27.4.14

आया आया रे चुनाव ...

जिस दिन चुनावों की  अधिसूचना जारी की जाती है उस दिन लोगों को ये लगने लगता है कि बड़ा  उत्सव आ गया है .. सब लोग नेता नागरिक व्यापारी सडक़ छाप लोग भी उत्साहित हो जाते हैं । व्यापारी सोचता है कि अपनी सामगी को अधिकाधिक रेंट  मेँ  वह बेचेगा खुब मुनाफ़ा होगा। कोई भी पार्टी हो कोई भी नेता हो या सरकार हो  कोइ उसका कुछ नही  उखाड़ पायेगा क्योकि चुनाव  के समय वह सबको खूब चंदा देकर सबकी जुबान पर ताला लगा देता है । वह जानता है कि चुनावों के समय एक बार दाम बढ़ जाते हैं तो फिर दाम कम नहीं होते है .

 गरीब सोचते हैं कि अगली सरकार आयेंगी तो वह गरीबों के हित के लिये कुछ नया करेगी पर ऐसा होतां नहीं हैँ बेचारा हमेशा वेबसी के आंसू बहाता रहता है  .  नेता लोग झूठे वादे करते हैं ओर जनता को बहलाते फुसलाते हैँ  ... विकास करेंगें ये करेंगें वो करेंगें मेट्रो सिटी बना देंगें  .... अरे भैया शहर की नाली तो साफ़ करा नहीं सकते ओर विकास का झुन झुना जनता को थमा देते हैं  ।

कुछ बेरोजगारों को काम भी मिल जाता है किसी को पोस्टर बैनर लगाने का काम तो कुछ घर घर प्रचार करने के लिए लगा दिया जाता है। कुछ बेरोजगार तन मन से नेताजी  का  काम करते हैं कि नेताजी यदि जीत गए तो उनकी नौकरी पक्की समझो ।  कुछ व्यापारियों को रंग बिरंगी टोपियाँ,  रंग बिरगें कुरते बाने का खूब काम मिल जाता  है।  यदि नेताजी किसी कालोनी में प्रचार करने जाते हैं तो उनके चेले चपाती पहले से अपने घर से लेकर सड़क तक चूने की लाइन डलवा देते हैं  . नेताजी ढोल धमाके की आवाज के साथ चूने की लाइन के सहारे दौड़ लगा कर निकल जाते हैं जैसे कोई बाबा अपनी सवारी लेकर दौड़ लगाकर निकल जाता है जैसे उनके क्षेत्र में कोई और मतदाता रहता नहीं है ।

आज कल चुनावों में मतदान का प्रतिशत बढाने के लिये कई शहरों में चाय में, इलाज की फीस, सिनेमा घरों में , मिठाई की दुकान मेँ  दस से बीस  प्रतिशत तक की छूट दी गई है फ़िर भी मतदान का प्रतिशत नहीं बढ़ सका ।

नेताजी भाषण दे रहे हैं की आपके शहर का विकास करूँगा और महानगर जैसे बड़े महा गाँव को महा नगर बना दूंगा और उपराज्यधानी बनवा दूंगा लोग बाग़ उनके मायाजाल में फंस जाते हैं और उल्लू बन जाते हैं.  साठ - सालों से हमारे देश में  यही तो होता आ रहा है।  सारे नेताओं के र टे  रटाये जुमले होते हैं।

हाँ एक चीज और कहना चाहता हूँ कि आज कल वंशवाद का दौर चल रहा है और नेता लोग अपने लडके बच्चों और बहू को पार्टी टिकट दिलाना चाहता है यदि टिकट मिल गई तो ठीक नहीं जिस पार्टी की हवा चल रही है उस पार्टी में घुस जाते हैं।  भैय्या लोग दल बदलने वाले नेता लोगों से सावधान  रहें न आज न हीं तो कल उनका उल्लू सीधा नहीं होगा  और उस दिन "भाजपा कांग्रेस" नाम की नई पार्टी बना लेंगें और आपकी  बड़ी पार्टी होने का सपना खंड खंड हो जायेगा और नेता कभी किसी के विश्वास पात्र नहीं होते   हैं ।

---mk...

8 टिप्‍पणियां:

mahendra mishra ने कहा…

आज मेरे ब्लॉग समयचक्र की 501 वीं पोस्ट है जिसके लिए सभी ब्लागरों और पाठक जनों का ह्रदय से आभारी हूँ जिनके सहयोग से मैं यह पोस्ट लिख सका ...

कविता रावत ने कहा…

मौसमी बुखार की तरह ५ साल में आ धमकता है यह चुनाव .. बहुत बढ़िया सामयिक प्रस्तुति
501 वीं पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई !

Digamber Naswa ने कहा…

दल तो एक ही रहता है सत्तारुड दल ... चाहे कांगेस हो चाहे भाजपा ...
सटीक प्रस्तुति ...

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

क्या बात क्या पार्टी बनाई है भाजपाकाँग्रेस :)

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

सटीक समसामयिक रेखांकन..... 501 वीं पोस्ट के लिए बधाई

Manu Tyagi ने कहा…

सटीक लेखन

Prasanna Badan Chaturvedi ने कहा…

उम्दा...बहुत बहुत बधाई...
नयी पोस्ट@मतदान कीजिए

Smart Indian ने कहा…

नेता वही हैं,किसी भी दल मे घुस जाएँ। आपको ब्लोगिंग के पाँच शतक पूरे करने पर बधाई!