30.11.12

लघुकथा : फूल और काँटे ...


बगिया में गुलाब का एक सुन्दर फूल लगा था उसे अपनी सुन्दरता पर बड़ा नाज था और जो भी उस गुलाब के फूल को देखता तो उसकी सुन्दरता की तारीफ किये वगैर न रहता .  सुन्दरता को लेकर गुलाब के फूल और उसमें लगे काँटों के बीच बहस होने लगी . गुलाब ने अभिमान में आकर  काँटों से कहा - मेरी सुन्दरता का सारा जग दीवाना है और तुम्हें मेरे पास रहकर तनिक भी शर्म नहीं आती . लोग मुझे भगवान को चढ़ाते है तो एक तुम लोग हो जो सदैव दूसरे लोगों को कष्ट देते हो . अच्छा होता की मेरा और तुम्हारा साथ न होता .
काँटों ने दुखी होकर गुलाब के फूल से कहा - माना की तुम बहुत सुन्दर हो पर हम कांटे ही तुम्हारे सौंदर्य की रक्षा करते हैं और अगर हम न होते तो तुम्हें कोई भी चाहे जब मसल कर फेंक देता और आगे चलते बनता . हम लोगों ने तुम्हारे सौन्दर्य की रक्षा कर कोई कठोर अपराध तो नहीं किया है . यह सुनकर गुलाब के फूल को काफी लज्जा का सामना करना पड़ा और तबसे शर्म के मारे वह सुर्ख लाल हो गया .

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20 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

बहुत बढ़िया बोध-कथा ।।

आदरणीय बधाई ।।

रोजी लगी लताड़ने, कर सौन्दर्य बयान ।

कंटक को खल ही गई, बोला बात सयान ।

बोला बात सयान, तुम्हारी रक्षा करता ।

माना सुन्दर रूप, सकल जग तुम पर मरता ।

किन्तु भरे हैं दुष्ट, विकल लोलुप मनमौजी ।

भागें हमसे दूर, तभी तुम बचती रोजी ।।

vandana gupta ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (1-12-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

vandana gupta ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (1-12-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

हर चीज़ का अपना महत्‍व है

पूरण खंडेलवाल ने कहा…

अच्छी सीख देती कहानी !!

सुज्ञ ने कहा…

शर्म के मारे वह सुर्ख लाल हो गया.
ला-जवाब लघु-कथा!!
आभार!!

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत बढ़िया .
काश कि कांटे खुशबु की रक्षा भी कर पाते।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

बहुत खूब !

विश्व एड्स दिवस पर रखें याद जानकारी ही बचाव - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सबके अपने गुण होते हैं,
अपनापन हम क्यों खोते हैं।

ZEAL ने कहा…

बहुत बढ़िया बोध-कथा

Akhil ने कहा…

bahut sundar aur sargarbhit kahani....

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

bahut badhiya aur sach...

सदा ने कहा…

बहुत ही बढिया।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
दो दिनों से नेट नहीं चल रहा था। इसलिए कहीं कमेंट करने भी नहीं जा सका। आज नेट की स्पीड ठीक आ गई और रविवार के लिए चर्चा भी शैड्यूल हो गई।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (2-12-2012) के चर्चा मंच-1060 (प्रथा की व्यथा) पर भी होगी!
सूचनार्थ...!

Rohitas ghorela ने कहा…

भगवान ने हर एक चीज सौच समझ कर बनाई है और उसका अपना एक महत्व होता हैं। बहुत अच्छी सीख देती लघ-कथा।


मिश्रा जी आपके ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा ..अगर आपको भी अच्छा लगे तो मेरे ब्लॉग से भी जुड़े।
आभार!!

Rewa ने कहा…

wah very niceee....

Khabar Junction ने कहा…

मिश्रा जी बहुत खूब ! प्रकृति ने अपना नियम बहुत सोच समझ कर बनाया है फूल और कांटे की संज्ञा देकर जीवन में सबका अपने महत्त्व बताया है

expression ने कहा…

बहुत बढ़िया कहानी....
सीख देती हुई..

सादर
अनु

बवाल ने कहा…

बहुत सुन्दर कहा पंडितजी।

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

सभी का अपना-अपना महत्व है, अहंकार नहीं करना... प्रेरक कथा, शुभकामनाएँ.