18.7.14

माँ गंगा की सुध ली पर माँ नर्मदा पर ध्यान नहीं ...

माँ नर्मदा जी अपने उद्गम स्थान अमरकंटक से निकल कर सघन जंगलों और पहाड़ों से निकलती हुई गुजरात में खंबात की खाड़ी तक का करीब 1300 किलोमीटर तक का अपना सफर पूरा करती हैं और माँ नर्मदा को मध्यप्रदेश और गुजरात की जीवन रेखा माना जाता है । गंगा और यमुना जैसी विशाल नदियां ध्यान न दिये जाने के कारण दिनोंदिन प्रदूषित होती गई और इनको प्रदूषण रहित करने और इनका काया कल्प करने हेतु हेतु कभी भी कोई सार्थक प्रयास नहीं किये गये  जिसके कारण  इन नदियों की स्थिति इतनी खराब हो गई हैं इनका जल उपयोग करने लायक नहीं रहा है और इन नदियों के जल का उपयोग करने से लोगों को तरह तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।

केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार यमुना नदी के 100 मिली लीटर पानी में 4 अरब बैक्टीरिया और गंगा के 100 मि.ली. पानी में  3 लाख बैक्टीरिया और माँ नर्मदा के  100  मि.ली. पानी में मात्र 17 बैक्टीरिया पाये जाते हैं और इस तरह से देखा जाए तो गंगा और यमुना की तुलना में माँ नर्मदा सबसे कम  प्रदूषण है और इसका जल उपयोग करने के योग्य माना गया है। अपने उदगम स्थान से ही माँ नर्मदा को प्रदूषित करने में कोई कसर  नहीं छोड़ी जा रही है। मंडला और डिंडोरी के करीब 28 नालों का पानी और जबलपुर और होशंगाबाद के करीब दस बड़े नालों का गन्दा  पानी सीधे- सीधे नर्मदा में जा रहा है और इन नालों का प्रवाह माँ नर्मदा में रोकने हेतु अभी तक कोई सार्थक पहल नहीं की गई है और इस समय मध्यप्रदेश के 25 शहरों के नालों का गंदा पानी नर्मदा में जा रहा है ,इन नालों के ऊपर कोई वाटर ट्रीटमेन्ट प्लान्ट भी नहीं बनाये गए हैं कि स्वच्छ पानी नर्मदा नदी में जाये। कुछ बनाये भी गए हैं तो उनमें से कुछ बिजली के कारण या अन्य तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े हैं ।

माँ नर्मदा भक्त नेतागण इस और ध्यान नहीं दे रहे हैं और अपनी आँखे बंद किये हुए हैं । इस समय नर्मदा को सबसे ज्यादा क्षति रेत चोरों द्धारा पहुंचाई जा रही है जिसे रोकने में शासन और प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। माँ नर्मदा में इसकी सहायक नदियों की गंदगी भी सीधे-सीधे जा रही है जिसके कारण माँ नर्मदा दिनोंदिन प्रदूषित होती जा रही है और इसी तरह यह सिलसिला चलता रहा तो एक दिन माँ नर्मदा का पानी उपयोग करने के योग्य न रह जायेगा ।

देश की प्रदूषित नदियों को साफ सुधरा रखने और उन्हें प्रदूूूषण मुक्त रखने हेतु  केंद्र की नई  सरकार से और मध्यप्रदेश की नर्मदा भक्त उमा भारती जी  (बर्तमान में केंद्रीय मंत्री है) से बड़ी आशा थी कि अन्य नदियों के साथ माँ नर्मदा के भी अच्छे दिन आयेंगें और नर्मदा को प्रदूषण मुक्त कराने हेतु अभियान में गति आयेगी  .. अभी हाल में केंद्र सरकार द्धारा नर्मदा सहित देश की 43 नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने हेतु बजट में करीब 10750 रुपयों की राशी आवंटित की गई है जिसमें नर्मदा के लिए मात्र 200 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है जोकि बहुत ही कम है।

केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड द्धारा यह चेतावनी दी गई है कि अभी अन्य नदियों की तुलना में नर्मदा कम  प्रदूषित हैं और यदि लगातार शहरों के गंदे नालों का सीवर का पानी नर्मदा नदी में मिलता रहा तो गंगा और यमुना नदी की तरह नर्मदा का पानी भी प्रदूषित होते देर न लगेगी  ... रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मंडला और डिंडोरी का नर्मदा जल सी श्रेणी का हो गया है जो पीने के योग्य नहीं माना जाता है। समय रहते अब जरुरी हो गया है कि  शहरों के गंदे नालों का पानी रोकने हेतु जल्द जल्द से जल्द वाटर ट्रीटमेन्ट प्लान्ट बनाये जाये और लोगों को जागरूक किया जाए कि  वे  नर्मदा तट पर वाहनों की धुलाई न करें और गंदे कपड़ों को धोने के लिए साबुन आदि का प्रयोग न करें और अधजले शव नर्मदा में न बहायें ।

केंद्र शासन और राज्य शासन को नर्मदा को प्रदूषण मुक्त रखने हेतु शीघ्र ध्यान देना चाहिए और नर्मदा को साफ़ सुधरा रखने के लिए बजट में अधिकाधिक राशि का प्रावधान करना चाहिए। नर्मदा गुजरात और मध्यप्रदेश की जीवन रेखा कहलाती है और दोनों ही राज्यों में एक ही सरकार है , दोनों ही नर्मदा जल का अधिकाधिक उपयोग कर रहे हैं  ...चाहे तो मिलकर दोनों राज्य इस नदी को प्रदूषण मुक्त साफ सुधरा रखने हेतु संयुक अभियान चला सकते हैं ।

नर्मदे हर  ...  

3 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

अभी माँ गँगा से पेट भर लेने दीजिये ना नेता जी को इधर काम हो जाये फिर उधर को भेज देंगे चिंता ना करें ।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (19-07-2014) को "संस्कृत का विरोध संस्कृत के देश में" (चर्चा मंच-1679) पर भी होगी।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Onkar ने कहा…

सुंदर लेख