपने इस कैमरे को घर के संग्रहालय में सुरक्षित रख दिया था । आज इसे देख कर 34 वर्ष पुरानी यादें तरोताजा हो गई ।

सन् 2003 में इंटरनेट में ऑरकुट की प्रोफाइल बनाई थी और उसमें और हिंदी ब्लॉग में फोटो अपलोड करने के लिए फिर से फोटोग्राफी का शौक जाग उठा और फोटो अपलोड करने के लिए मोबाईल का सहारा लेना शुरू कर दिया था । फोटोग्राफी के साथ वीडियो बनाना सीखा फिर करीब 150 यू टूयूब अपलोड की ।

समय बदलने के साथ साथ अब एक से एक डिजिटल कैमरे मार्केट  में आ गए हैं जिनमें फोटो खींचने के बाद तुरंत फोटो देख लेने की सुविधायें भी दी गई हैं और अपनी फोटो डेटा केबिल के माध्यम से सीधे अपलोड कर सकते हैं । थ्री जी मोबाईल के माध्यम से आप अपनी फोटो और वीडियो को किसी भी स्पॉट से सोशल साइड में अपलोड कर सभी को दिखा सकते हैं । आजकल मोबाइलों में अधिकाधिक मेगापिक्सल के कैमरे आ रहे हैं जिनसे बढ़िया फोटो ली जा सकती है और इनके माध्यम से वर्ल्ड वेब साइड में किसी भी स्पॉट से किसी भी कार्यक्रम के अच्छे वीडियो का लाइव वेब कास्टिंग (सीधा प्रसारण) कर सकते हैं ।

उस दौर के कैमरे और आज के दौर के कैमरों में काफी अंतर आ गया आया है और अब फोटोग्राफी सहजता और सुगमता के साथ की जा सकती है । न रील खरीदने की झंझट न प्रिंट निकलवाने की झंझट है और तुरंत ही कैमरे में फोटो देख लो । उस दौर की फोटोग्राफी और कैमरे देख कर मन आज भी खट्टा हो जाता है कि एक फोटो के लिए कितनी मसक्कत भागदौड़ करना पड़ती थी । इंटरनेट से जुड़ने के बाद से मेरा फोटोग्राफी का शौक सबसे पसंदीदा शौक बन गया है और इसके कारण मेरा समय भी बढ़िया कट जाता है और जहाँ कहीं भी जाता हूँ तो फोटो खींच लेने का मोह नहीं छोड़ पाता हूँ । 

3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (08-07-2016) को "ईद अकेले मना लो अभी दुनिया रो रही है" (चर्चा अंक-2397) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रश्मि प्रभा... ने कहा…

http://bulletinofblog.blogspot.in/

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

अब तो ये सब खत्म।