29.7.10

एक चिट्ठी मानसून के नाम...

एक चिट्ठी मानसून के नाम...

प्रिय हे मानसून जी ...

यहाँ हम सब धरती वासी अच्छी तरह से हैं और हम सभी आशा करते हैं की आप जहाँ भी होंगें अच्छी तरह से होंगें . हर वर्ष हम सभी गरमी के सीजन की समाप्ति के बाद से ही आपकी ह्रदय से व्याकुलता के साथ प्रतीक्षा करते हैं की आप समय पर पधारे पर पर्यावरण से निरंतर खिलवाड़ किये जाने के कारण अब आप समयानुसार पधारते नहीं हैं जो अब हम सभी की मानसिक चिंता का विषय हैं .

विश्वस्त सूत्रों से पता चला है की आप कुछ क्षेत्रों के ऊपर अपना कहर बरपा रहे हैं और क्रोधित होकर भारी पानी बरसा रहे हैं जिससे भारी जन धन की हानि हो रही है . कुछ क्षेत्रों से आप अपनी राजनीतिक शत्रुता भंजा रहे हैं और आप वहां अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा रहे हैं और मुड़कर भी उन क्षेत्रों की और ध्यान नहीं दे रहे हैं और वहां के लोग देखिये न मानसून के लिए कैसे कैसे जतन कर रहे हैं कोई बारिश के लिए नग्न होकर आपके देवता इंद्र देव को खुश करने में लगा है की वो रीझ जाए और खुश होकर आपको भेज दें तो कोई हल में जनप्रतिनिधि को खेतों में जोत कर आपको खुश करने में लगा है की आप वहां जल्दी पहुंच जायेगे. वहां के लोग आपके वगैर व्याकुल हैं और त्राहि त्राहि कर पानी पानी चिल्ला रहे हैं . आपसे प्रार्थना हैं की आप वहां जल्दी जाए और अपनी उपस्थिति दर्ज कराये .

आप तो सर्व शक्तिमान हैं यदि आप चाहे तो समानता के आधार पर एक साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं और सबको पानी पानी कर सकते हैं . यदि आप कुछ क्षेत्रों में समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करते हैं तो वहां के ताल तलैया नदियाँ सूखे रहेंगे और वहां की ललनाये आपके वगैर सावन के झूले झूलने तरसेंगी... और लोगों को पानी नहीं मिलेगा तो लोग प्यासे रहेंगे और पाप का सारा ठींकरा आपके सर फोड़ा जायेगा और पाप के भागीदार होंगे .



कुछ लोग यह कहते सुने गए हैं की मानसून महाराज वहां खूब बरसते और ठुमकते हैं जहाँ विपाशा बासु और महिमा चौधरी जैसी कई बार बलाएँ ठुमक ठुमक कर डांस करती हैं . भैय्या जल्दी आ जाओ कम से कम जल्दी आ जाओ तुमरे आ जाने से नगरीय प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल तो खुल (कलई) जाती है .... साल भर जो चढ़ बढ़ कर कागजी घोषनाएं की जाती हैं ... वे आपके आगमन के बाद ही लोगों की समझ में आती हैं .... की साल भर उन्हें कितनी भरपूर सरकारी लालीपॉप खिलाई गई है ... आपके आगमन के बाद ही तो ढोल की पोल खुलती है की आपके नाम पर कितनी बड़ी बड़ी योजनायें बनाई गई हैं और लोक सेक्टर का माल समझ कर हजम कर लिया गया है .

इसीलिए हे मानसून महाराज जल्दी आ जाओ जिससे जनता के हित में दूध का दूध और पानी का पानी हो सकें . यदि आप नहीं आयेंगे तो सरकारी टट्टुओं को खाने का एक मौका और मिल जायेगा और सूखे के नाम पर वे बजट बनाना शुरू कर देंगे और जनता का माल हजम करने की साजिशें रचना शुरू कर देंगे . ऊपर वाला सब देखता हैं .... की कौन पाप कर रहा है और कौन पाप नहीं कर रहा हैं .... कम से कम आप तो समझदार हैं और आप तो पाप के भागीदार कतई नहीं बनेगें ...

आपका भवदीय -

धरती मानस पुत्र

17 टिप्‍पणियां:

डॉ टी एस दराल ने कहा…

पानी बरसे या न बरसे , दूध तो बरस रहा है पुणे में ।

वन्दना ने कहा…

बेहद उम्दा पोस्ट……………बहुत ही सुन्दर खत लिखा है।

kshama ने कहा…

Monsoon kaa jawab aaye tab use bhi zaroor post pe laga deejiyega!!Aap courier bhi kar ddejiye,kya pata blog padhen na padhen!!:):)

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

जरुर शमां जी आपके आदेश पर कोरियर भी कर दूंगा ....

अपनीवाणी ने कहा…

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अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

आप की रचना 30 जुलाई, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
http://charchamanch.blogspot.com

आभार

अनामिका

कविता रावत ने कहा…

इसीलिए हे मानसून महाराज जल्दी आ जाओ जिससे जनता के हित में दूध का दूध और पानी का पानी हो सकें . यदि आप नहीं आयेंगे तो सरकारी टट्टुओं को खाने का एक मौका और मिल जायेगा और सूखे के नाम पर वे बजट बनाना शुरू कर देंगे और जनता का माल हजम करने की साजिशें रचना शुरू कर देंगे . ऊपर वाला सब देखता हैं .... की कौन पाप कर रहा है और कौन पाप नहीं कर रहा हैं .... कम से कम आप तो समझदार हैं और आप तो पाप के भागीदार कतई नहीं बनेगें
..sodeshya prasuti ke liye aabhar

रश्मि प्रभा... ने कहा…

had karte hain aap... kahin rimjhim , kahin tarse dhartee... garajte baraste aao baadal

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुतीकरण तथ्यों का।

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

मानसूम के बहाने खरी खरी । ईस्वर करे जल्दी ही मानसून आये जनता के लिये तो ये बेहद जरूरी है ।

मनोज कुमार ने कहा…

पत्र लिखना स्वयं में एक कला है। कई लोगों के पत्र विश्व साहित्य की धरोहर हैं।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आज कल पत्र पढ़ने को ही नहीं मिलते....बढ़िया पत्र लिखा है....

'उदय' ने कहा…

...adbhut bhaav !!!

S.M.HABIB ने कहा…

रोचक चिट्ठी है भईया. मानसून समय पर और सब तरफ समान रूप से आये इसके लिए हम सभी "धरती मानस पुत्रों" को कोशिश करनी होगी, बिगड़ते पर्यावरण को बचाने की. पत्र के बहाने महत्वपूर्ण तथ्य रेखांकन के लिए धन्यवाद.

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सटीक पत्र.

सतीश सक्सेना ने कहा…

मैं भी आपके पीछे खड़ा हूँ पंडित जी !...शुभकामनाओं के साथ

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

एकदम सटीक.

रामराम