27.6.10

मैं यादों के ख़ूबसूरत महल में.....

मैं यादों के ख़ूबसूरत महल में
तेरी तस्वीर सुंदर लगाऊंगा.
इस दिल में मोहब्बत में
सुंदर ख्वाव मै दिल से सजाऊंगा.

तू अजमा कर एक बार मुझे
तेरे दिल में बस जाऊंगा .
प्रेम का प्याला हूँ तेरे प्यार का
याद में तेरी तड़फ तड़फ कर
जीते जी मैं मर जाऊंगा.

मेरी इन आँखों के ये आंसू
यारा अब तेरी अमानत है
भुला न देना मेरे इन आंसुओ को
जो तेरी याद कर रात-दिन
झर झर मेरी आँखों से बहते थे.
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10 टिप्‍पणियां:

'उदय' ने कहा…

... क्या बात है!!!

वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत भावमय कविता है। शुभकामनायें

M VERMA ने कहा…

प्रेम का प्याला हूँ तेरे प्यार का
याद में तेरी तड़फ तड़फ कर
जीते जी मैं मर जाऊंगा.
बेहतरीन भाव और समर्पण की कविता

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

कविता ने भावुक कर दिया ।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत अच्छी जी आप की यह रचना

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खूबसूरत अभिव्यक्ति

मै नीर भरी ने कहा…

कविता में प्यार की अतृप्ति है ..याचना है गुहार है ..सुन्दर अभिव्यक्ति !!

S.M.HABIB ने कहा…

जनाब बशीर बद्र के ये शेर आपको नजर है...
"आँखों में रहे दिल में उतर कर न देखा
कश्ती के मुसाफिर ने समंदर न देखा
पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला
मैं मोम हूँ उसने मझे छूकर नहीं देखा"

स्वाति ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति...