4.6.14

पर्यावरण दिवस : माँ गंगा और हम .....

मेरा जन्म नर्मदा तट के किनारे बसे शहर जबलपुर में मेरा जन्म हुआ है और न जाने क्यों मुझे बचपन से नदियों से कुछ ज्यादा लगाव रहा है  .. जब भी कहीं जाता हूँ और मेरी यह कोशिश रहती है कि आसपास कोई नदी हो तो उसे देखने जरूर जाऊँ ..माँ नर्मदा तो मेरे शहर में ही हैं चाहे जब जाता रहता हूँ   ..

विगत माह मथुरा में यमुना नदी के तट पर गया और यमुना जी को काफी करीब से जानने की कोशिश की और वहां के  दो तीन घाट  देखें    ..यमुना की हालत तो सभी को मालूम हैं यह इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि इसका पानी भी उपयोगी नहीं रह गया है  ..यमुना के पानी में ऑक्सीजन की कमी बताई जा रही है और इसके पानी को मृत घोषित कर दिया गया है  ..

पिछले सप्ताह हरिद्धार और ऋषिकेश गया था और वहां पर केदारनाथ की दुर्घटना होने के पश्चात गंगा नदी की हालत आत्यधिक खराब हो गई है  .. ऋषिकेश में कुछ जगह बीच बीच में और किनारे की ओर रेत और चटटानों के टीलें इकट्ठा हो गए हैं जिनकी वजह से  कई जगह गंगा की धारा बदल गई है और कई जगह गंगा एक ही किनारे से होकर ही बह रही हैं  ..नदी के बीच में जहाँ भरपूर पानी रहता था वहां सूखा पड़ा है   ..


फोटो- ऋषिकेश

फोटो- ऋषिकेश

इसी तरह से जब मैं हरिद्धार में सप्त ऋषि गंगा घाट गया तो वहां की स्थिति और भी गंभीर हो गई है जहाँ पर पूरी गंगा नदी सूखी दिखाई दे रही है और नदी की जलधारा पतली होकर एक किनारे से बह रही है और उस घाट में लोगबाग बड़े मजे से बीच नदी में नहा रहे हैं और मजे से एक किनारे से पैदल दूसरे किनारे की ओर आ जा रहे हैं   ..



फोटो-  अभी एक सप्ताह पहले सप्त ऋषि गंगा घाट, हरिद्धार  में फोटो ली गई हैं और अब गंगा में सिवाय रेत  और चटटानों की मात्रा  बढ़ गई है और धारा सकरी होकर एक किनारे की और होकर बहने लगी  है ... फोटो देख कर अंदाजा हो जाता है कि  गंगा परिवर्तन के दौर से गुजर रही है 


फोटो (गूगल से) - जब सप्त ऋषि गंगा घाट, हरिद्धार  में तीन चार साल पहले पानी ही पानी दिखाई देता था ...

आज से पांच वर्ष पहले और तीन वर्ष पहले जब मैं इसी घाट पर घूमने गया था तब उस समय इस घाट पर भरपूर पानी रहता था और घाट  तक गंगा जी की तेज लहरें हिलोरे मारा करती थी और लोगों को चैन पकड़ कर नहाना पड़ता था  ..दोनों किनारों तक गंगाजी का पानी ही पानी दिखता था  .. बदलते समय के साथ माँ गंगा जी की हालत को देख कर मुझे बड़ा दुःख हो रहा है जैसे अभी तक कोई साफ़ सफाई नहीं कराई गई है हर जगह रेत  और चट्टानें अधिक दिखाई दे रही है  जिसके कारण कई जगह धा रा रुक गई है सकरी हो गई है  .. केदारनाथ दुर्घटना के बाद ऊपर पहाड़ों से अधिक रेत और चट्टानें गंगाजी में बहकर आई हैं जिसके कारण नदी की स्थिति में परिवर्तन हुआ है तो दूसरी ओर गंगा नदी में कई शहरों के बड़े बड़े प्रदूषित नाले मिल रहे हैं जिसके कारण गंगाजी का पानी लगातार प्रदूषित होता जा रहा है ... बुजुर्गों का कहना है कि लगातार यही स्थिति रही तो गंगा जी की हालत यमुना से भी बुरी हो जायेगी इसमें कोई संदेह नहीं है  ...

देश में गंगा नदी के किनारे बसे  शहरों में लगभग सात करोड़ से अधिक लोग  रहते हैं और इन सबका जीवन किसी न किसी रूप में गंगा से जुड़ा है अगर गंगा लगातार प्रदूषित होती रही तो एक न एक दिन सभी का जीवन खतरे में पड़  जायेगा और आसपास के लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा  ... बड़े बड़े शहरों के नालों और कल कारखानों का  दूषित पानी लगातार सीधे  नदी में पहुँच रहा है जिसके कारण गंगा प्रदूषित और जहरीली होती जा रही है ...

देश में आजादी के बाद से नदियों के रख रखाव और इनकी साफ़ सफाई को लेकर बड़ी बड़ी बातें की जाती हैं और हजारों करोड़ों रुपये खर्च  कर दिए गए हैं मगर अभी तक तो देखने में यह समझ में आता है कि कोई भी कारगर सार्थक योजना बनाई नहीं गई है और अगर देश में इस हेतु योजना बनाई भी गई हैं तो उस पर समुचित अमल नहीं किया गया है नहीं तो गंगा आज इस स्थिति को प्राप्त न होती और गंगा परिवर्तन के दौर से गुजर रही है . मात्र कागजी दस्तावेजों में ही इनकी साफ सफाई होती रही है और हजारों हजार करोड़ भ्रष्टाचारियों की जेबें गरम करते रहे  ..

मात्र देश के प्रमुख घाटों को सुन्दर और साफ़ सुधरा बना  देने से करोड़ों रुपये खर्च कर देने से गंगा की साफ़ सफाई नहीं हो जाती है ... यदि जीवन रेखा गंगा को साफ़ और प्रदूषणमुक्त रखना है तो इसके उदगम स्थल से लेकर आखिर तक सफाई कराना जरुरी है ... यदि माँ  गंगा के प्रति समय रहते उचित न्याय नहीं किया गया तो इसके गंभीर परिणाम मानव समाज को भोगने पड़ेगें ... आगे यह देखने वाली बात होगी कि बातें तो बड़ी की जा रही हैं पर इसके कब गंगा के अच्छे दिन आयेंगें  ... 

5 टिप्‍पणियां:

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

सटीक विवेचन।
आज आपकी पोस्ट का कुछ अंश 'डेली न्यूज़ ,जयपुर'में।
बधाई।

mahendra mishra ने कहा…

@संतोष त्रिवेदी जी ... शुक्रिया आभार सर जानकारी देने के लिए

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

गंगा जैसे जैसे नीचे उतरती जाती है, हम उसकी अस्‍मत से खेलने लगते हैं :( दुखद लगता है.

आशा जोगळेकर ने कहा…

नदियों की हालत खराब है भारत देश में। इसके लिये लोगों को भी काम करना होगा। बारिश से पहले रेत को उलीच कर,हटा कर नदी के पात्र को गहरा करना होगा. वरना फिर से बाढ।

आशा जोगळेकर ने कहा…

सही और सामयिक प्रस्तुति।