24.6.16

बढ़ती मंहगाई से जीवनयापन करना दूभर : सरकारें मंहगाई रोकने में असफल

देश में दिनोंदिन  मंहगाई बढ़ती जा रही है जिसके कारण मध्यम वर्ग और गरीबी रेखा के नीचे आने वाले परिवारों का जीवन यापन करना मुश्किल होता जा रहा है । प्रतिदिन खानपान में उपयोग आने वाली सामगी राशन, तेल, दूध , दालें मंहगी होने के कारण आम आदमी की पहुंच से दूर होते जा रही हैं और इन चीजों के रेट बढने के कारण अन्य व्यापारी और दूसरा वर्ग जो उपभोक्ताओं को अन्य सेवाएं प्रदान करता है वह भी मंहगाई का हवाला देते अपनी सामगी और सेवाओं के दाम बढ़ा रहे  हैं जिससे मंहगाई घटने की बजाय सुरसा की तरह बढ़ती ही चली जा रही है । सरकार कभी भी किन कारणों से मंहगाई बढ़ रही है उनकी और ध्यान नहीं दे रही  है और उसे नियंत्रित करने हेतु कोई उपाय भी नहीं कर रही  है ।

हर चुनाव में नेताओं के द्वारा मंहगाई घटाने जैसे मुद्दों की खूब नेतागणों के द्वारा खूब  चर्चा की गई  है परन्तु चुनाव जीतने के बाद नेतागण अपने ही बताये मुद्दों को भूल रहे हैं । देश में जितने भी चुनाव हुए हैं उन सभी में नेताओं के द्वारा मंहगाई को घटाने को लेकर खूब बड़ी बड़ी बातें की जाती हैं परन्तु हर चुनावों के बाद मंहगाई में कभी भी कोई कमीवेशी नहीं देखी गई है । बढ़ती मंहगाई का असर मध्यम  वर्ग और गरीब घरों के परिवारों में देखा जा सकता है । कभी देश में मंहगाई को लेकर विपक्षी पार्टियाँ और कर्मचारी संघटन आंदोलन करते थे पर अभी मंहगाई को लेकर किसी को भी कोई चिंता नहीं है और न ही कोई इसे घटाने की चर्चा कर रहा  है ।

बिचौलियों और कमीशनखोर व्यापारियों के द्वारा सीधे किसानों से खेतों से अनाज सब्जी आदि की खरीद रहे हैं और मनमर्जी से भाड़ा आदि जोड़कर सामग्रियों के अधिक दाम निर्धारित कर बाजार में मंहगे भावों पर बेच रहे हैं ... बिचौलिये किसानों से यदि टमाटर बीस रुपये किलो टमाटर की खरीद करते हैं तो वह बिचौलियों और कमीशनखोर व्यापारियों और फुटकर व्यापारियों के हाथों होकर बाजार में दूने भाव चालीस रुपये प्रति किलो में बेचा जाता है ऐसे बिचौलियों और कमीशनखोर व्यापारियों पर प्रशासन और सरकार कोई भी कार्यवाही नहीं कर रही है जिससे मुनाफाखोरी और मंहगाई दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है और आम जनता का जीवन यापन करना दूभर हो रहा है ।

देश का विकास बुलेट ट्रेन चलाने प्लेन चलाने  सड़क और पुल बनाने से नहीं होता और जनता पर नित नए टैक्स लगाकर नहीं होता जब तक आम आदमी को दैनिक उपयोग में आने वाली खानपान की सामग्री उसे सस्ते मूल्य पर आसानी से उपलब्ध न हो . ऐसा विकास किस काम का कि देश की जनता को अपनी दैनिक खानपान की जरूरतें पूरी करने के लिए अपने जेबें ढ़ीली करना पड़े और उसे जीवन यापन करने के लिए अर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़े । क्या कारण हैं कि बढ़ रही मंहगाई को लेकर सत्तारुढ़ पार्टियां और विपक्षी पार्टियां चुप क्यों रहती हैं कहीं ऐसा तो नहीं है कि चुनाव के समय सभी पार्टियां व्यापारियों से भारी भरकम रकम व्यापारियों से ले लेते हैं और उन्हें मनमर्जी से मंहगाई बढ़ाने की मूक सहमति प्रदान कर दी जाती है और मुनाफाखोरों और कालाबाजारी करने वाले व्यापारियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं करते है । जरूरत है कि बिचौलियों और कमीशनखोर मुनाफाखोर व्यापारियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाये जिससे बढ़ती मंहगाई को नियंत्रित  किया जा सके और जनता को बढ़ती मंहगाई से राहत मिल सकें |

केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को बढ़ती मंहगाई को घटाने हेतु  प्रयास करने चाहिए और कालाबाजारी मुनाफाखोरी पर रोक लगाने हेतु कठोर कार्यवाही करना चाहिए ओर दूसरे देशों में घटित हो रहे अर्थिक घटना क्रमों का हवाला न देते हुये अपने देश में मंहगाई क्यों बढ़ रही है मंहगाई को रोकने हेतु  सार्थक गम्भीर प्रयास करना चाहिए ओर मंहगाई को रोकने हेतु दूसरे कारणों को दोष् नहीं देना चाहिए ओर मंहगाई घटाने जैसे जनहित के मुद्दे पर मुंह नहीं चुराना चाहिए अन्यथा सरकार को भविष्य में मंहगाई को लेकर जनारोष का सामना करना पड़ेगा ।   

3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (25-06-2016) को "इलज़ाम के पत्थर" (चर्चा अंक-2384) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " खालूबार के परमवीर को समर्पित ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Digamber Naswa ने कहा…

बात तो सही है ... और इस तरफ सरकार को ज्यादा ध्यान देना होगा ...