14.4.16

संस्मरण ... ओह तेरी क्रिकेट की ...

बचपन में नया नया क्रिकेट का खेल चला था और उस समय ट्रांजिस्टर रेडियो का जमाना था ...कमेंट्री सुनने में बड़ा आनंद आता था बीच में बीच में रेडियो घुरुर घुरुर करने लगता था और आवाज धीमी हो जाती थी तो रेडिओ को कान में लगाकर स्कोर जानने की कोशिश करते थे ... यदि कोई कान से सटाकर कमेंट्री सुनता था और बाजू में खड़े घर के किसी सदस्य को सुनाई नहीं देता तो कभी रेडिओ के लिए छीनाझपटी तक हो जाती थी ... बचपन में खूब क्रिकेट खेली और बिना दस्ताने और बिना पेड के भी खेल लेते थे . गोपलबाग़ के मैदान में उस समय क्रिकेट का खेल और आवारा घूम रहे घोड़े पर सवारी का आनंद मेरे मित्र खूब उठाते थे .. एक बार पांडेजी जी फील्डिंग कर रहे थे और बाल लेदर की थी ... अचानक हवा में आती बाल को कैच करने की कोशिश में पाण्डे जी ने हवा में अपने हाथ ऊपर किये और कैच करते समय उनका मुंह भी खुला था और कैच के समय उनके हाथों के पंजे दूर रह गए और बाल सीधे पांडेजी के मुंह में लगी और पांडेजी के दांत स्टम्प की तरह उखड गए ओह खूब खून गिरा हा हा याद आता है सब ... मुझे बॉलिंग और फील्डिंग का खूब शौक था और अभी भी है ... स्पिन के साथ सुर्रा याने यार्कर फेंकने का खूब शौक था बाकायदे मेरी बाल हवा में खूब घूमती थी ... मुझे अक्षर कप में बॉलिंग का मौका दिया गया और मेरा उत्साह इतना था कि मैंने कोट पहनकर बॉलिंग कर डाली ...


फोटो में बाल हवा में तैरती नजर आ रही है ... अब तो उतने मैदान नहीं हैं और इतनी उम्र भी नहीं की अधिक खेल सकूं  पर अब अपना शौक टीव्ही में देख कर पूरा कर लेता हूँ  ... 

3 टिप्‍पणियां:

Digamber Naswa ने कहा…

बढती उम्र में बस देखने का ही सहारा है ... काम चल रहा है तो अच्छी बात है ...
दुर्गा अष्टमी की बधाई ...

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (16-04-2016) को अति राजनीति वर्जयेत् (चर्चा अंक-2314) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

महेंद्र मिश्र ने कहा…

आभार समयचक्र की पोस्ट को स्थान देने के लिए ...