28.11.10

आज एक पुरानी झेलिये .... महेन्द्र .....जिंदगी एक तपस्या है....

विगत वर्ष जनवरी में यह रचना मैंने अपने ब्लॉग "निरंतर" में प्रकाशित की थी यह रचना मुझे बेहद पसंद है .... कोई दुःख की घड़ी हो और जब कभी खुद को अनमना सा महसूस करता हूँ .... या जिंदगी की कोई कठिन परीक्षा जब सामने आ जाती है तो यह रचना मुझे बहुत ही प्रेरित करती है और मेरा आत्मविश्वास बढ़ाने में सोने में सुहागा का काम करती है .... प्रस्तुत कर रहा हूँ लीजिये झेलिये .... समय शुरू होता है अब ...


महेन्द्र .....जिंदगी एक तपस्या है

जिंदगी एक तपस्या है

परीक्षा की घड़ी में सबको इसकी परीक्षा देना है
जिंदगी के मोड़ पर अनेको सुख दुःख तो आते है
सभी को इस परीक्षा में फ़िर भी सफल होना है

जिंदगी एक तपस्या है

इसमे कुछ सफल और कुछ असफल हो जाते है
डरकर अपनी जिंदगी से जो मुँह मोड़ लेते है
वे धरती धरा पे डरपोक महा कायर कहलाते है

जिंदगी एक तपस्या है

जिंदगी एक तपस्या है जिंदगी एक परीक्षा है
तमाम अपनी ये जिंदगी एक नाव के समान है
इस जिंदगी की नाव को वैतरणी पार लगाना है

जिंदगी एक तपस्या है

महेन्द्र ये जिंदगी एक कडुआ घूट के समान है
इस कडुआ घूट को नीलकंठ बन...पीना भी है
नीलकंठ बन जिंदगी हँस कर फ़िर भी जीना है

जिंदगी एक तपस्या है

महेन्द्र मिश्र.

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29 टिप्‍पणियां:

सुज्ञ ने कहा…

मनोबल को आधार देती तपस्या का चित्रण।
बेहद प्रेरक

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

पुरानी है पर काम की..

केवल राम ने कहा…

तमाम अपनी ये जिंदगी एक नाव के समान है
इस जिंदगी की नाव को वैतरणी पार लगाना है
जीवन की वास्तविकता के बेहद करीब हैं यह पंक्तियाँ ...बहुत खूब ...शुक्रिया
चलते - चलते पर आपका स्वागत है

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (29/11/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

kshama ने कहा…

महेन्द्र ये जिंदगी एक कडुआ घूट के समान है
इस कडुआ घूट को नीलकंठ बन...पीना भी है
नीलकंठ बन जिंदगी हँस कर फ़िर भी जीना है

जिंदगी एक तपस्या है
Kya baat hai!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सारी ज़िंदगी तप में ही बीत जाती है ...फिर भी खरे - खोटे का पता नहीं चलता ...

बेहतर है कि तपस्या ही करें ..

Girish Billore 'mukul' ने कहा…

पुरानी नहीं नई ही है

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत सार्थक रचना, शुभकामनाएं.

रामराम

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

आदरणीय महेन्द्र मिश्रजी किसी कवि ने कहा है -जीवन जीना कठिन है विष पीना आसान।इन्सा बनकर देख लो हे शँकर भगवान।विचारपरक आलेख के लिए बधाई।

'उदय' ने कहा…

... behatreen rachanaa ... badhaai !!!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

बहुत ही सही और प्रेरक बात कही है आपने ...

S.M.HABIB ने कहा…

सदा की तरह प्रेरणादाई पोस्ट भईया.... प्रणाम.

बंटी चोर ने कहा…

मैं बंटी चोर जूठन चाटने वाला कुत्ता हूं। यह कुत्ता आप सबसे माफ़ी मंगता है कि मैने आप सबको परेशान किया। जाट पहेली बंद करवा के मुझे बहुत ग्लानि हुई है। मेरी योजना सब पहेलियों को बंद करवा कर अपनी पहेली चाल्लू करना था।

मैं कुछ घंटे में ही अपना अगला पोस्ट लिख रहा हू कि मेरे कितने ब्लाग हैं? और कौन कौन से हैं? मैं अपने सब ब्लागों का नाम यू.आर.एल. सहित आप लोगों के सामने बता दूंगा कि मैं किस किस नाम से टिप्पणी करता हूं।

मैं अपने किये के लिये शर्मिंदा हूं और आईंदा के लिये कसम खाता हूं कि चोरी नही करूंगा और इस ब्लाग पर अपनी सब करतूतों का सिलसिलेवार खुद ही पर्दाफ़ास करूंगा। मुझे जो भी सजा आप देंगे वो मंजूर है।

आप सबका अपराधी

बंटी चोर (जूठन चाटने वाला कुत्ता)

mahendra verma ने कहा…

परीक्षा की घड़ी में सबको इसकी परीक्षा देना है
जिंदगी के मोड़ पर अनेको सुख दुःख तो आते है
सभी को इस परीक्षा में फ़िर भी सफल होना है

सही कहा आपने, सचमुच ज़िंदगी एक परीक्षा ही तो है...किसी के लिए सरल तो किसी के लिए कठिन।
...सीख देती हुई सुंदर रचना।

Poorviya ने कहा…

bahut sunder purani ram thand main nikali hai.
ek sunder rachana.ham logo ke liye nai hai.aaj hi padhi hai.

सतीश सक्सेना ने कहा…

कह तो ठीक ही रहे हो भाई जी ! शुभकामनायें

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

इस तप में ही होकर निखरना है।

मनोज कुमार ने कहा…

ऐसी रचनाएं हरदम नई होती हैं।

बवाल ने कहा…

कमाल है पंडितजी इतनी उम्दा रचना को आप पुरानी कहते हैं। हम तो इसे नूरानी कहेंगे भई। जल्द मिलते हैं।

M VERMA ने कहा…

सुन्दर रचनाएँ .. पुरानी नहीं होती

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

पुरानी है पर हर शब्द प्रासंगिक है और हमेशा रहेगा..... बडी अच्छी लगी यह पोस्ट .....

अशोक बजाज ने कहा…

बहुत अच्छी रचना,आभार!

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा..कमाल की रचना!!

ZEAL ने कहा…

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तमाम अपनी ये जिंदगी एक नाव के समान है
इस जिंदगी की नाव को वैतरणी पार लगाना है ...

बहुत प्रेरणादायी पंक्तियाँ हैं महेंद्र जी। जिंदगी वास्तव में एक तपस्या ही है। सतत प्रयत्नरत रहते हुए हमें अपनी नाव पार लगानी ही है।

इस ओजस्वी कविता के लिए आभार।

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ajit gupta ने कहा…

जीवन संघर्ष का दूसरा नाम है, इसलिए सतत संघर्षरत रहो। अच्‍छी रचना, बधाई।

अनुपमा पाठक ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत ही प्रेरक ... सार्थक ... आशा वादी .... सीधे मन के द्वार जाती है ये रचना ..

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

लीजिए साहब, आपका आदेश सिर माथे।
झेल लिया...।

वैसे इस झेलने के चक्कर में काफी अच्छा संदेश लेकर जा रहे हैं।
शुक्रिया।

deepak saini ने कहा…

बहुत ही प्रेरक
पुरानी होकर भी पुरानी नही है