22.5.13

जैसे वह मुझसे कुछ कहना चाहता है ...



जबलपुर में दमोह रोड स्थित माढोताल तालाब है . दमोह रोड में मेरे चाचा जी का मकान है और उनके मकान के ठीक पीछे  माढोताल तालाब है . यहाँ मैं बचपन से जा रहा हूँ  . जब जब मैं इस तालाब को देखता हूँ तो मुझे लगता है कि यह तालाब मानो मुझसे चींख चींख कर कह रहा है कि तुम मुझे  भूल गये . जब बहुत छोटे थे और अपने चचेरे भाई पप्पी के साथ इस तालाब में खूब नहाते थे . 

कभी इस तालाब में सिंघाड़े खूब लगा करते थे और सिंघाड़े लगाने वाले छोटी नाव जैसी डोंगी इस तालाब में चलाते थे जिसे बांस के सहारे चलाया जाता है . तुम और पप्पी इस डोंगी को चलाने के लिए खूब मचल जाते थे  और जिद कर डोंगी चला ने की खूब कोशिश किया करते थे और डोंगी पलट जाने पर तालाब में तुम लोग गिर जाते थे तो तुम लोग और मैं भी बहुत खुश हुआ करते थे .

 करीब 52 वर्ष पहले तुम लोगों ने मेरा विशाल आकार देखा था तब मैं 100 एकड़ में हुआ करता था . मेरे कारण भूमि का जल स्तर खूब रहा करता था और लोग तालाब के पानी का उपयोग पीने के लिए किया करते थे . मेरे चारों ओर सीमेंट कंक्रीट का जाल फ़ैल गया है . लोग मुझे भूल विकास कार्यों में लगे है और अब मेरे तिहाई भाग में क्षेत्रीय बस टर्मिनल बनाया जा रहा है और अब मैं तीस एकड़ में ही सिकुड़ कर रह गया हूँ . लोग बाग़ इतिहास की विरासत को संजो कर रखते हैं पर लगता है कि लोग मेरे इतिहास को भूल गए हैं और मुझे सजोना भूल गए हैं .

 इस शहर में रानी दुर्गावती ने 52  ताल खुदवाए थे और उनमें से मैं भी एक था . कभी रानी दुर्गावती और अकबर बादशाह के सेनापति आसफ खां की सेनाओं के बीच चंडाल भाटा में युद्ध हुआ था . रानी ने अपनी सेना की छावनी को पानी पीने की व्यवस्था करने के लिए मुझे खुदवाया था . कभी लोग बाग़ लोगों को भलाई के लिए जल उपलब्ध करने के लिए तालाब खुदवाते थे अब इन बातों  की उपयोगिता रही कहाँ हैं . लोग बाग़ अपनी उन्नति के लिए मुझे ही समाप्त करने पर तुल गए हैं .

आज नहीं तो एक दिन लोगों को मेरी उपयोगिता जरुर समझ में आएगी और इसका खमियाजा आगामी पीढ़ी को भोगना पड़ेगा और अगली पीढी तुम सभी को माफ़ नहीं करेगी . मैं भी यह सोच सोच कर सहम जाता हूँ कि तालाब की व्यथा कहीं भी गलत नहीं है और यह भी सोचता हूँ कि बचा खुचा यह तालाब मेरे न रहने के बाद बाद पता नहीं बचता हैं या नहीं यह तो भविष्य के गर्त में रहेगा पर बचपन से जुडी यादों को विस्मृत करना बड़ा ही कठिन है ...





(foto - madhotal talaab) 
( जीवन के संस्मरण )

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14 टिप्‍पणियां:

P.N. Subramanian ने कहा…

सुन्दर आलेख . हमारे पूर्वजों ने एक ख़ास उद्देश्य से ही इन तालाबों को खुदवाया था आज हम रेन वाटर हार्वेस्टिंग की बात करते हैं और पहले से ही जो इंतज़ाम किये गए थे उनकी ऐसी तैसी कर रहे है.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

तालाब तब भी आवश्यक थे, आज भी हैं। इन पर ध्यान नहीं दिया गया तो हम प्यासे रह जायेंगे।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

समय के बदलाव ने इंसान को भक्षक बना दिया है ... और वो अनजाने की अपना भक्षण कर रहा है ... जल संयोजन हर समय जरूरी है और तालाब, कूंए इसका उपयोग हमेशा रहने वाला है ...

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

मढाताल को विशाल जलाशय के रूप में हमने भी देखा है, इसकी यह दुर्गति देखकर आश्चर्य होता है. वहां के जन और समाज सेवक क्या आंखें मूंदे बैठे हैं? आज जल सरंक्षण की महती आवश्यकता है और हम जो मौजूद हैं उन्हें भी नही बचा पा रहे हैं तो नया क्या खाक करेंगे?

रामराम.

kshama ने कहा…

Muddaton baad blog jagat me aayi hun....kharab tabiyat hai...aapko padhana bada achha laga...haan ham apne bachpan se hamesha jude rahte hain!

mahendra mishra ने कहा…

आभार शमां जी ....आप स्वस्थ रहें ईश्वर से यही कामना करता हूँ ...

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन खुद को बचाएँ हीट स्ट्रोक से - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

दिलबाग विर्क ने कहा…

आपकी प्रस्तुति कल के चर्चा मंच पर है
धन्यवाद

mahendra mishra ने कहा…

रामपुरिया जी,
जन जागरूकता के अभाव के कारण और नेताओं के उदासीन रवैये के कारण इस विशाल जलाशय की यह दुर्गति हो गई है ... कुछ जनहित याचिका कोर्ट में विचाराधीन हैं .

mahendra mishra ने कहा…

आभार सहमत हूँ ...

mahendra mishra ने कहा…

जी सहमत हूँ ... जल नहीं तो कल नहीं ...

mahendra mishra ने कहा…

सर आभार ... तालाबों की ऐसी तैसी तो हो ही रही है और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का उपयोग ही कहाँ किया जा रहा है .

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

कैसे लोग हैं अपनी संतानों के बारे में भी नहीं सोचते !

mahendra mishra ने कहा…

आप सभी का आभार शुक्रिया ....