आज रविवार को मै महेंद्र मिश्र आप सभी का सादर अभिवादन कर आपके लिए रविवार की चिट्ठी लेकर आ गया हूँ . आज सुबह सुबह अखबारों में यह समाचार पढ़ा की रेलवे के विज्ञापन में जो नक्शा दिया गया है देश की राजधानी दिल्ली को पकिस्तान में और और पश्चिम बंगाल की राजधानी को बंगाल की खाड़ी में और ग्वालियर को महाराष्ट्र में दर्शाया गया है को पढ़कर लगा की आजादी के ६० वर्ष पूरे हो जाने के बाद भी अभी भी सरकारी अमला अशिक्षित और निरक्षर निरंकुश है उन्हें भी साक्षर बनाए जाने की जरुरत है . बहुत ही निहायत शर्मनाक वाक्या यह है की देश के महत्वपूर्ण जिम्मेदार अमले को अपने देश के बारे में जानकारी नहीं है इससे बढ़कर दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति और क्या हो सकती है . आज और कल जो ब्लॉग मैंने पढ़ें उनका उल्लेख इस चिट्ठी में कर रहा हूँ .
ललितडॉटकॉम, चर्चा पान की दुकान पर, शिल्पकार के मुख से आदि ब्लागों के कलमकार और समयचक्र में चिट्ठी चर्चा लेखक भाई ललित शर्मा जी का आज जन्मदिन है उनको जन्मदिन के अवसर पर ढेरो बधाई और शुभकामनाये की उनकी कलम में दिनोदिन निखार और धार आये .
एक बार इस हिन्दी ब्लोगिंग में क्या घुस गये कि लत लग गई इसकी और इसने हमें "धोबी का गधा घर का ना घाट का" बना कर रख दिया. अंग्रेजी ब्लोगिंग करते थे तो जहाँ एडसेंस से चेक मिलता था वहीं क्लिक बैंक के प्रोडक्ट बिकने पर कमीशन की रकम सीधे हमारे बैंक खाते में जमा...धान के देश में...जी.के.अवधिया जी . एलके.अडवाणी'स ब्लॉग में विदेश में जमा गुप्त भारतीय धन पर श्वेत पत्र की जरुरत पर लालकृष्ण आडवाणी जी के विचार . ये मेरा इंडिया ! में सरकारी कामकाज किस तरह होते हैं, रेलवे द्वारा एक विज्ञापन दिया गया है उसका एक ज्वलंत एक नमूना बता रहे हैं बलबिन्दर जी...दिल्ली पाकिस्तान में ! कोलकाता बंगाल की खाडी में !! है .
विचारणीय सामयिक प्रेरक पोस्टमेरा धर्म बड़ा है , तुम्हारा धर्म छोटा, अल्लाह बड़ा है, भगवान् छोटा... सब अपने-अपने घरों में शांति से अपनी आस्था अपना विश्वास क़ायम रखें...तो क्या ही अच्छा हो... बस यूँ समझ लीजिये कि...एक पहाड़ की चोटी है जहाँ सबको पहुँचाना है ..सभी अपनी सहूलियत से अलग-अलग रास्तों से ऊपर चढ़ रहें हैं ...लेकिन पहुंचेंगे सभी उसी चोटी पर..क्योंकि मंज़िल तो एक ही है न. काव्य मंजूषा में अदाजी . जब फुरसतिया जी ने मूड बनाया कविता लिखने का और वगैर देर किये एक रचना लिख डाली तो चलिए पढ़िए मसौदा और उनकी रचना कविता का मसौदा और विश्व गौरैया दिवस . डॉ टी एस दराल जी कह रहे हैं की अच्छे स्वास्थ्य के लिए हँसना जरुरी है . नन्ही लेखिका में रघुवेंद्र जी रोमांच से भरपूर लाहौर फिल्म की समीक्षा कर रहे हैं . भारत स्वाभिमान मंच का एजेण्डा किस तरह का होना चाहिए ... उड़न खटोला में नारद जी के विचार व्यक्त कर रहें हैं . अब गूगल की अनेक सुविधाएँ एक साथ भाई नवीन प्रकाश जी हिंदी ब्लॉग टेक. में जानकारी दे रहे हैं . सच है बढ़ती मंहगाई और रोजगार की तलाश में ग्रामीण शहरों की पलायन कर रहे हैं जनपक्ष में अशोक कुमार पाण्डेय जी का आलेख गांव में ही नहीं रहते हैं ग़रीब .
