11.10.10

अब हँसने के लिए जोग हैं ....

मुन्नी बदनाम ने एक बहुत उम्दा नस्ल का कुत्ता खरीदा . पहले दिन उस कुत्ते ने मुन्नी बदनाम के ड्राइंग रूम में बिछे कालीन पर पौटी कर दी . मुन्नी बदनाम ने उस कुत्ते को डाँटते हुए कहा - अगर तूने दुबारा पौटी की तो मैं तुझे खिड़की से बाहर फैंक दूंगी .वह कुत्ता रोज रोज कालीन पर पौटी करता रहा और मुन्नी बदनाम उठा उठाकर खिड़की से बाहर फैकती रही . यह देखते देखते आखिरकार उस कुत्ते के व्यवहार में तब्दीली आ गई और एक दिन उसने कालीन पर पहले पौटी की फिर खिड़की के रास्ते बाहर की और छलांग लगा दी .

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एक नेताजी ने सभा में भाषण देते हुए कहा की मैं अक्ल से लड़ता हूँ तभी भीड़ में से मुन्नी बदनाम की आवाज आई - लिहाजा आपकी और मेरी लड़ाई नहीं हो सकती है .... नेताजी ने उससे पूछा - ऐसा क्यों
मुन्नी बदनाम ने नेताजी को जबाब दिया - मैं निहत्थे लोगों पर वार नहीं करती हूँ .

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आज मुन्नी बदनाम सुबह से खुश थी और खुश होकर अपनी टाइपिस्ट सहेली से बोली - तुम्हें पता है आज मैंने एक कंगले को एक हजार का नोट दे दिया .
सहेली - अरे मुन्नी तूने खुश होकर उसे एक हजार नोट दे दिए और तेरा आदमी कुछ नहीं बोला .
मुन्नी बदनाम - हाँ बोला था .
सहेली ने पूछा - क्या बोला था ? .
मुन्नी बदनाम - बोला था थैंक्यू मुन्नी .

००००००

मुन्नी बदनाम अपनी सहेली से - मेरा पति अपने आपको मगर मच्छ समझता था
सहेली मुन्नी से - फिर तूने क्या किया ?
मुन्नी बदनाम ने जबाब दिया - मैंने उसकी दो जोड़ी सैंडिलें और हैण्ड बैग बनवा लिया है .

००००००


एक वयोवृद्ध लेखक ने पत्रकारों को बताया की उनकी आगामी रचना में वो सब कुछ होगा जो उन्होंने साठ सालों के दौरान सीखा है .
एक पत्रकार - ओह तो आप साठ सालों के बाद अब लघुकथा लिखने की तैयारी कर रहे हैं .

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20 टिप्‍पणियां:

डॉ टी एस दराल ने कहा…

हा हा हा ! बहुत मजेदार जोक्स ।
मुद्दतें हो गई थी , हँसे हुए । आभार ।

Shekhar Suman ने कहा…

वाह वाह ..बहुत खूब....मज़ा आ गया..

मेरे ब्लॉग पर इस बार
एक और आईडिया....

'उदय' ने कहा…

... अंतिम जोक्स कमाल है !

M VERMA ने कहा…

ये भी तो बता देते कि आखिर मुन्नी बदनाम क्यों हुई थी ...
बहुत सुन्दर मजा आ गया.

मनोज कुमार ने कहा…

ये मुन्नी बदनाम तो आज दिन भर के सर दर्द के लिए झंडू बाम हो गई!
हा-हा-हा....

सुरेन्द्र बहादुर सिंह " झंझट गोंडवी " ने कहा…

waah mishraji ! maja aa gaya

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa ने कहा…

पहले वाला तो खूब ही खूब।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

इस उपयोगी हास्य को प्रस्तुत करने के लिे आभार!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

वाह वाह।

राज भाटिय़ा ने कहा…

आप ने तो आज मुन्नी को दोनो हाथो से खुब बदनाम कर दिया जी, उस की पोल खोल कर:) बेचारी मुन्नी बदनाम

अशोक बजाज ने कहा…

मजेदार चुटकिलों का संग्रह . बधाई

Umra Quaidi ने कहा…

लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

http://umraquaidi.blogspot.com/

उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
“उम्र कैदी”

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

:) :) बहुत बढ़िया ...

अजय कुमार झा ने कहा…

हा हा हा वो पर्स और सैंडल जरूर ही खूब चले होंगे हा हा हा ..

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

bahut sundar badhai

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

अजय भाई,
मुन्नी बाई के वो पर्स और सैंडल खूब चले ... हा हा हा

Babli ने कहा…

वाह! वाह! क्या बात है! बहुत बढ़िया और मज़ेदार लगा!

VIJAY TIWARI 'KISLAY' ने कहा…

निश्चित तौर पर हँसने से हल्कापन लगता है.
आप समय समय पर ये काम करते रहते हैं.
- विजय

ZEAL ने कहा…

< Smiles >

गिरीश बिल्लोरे ने कहा…

Munni ke upasthiti mazedar hai