29.12.10

आतंरिक निष्ठायें ही व्यवहार और आचरण का मूल आधार होती हैं ....

एक बार एक राहगीर को रास्ते में कुछ आम के पेड़ लगे दिखे तो उसके मन में आम खाने की इच्छा हो गई . उस राहगीर ने आम के पेड पर एक पत्थर फैककर मारा तो काफी तादाद में आम उस वृक्ष में से जमीन पर गिर पड़े . उस आदमी ने उन आमों को उठाया और खुश होकर अपनी राह आगे बढ़ गया . इस वाकये को ऊपर से आसमान देख रहा था . आसमान ने आम के वृक्ष से पूछा - दिनभर राह चलते लोग बाग़ प्रतिदिन तुम्हें पत्थर फैंककर मारते हैं और एक तुम हो की पत्थर खाने के बावजूद तुम लोगों को सतत फल प्रदान करते रहते हो परन्तु मैंने तुममे बदले की भावना कभी नहीं देखी है आखिर इसका रहस्य क्या है ? .

आम के वृक्ष ने हँसते हुए आसमान को उत्तर दिया - हे तात अगर आदमी अपने लक्ष्य से भटक जाए तो क्या हम समझदारों को उन्हीं की तरह पागलपन करना चाहिए . आतंरिक निष्ठायें ही व्यवहार और आचरण का मूल आधार होती हैं . अगर आज का आदमी अपनी आतंरिक निष्ठाओं को जाग्रत कर ले तो न जाने वह क्या से क्या बन जाए ....

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9 टिप्‍पणियां:

: केवल राम : ने कहा…

शिक्षाप्रद .......शुक्रिया

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (30/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.uchcharan.com

अन्तर सोहिल ने कहा…

इस प्रेरणादायी कथा के लिये आभार

प्रणाम

डॉ टी एस दराल ने कहा…

प्रेरणात्मक विचार ।

उपेन्द्र ' उपेन ' ने कहा…

bahut hi shikshaprad katha.......

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

शिक्षाप्रद लघुकथा के लिए आभार!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सौ प्रतिशत खरी बात।

राज भाटिय़ा ने कहा…

अति सुंदर विचार जी धन्यवाद

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अगर आज का आदमी अपनी आतंरिक निष्ठाओं को जाग्रत कर ले तो न जाने वह क्या से क्या बन जाए ....


बहुत सटीक विचार