आज दिल फिर शाद के फूलों से नहाया है
मैंने भेजे थे कुछ पैगाम पीपल के पत्तों पर
बादल भीगी पलकों से उनके जवाब लाया है.
मुआहिदा* किया जब-जब तेरा हवाओं से
दुपट्टा हया का आँखों तक सरक आया है.
हरकीरत'हीर'जी की बेहतरीन रचना प्रस्तुति ...
देशनामा में खुशदीप सहगल की २०० वीं पोस्ट.... मेरी डबल सेंचुरी और भगवान लापता... बधाई खुशदीप जी ...हजारो पोस्टें लिखें शुभकामना के साथ .भाई संजय गुलाटी मुसाफिर जी अप्रैल 2010 - त्यौहार व उपयोगी जानकारी दे रहे हैं . हास्यकवि अलबेला खत्री कह रहे हैं की जाने माने रंगलाल और उसका बेटा नंगलाल फ़ोकट में घर पहुँच गये हा हा हा . आश्रय का निर्माण होने के बाद उसका नामकरण करने की परिपाटी भी प्राचीनकाल से ही चली आ रही है. यह आश्रय चाहे राष्ट्र हो प्रांत हो, नगर हो अथवा ग्राम, हर आश्रय का एक नाम ज़रूर होता है. शब्दों का सफ़र में अजित वडनेरकर जी की प्रस्तुति ....[नामकरण-1] नाम में क्या रखा है .
अविनाश वाचस्पति जी स्वाद पर मुहावरा पूछ रहे हैं अदरक के स्वाद पर एक नया मुहावरा बतलायें. कुछ कर गुजरने का जज्बा हौसला और मौलिक सोच हो तो इंसान क्या नहीं कर सकता है इस विचार को लेकर गत्यात्मक चिंतन में संगीता पुरी जी छोटी छोटी बात में भी मौलिक सोंच के सहारे कोई व्यक्ति आगे बढ सकता है तीसरा खंबा में दिनेशराय द्विवेदी जी ने ... अलग अलग धर्म के पति-पत्नी की संतान किस विधि से शासित होगी ? विधिसम्मत उपयोगी जानकारी प्रदान की हैं . मेरे गीत में सतीश सक्सेना जी ... यमुना मैय्या मैली सी दिल्ली में यमुना एक नाले के रूप में बहती है. आर्ट ऑफ़ लिविंग के द्वारा १७ मार्च से एक सामूहिक प्रयास शुरू किया गया है , बहुत प्रसंशनीय कार्य मानते हुए लोगों ने इसमें योगदान किया है .
कहीं नजरें न तरसें गौरैया की एक झलक को अब आंगन में फुदकती गौरैया नजर नहीं आती। बटेर अब कभी-कभार ही दिखते है. वनों की कटाई और वन क्षेत्र में बढ़ते मानवीय दखल से पंछियों की दुनिया प्रभावित हुई है और पंखों वाली कई खूबसूरत प्रजातियों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है कठफोड़वा में संजय भास्कर जी की प्रस्तुति . मौन के खाली घर मे ओम आर्य की रचना उल्के ... आजकल ये तारा टिमटिमाता रहता है अकेला . ज़िन्दगी में गर प्यार से छू ले वन्दना जी रचना हमेशा की तरह भावपूर्ण .
अमर सिंह अफीसियल ब्लॉग में बकौल अमर सिह जी क्या कह रहे हैं ...मेरे ख़ुलूस ने मुझे रखा अँधेरे में, तेरा फरेब मुझे रोशनी में ले आया . घुरूवा में संजीव तिवारी की प्रस्तुति तेजी से कांक्रीटमय होती शहरी धरती में कहीं कोई पेड भी है जिसे मैंनें लगाया है . वैसे तो कविता का ईजाद इंसान ने किया है पर सच यह है कि कविताएं भी इंसानों को तराशती-बनाती हैं. कई कविताएं आपके दिल-दिमाग में इतने गहरे पैठ जाती हैं कि आपका और उसका साथ जीवन-भर चलता है. मुझे लगता है कोई न कोई ऐसी कविताएं हमारे पास...अन्दर की बात बता रहे हैं कपिल जी आज विश्व-कविता दिवस है.
एक आलसी का चिठ्ठा में गिरिजेश राव जी कुछ इस तरह से ....
