25.9.12

दारू पियत में ...

आज सुबह सुबह मै कवि एवं गायक पंडित शिव प्रसाद जी शुक्ल "शिब्बू दादा" की पुस्तक "बिगड़ी मेरी बना दो" पढ़ रहा था . पुस्तक में आदरणीय शुक्ल जी द्वारा शराबबंदी के परिपेक्ष्य में लोकगीत रचना "दारू पियत में" लिखी गई है जो आज के समय में प्रेरक भी है और रचना में यह सीख भी दी गई है की दारू न पिए . भाई प्रवीण पांडे जी द्वारा प्रेषित टीप में लिखा था पंडित जी पुस्तक की रचना ब्लॉग में प्रकाशित करें तदनुसार मैं पंडितजी की रचना आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ . ..

दारू पियत में

दारू पियत में सिपाही पकर लाये
सिपाही पकर लाये - सिपाही पकर लाये
दारू पियत में सिपाही पकर लाये


थाने में हमखौं घसीटत वे लै गए
कलर खौं पकड़े और पीटत वे लै गए,
पीठ में हमारी दो डंडा जमाये
दारू पियत में सिपाही पकर लाये


घर के सारे गहने बिके, बिके लोटा थारी
कर जा में लुट गई कमाई हमारी
कैसे चले खरचा अब रामई बताये
दारू पियत में सिपाही पकर लाये


छोड़ दी दारू अब कभ्भउ ने पी हैं
बीबी, बाल-बच्चों संग, हंस खे हम जी हैं
राम करे सबखौं जा रास्ता दिखाए
दारू पियत में सिपाही पकर लाये


रचनाकार लोकगीत गायक पंडित शिव प्रसाद जी शुक्ल "शिब्बू दादा"

उनकी पुस्तक "बिगड़ी मेरी बना दो" से साभार

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11 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

लोकगीतों में ग़जब का संदेश रहता है। भगवान इसी तरह सबको रास्ता दिखाए।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति!

रविकर ने कहा…

उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़ी दुर्गति भई..

Manu Tyagi ने कहा…

बहुत अच्छी रचना

अनूप शुक्ल ने कहा…

बहुत सुनदर रचना !

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

अच्छा सन्देश लिए लोकगीत

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

धन्‍यवाद अच्‍छा पढ़वाने के लि‍ए

विजय तिवारी " किसलय " ने कहा…

आदरणीय बड़े भैया
आपने कवि, गायक एवं संगीतज्ञ श्री शिब्बू दादा के गीत को अपने ब्लॉग पर स्थान देकर उनका एवं जबलपुर का मान बढाया है.

ई. प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति |
मेरी नई पोस्ट:-
♥♥*चाहो मुझे इतना*♥♥

शिखा कौशिक 'नूतन ' ने कहा…

hardik dhanyvad itni behtar rachna padhvane hetu .