19.4.15

छटेपन की दाढ़ का दर्द ...

अचानक बत्तीसी की एक दाढ़ में झन्नाटेदार तेज दर्द उठा और आधी रात में नींद खुल गई और उठकर थोड़ा पानी के कुल्ले किये कि कुछ राहत मिल जाएगी पर दर्द तो आखिर दर्द ही होता है रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था  .. अचानक सुबह दाढ़ के दर्द का समाचार मेरे शुभ- चिंन्तकों तक पहुँच गया और मित्रों ने सलाह दी कि दांत के डाक्टर से दवा ले लो ..

आखिर दर्द सहा न जा रहा था तो पहुँच गए डाक्टर के पास . डाक्टर ने सलाह दी - देखिये अंकल जैसे जैसे उमर बढ़ती जाती है मसूड़े दांतों का साथ छोड़ देते हैं  ... और बत्तीसी फ़ैल जाती है और दांत गिरने लगते हैं  ... हाँ अगर आपको अधिक दर्द हो रहा हो तो वो दाढ़ अभी निकाल देता हूँ  ...

दाढ़ निकालने के नाम पर मेरी हालत पतली हो गई और मेरे शरीर के रौंगटे खड़े हो गए और वहां से भाग निकलने में अपनी भलाई समझी  ...  मैंने तुरंत पैंतरा बदल कर डाक्टर से कहा - बेटा आज मेरा उपवास है और दांत निकालने में खून बून निकलेगा तो व्रत खंडित हो जाएगा  ...   बेटा आज दाढ़ मत निकाल कल निकलवा लूंगा और तत्काल वहां से सरक लिया और घर वापिस आ गया  ..

दर्द को सहते सहते अचानक नींद आ गई तो एक सपना देखने लगा  .. सपने में दाढ मुझे चिड़ा  रही थी और कह रही थी तूने बचपन से लेकर अभी तक मेरे ऊपर खूब अत्याचार किये हैं  .. खूब गचर-पिचर खाते रहे और मेरी जड़ों को भी हिला कर रख दिया कि मैं अब गिरने की कगार पर हूँ  ... इससे मैं बहुत दुखी हूँ इसका बदला मैं तुम्हें दर्द देकर ले रही हूँ और इस उमर में तुम्हारी बत्तीसी हिलाकर रख दूंगी समझे . देखती हूँ कोई मेरा क्या उखाड़ लेगा मैं अब तुम्हारी बत्तीसी उखड़वा कर रहूंगी और तुम पोपले हो जाओगे  ...

यह सुनते ही मेरी नींद खुल गई और दांये गाल पर रुमाल रख कर अपना दर्द कम करने की कोशिश कर रहा हूँ मगर दांढ़ का दर्द कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है और सोच रहा हूँ कि छटेपन की दाढ़ का दर्द ऐसा ही होता होगा जो बत्तीसी उखड़वा कर ही जाता होगा  ....   

कोई टिप्पणी नहीं: