1.6.14

मुझे माँ गंगा ने बुलाया था ....

अचानक घर के सदस्यों में सहमति बन गई कि इस बार हरिद्धार और ऋषिकेश घूमने चलना है और आनन फानन में रेलवे से रिजर्वेशन भी करवा लिया गया और हम दिनांक 25 -05 -14 को जबलपुर से संपर्कक्रांति से देहली रवाना हो गये . दूसरे दिन सुबह हम देहली पहुँच गए और फ्रेस होने के बाद सभी बस अड्डा पहुंचे और वहां से हरिद्धार  जाने के लिए ए सी बस की टिकट ली और बस में बैठ गये . करीब दो घंटे तक बस के अंदर बैठे रहे कि अब बस रवाना होगी  ..   पूछने पर बस वाले ने बताया कि बस अभी दस मिनिट में रवाना होने वाली है पर नहीं हुई ..

बाद  में यही समझ में आया कि ए सी बस बस वाले एक दो खाली सीट को भरने के लिए बस को घंटों रोके रहते हैं और समय पर बस को रवाना नहीं करते हैं और यात्रियों का समय खराब कर यात्रियों को खूब उल्लू बनाते हैं  ... बस भी कछुए की रफ़्तार से चल रही थी खैर जैसे तैसे हम शाम 7 बजे हरिद्धार पहुँच गए और हारे थके होने के कारण  एक होटल में हमने शरण ली ...

दूसरे दिन ऋषिकेश गए और राम झूला पार कर दूसरी और गये और पैदल मार्ग से लक्ष्मण झूला की ओर गये और बीच बीच में थोड़ी फोटोग्राफ़ी भी करते गये ... तीन साल पहले मैं ऋषिकेश गया था तब गंगा में अथाह जलराशि दिखाई देती थी मगर इस बार नदी में कई जगह काफी रेत  और चट्टानें दिखाई दे रही थी और इनके ऊँचे ऊँचे टीले निर्मित हो गये हैं जिसके कारण कई जगह नदी की आधी चौड़ाई में धारा सकरी होकर बह रही थी ...

राम झूला के पास होटल चोटीवाला में खाना खाया और हरिद्धार निकल पड़े

और शाम को हर की पौरी  में माँ गंगा जी की आरती में शामिल हुए और आरती का एक वीडियो तैयार किया जिसका यू टुयूब आपके अवलोकन के लिए प्रस्तुत है ...

foto- सप्त ऋषि गंगा


दूसरे दिन सप्त ऋषि गंगा गए और भी नदी के जलस्तर से भी अधिक ऊंचाई में आत्यधिक रेत और चट्टानों के ढेर लगे देखें जिसके कारण नदी की धारा पतली होकर एक और बह रही थी जिसे देख कर मुझे अधिक दुख रहा था कभी यहाँ सात दिशाओं से गँगा एकत्रित होकर बहती थी और माँ गंगा में सात धाराएं अलग अलग बहती दिखाई देती थी और पूरे घाट में एक और से दूसरे और अथाह जलराशि दिखाई देती थी और अब तो नदी की आधी चौड़ाई में रेत और चट्टानें दिखाई दे रही हैं और हम फिर भारत माता के मंदिर गये और तदोपरांत कनखल की और रवाना हो गए दूसरे दिन सप्त ऋषि गंगा गए .

नदी के जलस्तर से भी अधिक ऊंचाई में आत्यधिक रेत और चट्टानों के ढेर लगे देखें जिसके कारण नदी की धारा पतली होकर एक और बह रही थी जिसे देख कर मुझे अधिक दुख रहा था कभी यहाँ सात दिशाओं से गँगा एकत्रित होकर बहती थी और माँ गंगा में सात धाराएं अलग अलग बहती दिखाई देती थी और पूरे घाट में  अथाह जलराशि दिखाई देती थी और अब तो नदी की आधी चौड़ाई में रेट और चट्टानें दिखाई दे रही हैं .

 हम फिर भारत माता के मंदिर गये और तदोपरांत कनखल की और रवाना हो गए   ...'

कनखल में हरिहर मंदिर और दक्ष प्रजापति का मंदिर देखा जहाँ भगवान शिवजी ने क्रोधित होकर राजा दक्ष का सर काट दिया था .

शाम को परिवार के सदस्य माँ मनसा देवी के दर्शन करने गए ... तीसरे दिन देहली से जबलपुर के लिए रिजर्वेशन था तो दोपहर तीन वजे हरिद्धार से देहली पहुँच गये  .. बस टर्मिनल से एक ऑटो निजामुद्दीन स्टेशन के लिए किया और निकल पड़े .. निजामुद्दीन स्टेशन के पहले एक ओवर ब्रिज पड़ता है वहां बीच में ऊपर पहुंचकर उतार में ऑटो के ब्रेक फेल हो गए और ऑटो तेजी से नीचे की और लुढ़कने लगा .. हम सब समझ गए थे और ऑटो चालक और हम सबने ईश्वर से प्रार्थना की .. धीरे धीरे ऑटो की रफ़्तार नीचे पहुंचते पहुंचते धीमी पड़ गई ..

ईश्वर की कृपा से ऑटो के आजू बाजू से और नीचे क्रासिंग पर उस समय कोई तेज रफ़्तार वाहन नहीं आ रहा था अन्यथा कोई दुर्घटना घटित हो सकती थी  .. हम सबने और ऑटो चालक ने ईश्वर को बहुत बहुत धन्यवाद दिया और समझ में आया कि कोई अदृश्य शक्ति हम सबकी रक्षा कर रही थी  ..

दूसरे दिन सुबह जबलपुर पहुँच गये .. पर इस बार मैनें माँ गंगा नदी की जो हालत देखी है उससे बहुत दुःख हो रहा है .. केदारनाथ घटना के बाद नदी चट्टानों और रेत से पुर गई है और नदी की धारा में परिवर्तन आया है  दिशा भी बदल रही है .. नदी में बदलाव आ रहे हैं और निरंतर प्रदूषित होती जा रही है ..

हरिद्धार की  हरकी पौरी  का घाट हो या ऋषिकेश के घाट होँ या बनारस के घाट होँ मात्र हजारों करोड़ों रुपये खर्च कर साफ़ सुधरा रखने से कुछ नहीं होता है बस जरुरत है कि गंगा नदी उदगम स्थान से लेकर  से लेकर आखिर तक इसकी साफ़ सफाई की जाये तब ही प्रदूषण रहित रखने का सपना पूरा होगा .. नदियां हमारी जीवन रेखा कही जाती हैं इनसे हमारा सबका जीवन जुड़ा है .. अगर इनकी ओर  समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो धीरे धीरे इनका अस्तित्व समाप्त हो जायेगा और मानव जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा  ..

हर हर गंगे माँ

foto- ऋषिकेश
foto-ऋषिकेश
foto -सप्त ऋषि गंगा

(कुछ फोटो आपके अवलोकन के लिए   ...)


8 टिप्‍पणियां:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन डू नॉट डिस्टर्ब - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

mahendra mishra ने कहा…

धन्यवाद समयचक्र ब्लॉग की मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए .... .

Digamber Naswa ने कहा…

मनोरम चित्रों के साथ यात्रा का आनद ले रहे हैं हम भी ... अब मोदी जी आये हैं तो देखें गंगा अभियान में क्या होता है ... जय माँ गंगे ...

mahendra mishra ने कहा…

धन्यवाद आभार ....

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

उस रुट की प्राईवेट बस वाले बहुत हरामखोर हैं महाराज, पिछ्ले साल हमने दिल्ली से देहरादून की टिकिट ली थी और उन्होने ॠषिकेश में ही सफ़र खत्म कर दिया। एक बार धोखा खाने के बाद अकल आ गई।

mahendra mishra ने कहा…

धन्यवाद आभार ललित भैय्या ...

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

सुन्दर यात्रा चित्र

mahendra mishra ने कहा…

शुक्रिया आभार