19.8.10

मम्मी की डांट....

मम्मी ने डांटा पत्रों को पढ़कर या बात को सुनकर हाँ, हूँ, नहीं में याने कम शब्दों में जबाब नहीं दिया करो ... जबाब ऐसा दो की समझ में तो आये की आपने क्या सुना और क्या पढ़ा है .... अब बताइये मैं क्या करूँ ... कम शब्दों में जबाब देना गलत है क्या ... जबाब कम शब्दों में दिया तो क्या अनर्थ हो गया ... अब बताइये मैं क्या करूँ ... पढ़ता हूँ तो खैर नहीं कम लिखता हूँ तो खैर नहीं कम शब्दों में बोलता हूँ तो खैर नहीं .... अब आप ही बताइये मैं क्या करूँ ...

12 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

माँ की डाँट, वाह।

रानीविशाल ने कहा…

ye to badi mushkil ho gai :)

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बस जवाब ऐसा होना चाहिए कि पूछने वाले कि समझ में उत्तर आ सके ...और माँ तो ज्यादा ही बात करना चाहती हैं न

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

hmmm...


kaisa laga....?

सतीश सक्सेना ने कहा…

कुछ नहीं करो ! डांट खाओ और समझने की कोशिश करो, कब अकल आएगी पंडित जी !
शुभकामनायें :-)

सतीश सक्सेना ने कहा…

बड़े किस्मत वाले हो मिश्र जी काश यह डांट हमें भी मिलती ....
:-(

सतीश सक्सेना ने कहा…

मिश्र जी ,
मेरे ख़याल से आज की सबसे अच्छी पोस्ट यही है सो इसे "माँ" पर छपने जा रहा हूँ आशा है आपकी अनुमति मिलेगी !
सादर

रश्मि प्रभा... ने कहा…

maa kam shabdon me santusht nahi hoti, to likhiye n pyaari maa ke liye
jyada

सतीश सक्सेना ने कहा…

इस लेख का उल्लेख किया है ..कृपया देख लें !
http://maatashri.blogspot.com/2010/08/blog-post_20.html
सादर

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

सतीश जी,
सादर अभिवादन,
यदि पोस्ट छापते हैं तो मुझे कोई भी आपत्ति नहीं हैं शुक्रिया .... आभार

Virendra Singh Chauhan ने कहा…

AAp ki Maa sahi sir...ji. Maa ki baat maaniye.

वन्दना ने कहा…

हर जगह हाँ हूँ मे काम नही चलता।