कुछ लिखना है लेकिन मन नहीं बन रहा इसलिए यह लिख दिया :) हिन्दी साहित्य संगम जबलपुर में विजय तिवारी "किसलय" जी...विगत दिनों अल्प प्रवास पर जबलपुर आये अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध संगीत व्याख्याता श्री राज ठाकुर से ली गई भेंट वार्ता प्रस्तुत कर रहे हैं . मेरी भावनाए में रश्मिप्रभाजी की रचना...दिल की बात .
इतनी चर्चा कर अब चर्चा को समाप्त करने की अनुमति चाहता हूँ .
जय हिंद
मेरा भारत महान
महेंद्र मिश्र ..
ललितडॉटकॉम, चर्चा पान की दुकान पर, शिल्पकार के मुख से आदि ब्लागों के कलमकार और समयचक्र में चिट्ठी चर्चा लेखक भाई ललित शर्मा जी का आज जन्मदिन है उनको जन्मदिन के अवसर पर ढेरो बधाई और शुभकामनाये की उनकी कलम में दिनोदिन निखार और धार आये .
एक बार इस हिन्दी ब्लोगिंग में क्या घुस गये कि लत लग गई इसकी और इसने हमें "धोबी का गधा घर का ना घाट का" बना कर रख दिया. अंग्रेजी ब्लोगिंग करते थे तो जहाँ एडसेंस से चेक मिलता था वहीं क्लिक बैंक के प्रोडक्ट बिकने पर कमीशन की रकम सीधे हमारे बैंक खाते में जमा...धान के देश में...जी.के.अवधिया जी . एलके.अडवाणी'स ब्लॉग में विदेश में जमा गुप्त भारतीय धन पर श्वेत पत्र की जरुरत पर लालकृष्ण आडवाणी जी के विचार . ये मेरा इंडिया ! में सरकारी कामकाज किस तरह होते हैं, रेलवे द्वारा एक विज्ञापन दिया गया है उसका एक ज्वलंत एक नमूना बता रहे हैं बलबिन्दर जी...दिल्ली पाकिस्तान में ! कोलकाता बंगाल की खाडी में !! है .
विचारणीय सामयिक प्रेरक पोस्टमेरा धर्म बड़ा है , तुम्हारा धर्म छोटा, अल्लाह बड़ा है, भगवान् छोटा... सब अपने-अपने घरों में शांति से अपनी आस्था अपना विश्वास क़ायम रखें...तो क्या ही अच्छा हो... बस यूँ समझ लीजिये कि...एक पहाड़ की चोटी है जहाँ सबको पहुँचाना है ..सभी अपनी सहूलियत से अलग-अलग रास्तों से ऊपर चढ़ रहें हैं ...लेकिन पहुंचेंगे सभी उसी चोटी पर..क्योंकि मंज़िल तो एक ही है न. काव्य मंजूषा में अदाजी . जब फुरसतिया जी ने मूड बनाया कविता लिखने का और वगैर देर किये एक रचना लिख डाली तो चलिए पढ़िए मसौदा और उनकी रचना कविता का मसौदा और विश्व गौरैया दिवस . डॉ टी एस दराल जी कह रहे हैं की अच्छे स्वास्थ्य के लिए हँसना जरुरी है . नन्ही लेखिका में रघुवेंद्र जी रोमांच से भरपूर लाहौर फिल्म की समीक्षा कर रहे हैं . भारत स्वाभिमान मंच का एजेण्डा किस तरह का होना चाहिए ... उड़न खटोला में नारद जी के विचार व्यक्त कर रहें हैं . अब गूगल की अनेक सुविधाएँ एक साथ भाई नवीन प्रकाश जी हिंदी ब्लॉग टेक. में जानकारी दे रहे हैं . सच है बढ़ती मंहगाई और रोजगार की तलाश में ग्रामीण शहरों की पलायन कर रहे हैं जनपक्ष में अशोक कुमार पाण्डेय जी का आलेख गांव में ही नहीं रहते हैं ग़रीब .
आज दिल फिर शाद के फूलों से नहाया है
मैंने भेजे थे कुछ पैगाम पीपल के पत्तों पर
बादल भीगी पलकों से उनके जवाब लाया है.
मुआहिदा* किया जब-जब तेरा हवाओं से
दुपट्टा हया का आँखों तक सरक आया है.
हरकीरत'हीर'जी की बेहतरीन रचना प्रस्तुति ...
