29.5.11

आज का विचार - लेखक के कलम के भाव बताते हैं की लेखक की मानसिक प्रवृति कैसी है और कलमकार का व्यक्तित्व और कृतित्व कैसा है....

आज का विचार - लेखक के कलम के भाव बताते हैं की लेखक की मानसिक प्रवृति कैसी है और कलमकार का व्यक्तित्व और कृतित्व कैसा है और वह किस तरह के वातावरण से ज्यादा प्रभावित हैं और किस वातावरण में वह पला पुसा है . अच्छे प्रवृति के लोगों के विचार अच्छे होंगें और बुरे आदमियों के विचार और उनकी संगत बुरी ही होगी .

तुलसीदास जी ने सही ही कहा है की " तुलसी इस संसार में भांति भांति के लोग " . कलमकार भी तरह तरह के मानसिकता वाले होते हैं . अच्छा कलमकार समाज के हित चिंतन पर स्वच्छ मर्यादित लेखन कर साहित्य जगत के शीर्ष पर पहुँच जाता है तो दूसरी ओर दूसरा कलमकार दूसरों की पूँछ पकड़ कर, अमर्यादित लेखन कर अपने खुद के लिए जल्द गढ्ढा खोद कर अपनी कबर जल्द तैयार कर लेता है .

कायर लेखक वे होते हैं जो दूसरों की आड़ लेकर अपना झाड़ तैयार करने की कोशिश करते हैं परन्तु दूसरों का साफ साफ नाम लेकर सामने आकर लड़ने का मादा जुटा नहीं पाते हैं इन्हें आप गीदड़ कलमकार की संज्ञा दे सकते हैं .

सच्चा कलमकार लेखक वे होते हैं जो अपनी लेखनी ओर लेखन नीति को समाजहित में अपनी बात को सबके सामने दिलेरी के साथ रखते हैं . अप्रिय साहित्य लिखना और पढ़ना मेरी फितरत में नहीं है .

कुछ कलमकार दूसरे कलमकारों को उकसाने का काम बखूबी से अंजाम देते हैं और ऐसी श्रेणी में बड़े बड़े कलमकार भी आते हैं जिनकी कलई कभी न कभी खुल ही जाती है . मै तो सदैव यह कोशिश करता रहा हूँ की ब्लागजगत में मेरी कलम कभी अमर्यादित न हो और अच्छा से अच्छा लेखन करूँगा और ब्लागजगत में मेल जोल बढेगा .

मैंने छै साल के ब्लाग लेखन के दौरान यह अनुभव किया है यहाँ भी चाहे स्थानीय स्तर पर हो या राष्ट्र स्तर पर ब्लागिंग में क्षुद्र कलमकार और राजनीतिज्ञों बाजों की कमी नहीं हैं जो अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए किसी अच्छे कलमकार या ब्लागर को हंसिये पर ले जा सकते हैं और उनकी छबि खराब कर सकते हैं .

अप्रिय लेखन शैली कर समय समय पर वे अपना गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं . ब्लागिंग के दौरान कई बार ऐसे लोगों को मैंने कई बार रंग बदलते हुए देखा है और पढ़ा है इसीलिए मैंने भागने की बजाय जबलपुर के ब्लागरों से दूर रहकर ब्लागिंग करने का निश्चय किया है चाहे वे गिरीश बिल्लौरे हों या अन्य स्थानीय हौं .

न पहले मुझे इनकी जरुरत थी और न भविष्य में मुझे होगी . ब्लागिंग लेखन मैं अपनी मानसिक शांति के लिए करता हूँ और इसे मैं अपनी डायरी समझ कर लिखता हूँ .

हाँ एक बात और यदि किसी को मेरे खिलाफ खुलकर लिखना है और ब्लागिंग में साफ साफ महेंद्र मिश्र को संबोधित कर लिखें ताकि मैं भी समझ संकू की मुझे लिखा गया है फिर उस ईट का जबाब मैं जरुर पत्थर से दे संकू .

मेरे खून ने मुझे यही सिखाया है की सामने जाकर ईट का जबाब पत्थर से दो . मैं गीदड़ों की तरह लेखन कर वार करने का आदि नहीं हूँ . वैमनस्यता के कारण व्यक्तिगत छबि ख़राब करने वालों को मैं अपना दुश्मन मानता हूँ चाहे वह किसी भी क्षेत्र से क्यों न जुड़ा हो .

