आज गुरूवार को मै महेन्द्र मिश्रा फिर आपके लिए एक छोटी सी चिट्ठी लेकर आपके समक्ष उपस्थित हूँ . आजकल मुझे टी.वी. में अखबारों में सदनों की हंगामाखेज कार्यवाही देखने में बड़ा आनंद आ रहा है . सदन चाहे लोकसभा का हो राज्यसभा का हो या नगरनिगम का हो . मेरी समझ से सदन कोई भी हो जनप्रतिनिधि जनहित में किसी कार्य को मूर्त रूप से अंजाम नहीं दे रहे हैं और अपना समय व्यर्थ खराब कर रहे हैं . हंगामे के दौरान जनहित में कोई सार्थक निष्कर्ष तो निकलते नहीं हैं वरन नेताओ और जनप्रतिनिधियो की उल जुलूल हरकतों के कारण जनता जनार्दन को हँसने का मौका मिल जाता है . आज एक नगर निगम के सदन में प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष ने यह आरोप लगाया की शहर के कुत्तो की नसबंदी में भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है और काफी रकम खर्च कर दी गई है और फिर भी शहर में कुत्तो की कमी नहीं हुई है . कितने कुत्तो की नसबंदी नगर निगम ने कराई गई है और कितनी रकम इस मुद्दे पर खर्च कर दी गई . रकम का ब्यौरा तो सदन में पेश कर किया जाये . सदम में खर्च की गई रकम का ब्यौरा तो दे दिया गया तो फिर विपक्ष ने आवाज उठाई जिन कुत्तो की नसबंदी कराई गई है उन्हें सदन में पेश किया जाए . अब सत्तापक्ष हलाकान है की जिन कुत्तो की नसबंदी की गई उन्हें कैसे खोज कर सदन में प्रस्तुत किया जाए शहर में तो लाखो कुत्ते हैं .. ये आम नज़ारे हैं सदनों के जहाँ विकास की चर्चा छोड़कर कुत्तो की चर्चा कर समय नष्ट किया जाता है ... आज जो मैंने चिट्ठे पढ़े उनका जिक्र इस चिट्ठी में कर रहा हूँ ...
फुरसत ढूँढने में व्यस्त है भाई अभिषेक ओझा जी ..
मिस. समीरा टेढी द्वारा "ब्लागर्स कार्यशाला - 2010" का उदघाटन करवा दिया है ताउजी डाट.काम ने ... कार्यशाला में आप भी शामिल होइये जी .
इकतारे की धुन... टू ऊ ऊं ऊं ऊं..टू ऊ ऊं ऊं ऊं..मन डोले मेरा तन डोले...दिल का गया करार रे..ये कौन बजाये बांसुरिया इकतारे पर यह धुन बजाता जब वो घर के सामने से निकलता..तो वाकई मन डोल जाता. मिट्टी के दिये का बना वो इकतारा...बचपन से उसकी घुन लुभाती आई....बचपन में इकतारे की धुन भाई समीर जी ने खूब सुनी अब यादें यहाँ परोस रहे हैं ...उड़न तश्तरी पर.
"स्वप्न दिवस" और "सपनों की बात" और खुद के सपने की समीक्षा करने की बात कह रहे हैं भाई कुलवंत हैप्पीजी युवा सोच युवा ख्यालात में ...
हिन्दी के लेखक संगठनों की दिमागी गुलामी का तानाबाना-३ जगदीश्वर चतुर्वेदी जी ...
व्यथा बड़े गुरूजी की जता रहे है ... जी.के.अवधिया जी धान के देश में !
कुमार प्रशांत की नजर में हुसैन का जाना सामूहिक कायरता का नतीजा है जनतंत्र में ...
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व्हिप से संसद में महिला आरक्षण बिल लाकर इतिहास रचने का दावा आज इस देश का नव दौलतिया तबका कर रहा है . मीडिया का एक तबका भी बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना की तर्ज पर नाच रहा है बगैर यह जाने हुए कि इसका असली लाभ किसे मिलेगा . विरोध में ' रानी बनाम मेहतरानी ' का नारा याद है कामरेड.
जिन्दगी की पाठशाला में हिन्दू धर्म की कुछ प्रचलित विशेषताएं बता रहे हैं भावेश जी .
जनसत्ता में 'चवन्नी चैप' ... 11 मार्च 2010 को जनसत्ता के नियमित स्तंभ 'समांतर' में चवन्नी चैप पर अजय ब्रह्मात्मज बता रहे साहिर लुधियानवी के बारे में प्रिंट मीडिया पर ब्लॉगचर्चा बी एस पाबला जी द्वारा .
अब तो आ जा .... ज़िन्दगी में वंदना जी की रचना .
बिलकुल सच्चा है जी कुछ मचलता है और
कुछ फिसलता है जी दिल तो बच्चा है जी
मेरा सागर में प्रीती बर्थवाल...दिल तो..हम्मममम.
चौपाल की यादें अरशद अली जी से ... विगत बर्षों में मैंने चौपाल को मरते देखा है..
अतंर्राष्ट्रीय महिला दिवस और राज्य सभा में महिला आरक्षण बिल के पास होने के अवसर पर प्रस्तुत है व्यंग्य: नारी मुक्ति का जमाना है सुदर्शन में नारी मुक्ति का जमाना है (व्यंग्य/कार्टून) के.एम.मिश्रा जी.
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महिला आरक्षण की वजह से पनपेंगे इमोशनल अत्याचार सफ़ेद घर में भाई सतीश पंचम जी की अभिव्यक्ति ...
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ताऊजी डॉट कॉम का एलान ... फ़र्रुखाबादी विजेता (198) : सुश्री सीमा गुप्ता
भारत से सुधा अरोड़ा की दो लघुकथाएं ... महावीर में ..
लाल किताब का प्रभाव यानि सिद्धांतों में घालमेल सिद्धार्थ जोशी जी की कलम से लाल किताब के बारे में जानिए ...
इतनी आज की चिटठो की चर्चा कर मै चर्चा को विराम देने की आप सभी से इजाजत चाहूँगा .
जय हिंद
महेन्द्र मिश्रा
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इतनी आज की चिटठो की चर्चा कर मै चर्चा को विराम देने की आप सभी से इजाजत चाहूँगा .
जय हिंद
महेन्द्र मिश्रा
19 टिप्पणियाँ:
आपका ब्लॉग समयचक्र में हार्दिक स्वागत है आपकी अभिव्यक्ति से मेरा मनोबल बढ़ता है .