देशनामा में खुशदीप सहगल की २०० वीं पोस्ट.... मेरी डबल सेंचुरी और भगवान लापता... बधाई खुशदीप जी ...हजारो पोस्टें लिखें शुभकामना के साथ .भाई संजय गुलाटी मुसाफिर जी अप्रैल 2010 - त्यौहार व उपयोगी जानकारी दे रहे हैं . हास्यकवि अलबेला खत्री कह रहे हैं की जाने माने रंगलाल और उसका बेटा नंगलाल फ़ोकट में घर पहुँच गये हा हा हा . आश्रय का निर्माण होने के बाद उसका नामकरण करने की परिपाटी भी प्राचीनकाल से ही चली आ रही है. यह आश्रय चाहे राष्ट्र हो प्रांत हो, नगर हो अथवा ग्राम, हर आश्रय का एक नाम ज़रूर होता है. शब्दों का सफ़र में अजित वडनेरकर जी की प्रस्तुति ....[नामकरण-1] नाम में क्या रखा है .
अविनाश वाचस्पति जी स्वाद पर मुहावरा पूछ रहे हैं अदरक के स्वाद पर एक नया मुहावरा बतलायें. कुछ कर गुजरने का जज्बा हौसला और मौलिक सोच हो तो इंसान क्या नहीं कर सकता है इस विचार को लेकर गत्यात्मक चिंतन में संगीता पुरी जी छोटी छोटी बात में भी मौलिक सोंच के सहारे कोई व्यक्ति आगे बढ सकता है तीसरा खंबा में दिनेशराय द्विवेदी जी ने ... अलग अलग धर्म के पति-पत्नी की संतान किस विधि से शासित होगी ? विधिसम्मत उपयोगी जानकारी प्रदान की हैं . मेरे गीत में सतीश सक्सेना जी ... यमुना मैय्या मैली सी दिल्ली में यमुना एक नाले के रूप में बहती है. आर्ट ऑफ़ लिविंग के द्वारा १७ मार्च से एक सामूहिक प्रयास शुरू किया गया है , बहुत प्रसंशनीय कार्य मानते हुए लोगों ने इसमें योगदान किया है .
कहीं नजरें न तरसें गौरैया की एक झलक को अब आंगन में फुदकती गौरैया नजर नहीं आती। बटेर अब कभी-कभार ही दिखते है. वनों की कटाई और वन क्षेत्र में बढ़ते मानवीय दखल से पंछियों की दुनिया प्रभावित हुई है और पंखों वाली कई खूबसूरत प्रजातियों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है कठफोड़वा में संजय भास्कर जी की प्रस्तुति . मौन के खाली घर मे ओम आर्य की रचना उल्के ... आजकल ये तारा टिमटिमाता रहता है अकेला . ज़िन्दगी में गर प्यार से छू ले वन्दना जी रचना हमेशा की तरह भावपूर्ण .
अमर सिंह अफीसियल ब्लॉग में बकौल अमर सिह जी क्या कह रहे हैं ...मेरे ख़ुलूस ने मुझे रखा अँधेरे में, तेरा फरेब मुझे रोशनी में ले आया . घुरूवा में संजीव तिवारी की प्रस्तुति तेजी से कांक्रीटमय होती शहरी धरती में कहीं कोई पेड भी है जिसे मैंनें लगाया है . वैसे तो कविता का ईजाद इंसान ने किया है पर सच यह है कि कविताएं भी इंसानों को तराशती-बनाती हैं. कई कविताएं आपके दिल-दिमाग में इतने गहरे पैठ जाती हैं कि आपका और उसका साथ जीवन-भर चलता है. मुझे लगता है कोई न कोई ऐसी कविताएं हमारे पास...अन्दर की बात बता रहे हैं कपिल जी आज विश्व-कविता दिवस है.
एक आलसी का चिठ्ठा में गिरिजेश राव जी कुछ इस तरह से ....
कुछ लिखना है लेकिन मन नहीं बन रहा इसलिए यह लिख दिया :) हिन्दी साहित्य संगम जबलपुर में विजय तिवारी "किसलय" जी...विगत दिनों अल्प प्रवास पर जबलपुर आये अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध संगीत व्याख्याता श्री राज ठाकुर से ली गई भेंट वार्ता प्रस्तुत कर रहे हैं . मेरी भावनाए में रश्मिप्रभाजी की रचना...दिल की बात .
इतनी चर्चा कर अब चर्चा को समाप्त करने की अनुमति चाहता हूँ .
जय हिंद
मेरा भारत महान
महेंद्र मिश्र ..
18 टिप्पणियाँ:
आपका ब्लॉग समयचक्र में हार्दिक स्वागत है आपकी अभिव्यक्ति से मेरा मनोबल बढ़ता है .