जबलपुर के ब्लागिंग के स्वच्छ माहौल में यदि पंगा लेना हैं तो खुलकर लो ... हर तरह से जबाब दिया जायेगा


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19 टिप्‍पणियां:

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सही कह रहे हैं मिस्र जी । लेखनी में व्यक्ति का व्यक्तित्त्व झलकता है ।
लेकिन किस की हिम्मत है जो आपसे पंगा ले सकता है ।
सांच को आंच नहीं । यही सच है ।

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

आदरणीय डॉ टी एस दराल,
सर मैं खुद लज्जित हूँ की मैं ये सब क्यों लिख रहा हूँ ... सच है स्वाभिमान के चलते सांच को आंच नहीं होती है ... और क्षुद्र लेखन और कीचड उछालने वाले साहित्य को मैं कभी पसंद नहीं करता हूँ . आभार

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

देखिये एक उदहारण - बड़े कैसे उलझाते हैं ... टीप देकर...

दिशा किस ओर है ...सटीक लिखा है ...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

क्यों नाराज चल रहे हैं आजकल...
वैसे व्यक्ति कार्यप्रणाली में उसके व्यक्तित्व की छवि उतर आती है..

मदन शर्मा ने कहा…

पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ |
गज़ब का आक्रोश भरा है
आपकी सारी रचनाएं पढ़ी बहुत अच्छा लगा !
अफ़सोस है की पहले क्यों नहीं आया आपके पोस्ट पर !
कृपया मेरे ब्लॉग पर आयें http://madanaryancom.blogspot.com

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

कलम की शुचिता बनी रहे।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

लेखन में व्यक्ति का व्यक्तित्त्व दीखता है यह सही बात है ... उसी के आधार पर यहाँ हर एक कि छवि बनती है ..पर कभी कभी ऐसा भी लगा है कि लिखते समय लेखक कुछ और होता है और व्यवहार में कुछ और ...

ललित शर्मा ने कहा…

महाराज, बात से बात बढती है।
मिल बैठें तो कोई बात भी बने।

Rahul Singh ने कहा…

ये हुई न जबलपुरिया बात, लेकिन लगता है कि आप व्‍यथित हैं, क्षोभ छोड़ ब्‍लॉगिंग में जुटे रहें.

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (30-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

राज भाटिय़ा ने कहा…

महेन्द्र मिश्र आप ने सह लिखा ...लेखनी में व्यक्ति का व्यक्तित्त्व झलकता है । अब वो चाहे कोई लेख हो या टिपण्णियां ही, कोई कितना भी सीधा बन जाये एक दिन सब को उस के बारे पता चल ही जाता हे उस की कलम से... कुछ एक लेखो को पढने से थोडा आभास तो हो रहा था कि कही कुछ गडबड हे, ओर मै खास कर ऎसे लोगो से थोडी दुरी ही बना कर रखता हुं, आप मन को छोटा मत करे, मस्ती से लिखे.

विजय तिवारी " किसलय " ने कहा…

बड़े भैया
(सदा से मैंने आपको बड़े भैया ही संबोधित किया है)
आपने लिखा है-
"" मैंने भागने की बजाय जबलपुर के ब्लागरों से दूर रहकर ब्लागिंग करने का निश्चय किया है चाहे वे गिरीश बिल्लौरे हों या अन्य स्थानीय हौं .
न पहले मुझे इनकी जरुरत थी और न भविष्य में मुझे होगी ""
आपके लिखने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.
मैं भी जबलपुर का स्थानीय ब्लॉगर हूँ.
वैसे भी आप हम से दूर कैसे हो पायेंगे?
आपने जो हमारे दिल में बुलंद हौसले और निर्भीकता की छवि बनाई है, उसे हम कभी बाहर नहीं कर पायेंगे.
आप अपना अपने पथ पर चलें.
मैं तो सदा की भांति अपने पथ पर चल ही रहा हूँ.

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

भाई ललित जी,
अपनी विचारधारा के लोगों के बीच में ही रहकर बात की जा सकती है . जहाँ विचार नहीं मिलते हैं वहां से हटना और दूर हो जाना ही बेहतर है ...

Gyandutt Pandey ने कहा…

अरे बाप रे! क्या हुआ?

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

महेन्‍द्र जी बहुत पते की बात कही। आपसे पूर्ण सहमति रखताहूं।

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गुडिया रानी हुई सयानी...
सीधे सच्‍चे लोग सदा दिल में उतर जाते हैं।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत ही अच्छी लगी आपकी सुंदर विचार लिए यह पोस्ट..... सच कहा आपने लेखन व्यक्तित्व का आइना होता है..... आभार

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

आप सभी का टीप/अभिव्यक्ति के लिए आभारी हूँ ... जो कहूँगा सच कहूँगा और खुलकर लिखूंगा ...

Jyoti Mishra ने कहा…

a very clear-cut and straight forward post !!!

ZEAL ने कहा…

निर्भीक , शानदार आलेख , बिना किसी लाग लपेट के । सहमत हूँ आपके विचारों से।