26.4.16

जबलपुर में चंद दुग्ध माफियाओं की मनमर्जी और नन्हें मुन्ने बच्चों के मुंहे से दूध का निवाला छीनने की कोशिशें ...

जबलपुर में गरमी शुरू होते ही दुग्ध माफियाओं का जोर बढ़ जाता है और वे हमेशा की तरह प्रशासन और जनता पर अपना दबाब बनाना शुरू कर देते हैं और मनमाने ढंग से दूध के रेट बढ़ा देते हैं  ... करीब पांच साल से दूध के रेट अन्य शहरों की अपेक्षा जबलपुर में सर्वाधिक हैं ...

करीब पांच साल से प्रति वर्ष गर्मियों के दिनों में शहर के चंद दूध माफिया दूध के रेट बढ़ा देते हैं और कुछ दिन प्रशासन और दूध माफियाओं के बीच दामों को लेकर चर्चा होती है और सत्ता पक्ष के नेतालोग दिखावे के लिये शासन को ज्ञापन देते हैं और विपक्षी पार्टियां जनता को कम रेट पर दूध देने का नाटक करती हैं और शहर में कम  दाम पर पचास रुपये लीटर का बोर्ड लगाकर दूध बेचने हेतु स्टॉल खोल कर बैठ जाती हैं  ...

कुछ दिनों तक प्रशासन भी दूध का फेट चैक करने के नाम पर सख्ती बरतता है और कुछ दिनों बाद नेता और विपक्षी पार्टियां और प्रशासन खामोश बैठ जाता है और दूध के रेट मनमाने ढंग से बढ़ जाते हैं . इस वर्ष भी दूध के दाम बढाने की कोशिशें की जा रही हैं और जबलपुर में साठ  से सत्तर रुपये प्रति लीटर बेचने की तैयारी चंद दूध माफिया कर रहे हैं और विपक्षी पार्टियों के द्वारा सस्ते दामों पर दूध बेचने  के लिए दूध के स्टाल लगा लिए गए हैं ...

चंद दूध माफियों की मनमर्जी शहर की तीस लाख जनता को हर साल परेशानी में डाल देती है . आम जनता में यह चर्चा है कि नेताओं के दिखावे के बाद हर हाल में इस साल भी दूध के दामों में भारी बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है . दूध नन्हें मुन्नों के लालन पोषण के लिए मुख्य आहार है और दूध के दाम बढ़ाकर बच्चों के मुंह से दूध का निवाला छीनने की फिर से कोशिशें की जा रही है और गरीबों को दूध से वंचित करने की कोशिशें की जा रही है ..

प्रशासन को मुनाफाखोर दूध माफियों पर अब सख्ती से काम लेना चाहिये और अगर दूध माफिया शहर की तीस लाख जनता के हितों को ध्यान में नहीं रखते हैं तो प्रशासन को आवश्यक कार्यवाही करते हुए कठोर से कठोर कार्यवाही करना चाहिए और ऐसे समाज विरोधी मुनाफाखोर तत्वों को जनहित में जेल तक भेजने की व्यवस्था करना चाहिए ...

3 टिप्‍पणियां:

GathaEditor Onlinegatha ने कहा…

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रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (27-04-2016) को "हम किसी से कम नहीं" (चर्चा अंक-2325) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

महेंद्र मिश्र ने कहा…

... अभी दूध माफियों द्वारा दूध के दाम 55 से 60 प्रति लीटर करने की कोशिश की जा रही है वही दूसरी कांग्रेस के द्वारा शहर में 50 रुपये प्रति लीटर के दाम पर अपने स्टाल के माध्यम से जनता को दूध बेचा गया और वही शासन पक्ष के उत्साही नौजवानों के द्वारा शहर में स्टाल लगाकर 45 रुपये प्रति लीटर दूध बेचा गया और आज एक अखबार में समाचार पढ़ा कि अब दूध के दाम 50 प्रति लीटर निर्धारित किये जायेगें ... मेरी समझ में नहीं आ रहा कि शासन पक्ष के उत्साही नौजवानों के द्वारा स्टाल लगाकर सस्ता दूध 45 रुपये प्रति लीटर बेचा गया तो अब दूध के दाम अधिक मूल्य पर 50 प्रति लीटर निर्धारित की बात क्यों की जा रही है और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि दूध माफियों की शह पर ही दूध के दाम 50 रुपये प्रति लीटर किये जाने की फिर से तैयारी की जा रही है ... क्या पांच सालों से प्रतिवर्ष खली चुनी भूसा के भाव बढ़ रहे हैं जो प्रतिवर्ष दूध के दाम बढ़ा रहे हैं ... तीन साल पहले दूध के दाम 28 रुपये प्रति लीटर थे जो दूध माफियों की शह पर बढ़ाते बढ़ाते 50 और 55 रुपये प्रति लीटर की बात की जाने लगी है ... दूध के दाम 35 से 40 रुपये प्रति लीटर किया जाना चाहिए ...