28.1.11

महेंद्र मिश्र लाइव : "भारत के वीर जवान" पुस्तक का लाइव वेब कास्ट -1,2,3,4


हर्ष एवं गौरव का विषय है की "भारत के वीर जवान" पुस्तक सन १९६८ में मेरे पिता स्वर्गीय पंडित बद्री प्रसाद जी मिश्र द्वारा लिखी गई थी जिसका प्रथम संस्करण मई १९६९ को प्रकाशित किया गया था . सन १९६२ में चीन और सन १९६५ में पकिस्तान द्वारा हमारे देश में आक्रमण किया था जिसमे हमारे देश के अनेक वीरों ने अपने प्राण देश की रक्षा करने के लिए हंसते हंसते निछावर कर दिए थे और देश के लिए शहीद हो गए . उन अमर वीर शहीदों की बलिदान गाथा को इस पुस्तक में संजोया गया है . अमर वीर शहीदों की अमर गाथा का वेब लाइव कास्ट मेरे द्वारा प्रारंभ कर दिया गया है ... कुछ यूं.टूयूब अवलोकनार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ ....








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महेंद्र मिश्र लाइव : "भारत के वीर जवान" पुस्तक का लाइव वेब कास्ट -1,2,3,4

13 टिप्‍पणियां:

: केवल राम : ने कहा…

आदरणीय महेंद्र मिश्र जी
आजकल आपने तेबर बदल दिए ....लेखन के साथ साथ यह जो जीवंत प्रसारण ..काफी सार्थक बना देता है ...पोस्ट को आपके प्रयास सराहनीय हैं ..शक्रिया
इस पुस्तक के प्रकाशन के लिए आपको अनेक शुभकामनायें

kshama ने कहा…

Bahut hee sundar prastuti!

डॉ टी एस दराल ने कहा…

पोडकास्ट बहुत अच्छा प्रयास है । बधाई ।

सुज्ञ ने कहा…

गौरवमय 'वीर जवान' के प्रकाशन पर बधाई!!
पोडकास्ट भी सुन्दर प्रसुति है। आभार

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

शायद यह किताब मैंने पढ़ी है..

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

सार्थक प्रयास...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सार्थक ..

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

पढ़ी हुयी पुस्तक लग रही है।

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छा लगा ... सुनना भी।

Mithilesh dubey ने कहा…

पोडकास्ट बहुत अच्छा लगा , बधाई आपको ।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुंदर जी, महेंद्र मिश्र जी आप के चेहरे पर ज्यादा लाईट पडती हे इस लिये कभी कभी साफ़ चेहरा नही दिखाई देता, आप को एक राय हे कि आप लेंप की लाईट सीधे चेहरे पर मत डाले,लाईत छत से या किसी सफ़ेद चीज से टकरा कर आप पर आये तो चित्र बहुत साफ़ आयेगा, कोशिश कर के देखे धन्यवाद

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति...आभार

GirishMukul ने कहा…

yah ek zarooree vaachan hai. mujhe behad achchha lagaa . kai bar hamlog jab purane sandarbh dekhana chahate haiM to mil nahee paate. aaz aapane wo kary kar dikhaya jo aane wale yug ke liye zarooree hai.
bade bhaiya ko aabhaar bhe kaise kahoon fir bhee ABHAR
sadar
girish billore