24.3.11

व्यंग्य : जहाँ देखो वहां भाट और चारण नजर आते हैं ...

कभी राजा महाराजों के दरबार में भाट और चारण हुआ करते थे जो राजा के दरबार में और राज्य में राजा के गुणगान गाया करते थे और बदले में खूब पुरस्कार और इनाम पाया करते थे . स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत हमारे देश में राजनीतिक नेताओं, पूंजीपति और व्यापारियों ने तात्कालिक लाभ पाने के उद्देश्य से राजा और महाराजों के दरबारों में रहे भाट और चारण वाली कार्यशैली अपना ली है और निरंतर लाभ अर्जित कर रहे हैं .

राजनीति में पार्टी हाई कमान से लेकर मंत्री और छुटभैय्ये सड़कछाप नेताओं के भाट और चारण होते हैं जो समय समय पर अपने नेता का यशोगान और गुणगान करते रहते हैं और अपने नेताओं के द्वारा उपकृत होते रहते हैं . आज के समय में इसी भाटगिरी के कारण कई राजनेता अपनी कुर्सी को बचाने में सफल कामयाब हुए हैं .

अभी हाल में मैंने एक टी.व्ही समाचार में देखा की एक मंत्रीजी जैसे ही अपने कार्यालय से काम समाप्त कर बाहर निकले फ़ौरन उनके इक भाट ने फ़ौरन दौड़कर उन्हें झुककर जूते पहिनाए और फिर शान से अकड़ता हुआ अपना सर उठाकर मंत्रीजी के आगे आगे चलने लगा .

एक समाचार में देखा था की एक राजनेत्री की जूती एक पुलिस अधिकारी अपने रुमाल से साफ़ कर रहा है निश्चित ही आगे जाकर उस अधिकारी को भाट गिरी का फायदा अवश्य प्राप्त होगा और उस नेत्री के रहते वह जरुर कोई बड़ा ओहदा प्राप्त कर लेगा ऐसा मेरा मानना है .

नौकरी में अफसरों के भाट और चारण हमेशा फायदे में रहते हैं उन्हें कोई काम नहीं करना पड़ता है और बस मौज ही मौज रहती हैं और इसी वजह से उन्हें कोई साधारण आदमी या कर्मचारी आँख उठाकर भी नहीं देख सकता है की भैय्या इनसे पंगा कौन लें वरना नैय्या डूब जाएगी .

साहित्य के क्षेत्र में भी छुटभैय्ये कलमकार को पहले पहले मंच पर स्थान ग्रहण करने के लिए बड़े साहित्यकारों और कवियों का भाट बनना पड़ता है तब कहीं जाकर आगे उन्हें उपलब्धि प्राप्त होती हैं और तब कहीं मंच पर बैठने का सुख मिल पाता है इसे देखकर मुझे भी यह लगने लगा है की भाट और चारण बनना कितना फायदेमंद है की आदमी की बखत बढ़ जाती है ..

अंत में चलते चलते एक बात और कह दूं की ब्लागजगत में भी भाट और चारणों की कमी नहीं है इनकी बड़ी कदर की जाती है और इस तरह के लोगों की कलम चलाये वगैर भी ब्लागजगत में अच्छी खासी पूछपरख होती रहती है और ऐसे भाटों और चारणों के कारण अच्छे कलमकार भी फीके पड़ जाते हैं और ब्लागजगत से अपना नाता तोड़ लेते हैं .

इन्हीं ब्लाग भट्टों और चारणों के कारण ब्लागजगत में "तू मेरी बजा मैं तेरी बजाता हूँ" की तर्ज पर कई ब्लागरों के कई दरबार बन गए है जिनके अपने अपने भाट और चारण है. ऐसे ब्लॉग भट्टों और चारणों के कारण ब्लागजगत में एकता और भाई चारा बनाये रखने की बाते भी फीकी नजर आती है ...


व्यंग्य प्रस्तुति-

महेंद्र मिश्र जबलपुर.

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18 टिप्‍पणियां:

amrendra "amar" ने कहा…

Karara Vyangya Blog Jagat ke liye ,
waah bahut khub

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

करारा कटाक्ष।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सटीक व्यंग है ....

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

आद० महेंद्र जी ,

बिलकुल सही लिखा है आपने | जहाँ भी देखो भंडैती की हद है , ऐसे माहौल में भला योग्यता कितनी सफल हो पायेगी ? मगर स्वाभिमानी व्यक्तित्व किसी भी हालत में ऐसी स्थितियों से समझौता तो नहीं कर सकता न !

ललित शर्मा ने कहा…

मिसिर जी,मारा पापड़ वाले को।उम्दा व्यंग्य,बिना खुजाए कहाँ काम चलता है जमाने में। :)

रंग पंचमी की शुभकामनाएं
आभार

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बिना भाट चारणों के तो राजा महाराजाओं का काम नही चलता था तो बेचारे मठाधीष बिना भाटों के कैसे रहेंगे?:)

रामराम

Rahul Singh ने कहा…

हमें तो ऐसा नहीं दिखा, लेकिन आप अनुभवी हैं, गंभीर अध्‍ययन है आपका, सो आपकी बात का हम भी समर्थन कर देते हैं.

Rahul Singh ने कहा…

हमें तो ऐसा नहीं दिखा, लेकिन आप अनुभवी हैं, गंभीर अध्‍ययन है आपका, सो आपकी बात का हम भी समर्थन कर देते हैं.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत बढ़िया ....ज़बरदस्त व्यंग

राज भाटिय़ा ने कहा…

सहमत हे जी आप से

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

इसकी जरूरत तो रहती ही है..

Udan Tashtari ने कहा…

भाट और चारणों की दुनिया है...सटीक लिखा है.

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

चारण भाट तो फिर सच कहने से नहीं चुकते थे पर आजकल के भाट तो बस पुरे चापलूस है |

cmpershad ने कहा…

ये भाट और चारण ही तो नैया डुबोते हैं :)

दीपक बाबा ने कहा…

मिसिर जी, देश भी तो यही भात और चरण चला रहे हैं.......

सारा सच ने कहा…

nice

V!Vs ने कहा…

mei sahmat hu.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

महेन्‍द्र जी, सही कटाक्ष किया है आपने। बधाई।

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प्रेम रस की तलाश में...।
….कौन ज्‍यादा खतरनाक है ?