24.12.09

ब्‍लागरो की बीमारी "नारी"


आज समयचक्र पर समय से चिट्ठी चर्चा का न आ पाना मुझे वाकई खल रहा है, अपनी व्‍यस्‍तताओ के कारण गुरूवार का दिन मै भूल गया। अब जबकि दिन याद आ गया है तो चिट्ठीचर्चा को कैसे रोका जा सकता है। चलिये चिट्ठी चर्चा का दौर शुरू करते है।


भइया नया साल दस्‍तक दे रहा है, नये साल की तैयारी जोरो पर चल रही है। पर अभी भी पुरानी लकीर मिटने को नाम नही लिया जा रहा है। आज कई माह बीत गये किन्‍तु मुम्‍बई हमलो के दोषी कसाब को न सजा दी जा सकी है अपितु मुस्लिम ब्लॉगर का कसाब प्रेम बकायदा देखने को मिल रहा है। हम तो कसाब को इस्‍लाम से जोड़ने का विरोध करते है और चाहते है कि कसाब को इस्‍लाम से इस्‍लाम वाले निकाल दें क्‍योकि देश दोहियो का कोई धर्म नही होता है। ताजमहल पर विवाद भी सम्‍भव हो सकता है ? काफी लोग इस पर समहत नही होगे किन्‍तु जब रामसेतु पर प्रश्न चिन्‍ह रखा जा सकता है तो ताजमहल में शिव का पाँचवा रूप अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजित है यह सिद्ध किया है है महान इतिहासकार ओक साहब ने, इस विषय पर इतिहासकारो के मध्‍य व्‍यापक चर्चा होनी चाहिये क्‍योकि सच हर देशवासी जानना चा‍हता है। नारी पर किस प्रकार प्रश्‍न चिन्‍ह लगाया जा सकता है बिन ब्याहे मां बनना , क्या यही है नारी की स्वतन्त्रा ??? इस प्रकार के पोस्‍ट मै मुनासिब नही समझता हूँ क्‍योकि नारी को माँ बनाने मे जितनी स्‍वतंत्र नारी है उतना ही पुरूष भी। अभी भी नारी पर आक्रमण समाप्‍त नही हुआ पता चला कि हे नारी तू हड़प्पा है अच्‍छा ही है कि नारी सिर्फ हड़प्‍पा है मोहन जोदाड़ो नही है।


ब्‍लाग और तहलका का बहुत पुराना रिश्‍ता है इसी रिश्तो को बढ़ाते हुये महफूज भाई अपने प्‍यार का श्रेय हम सब को दे रहे है और मिला रहे है मेरी सन्यासन गर्ल फ्रेंड से और संस्कार शब्द का गूढ़ रहस्य से हमें रूबरू करवा रहे है। समीर लाल जी भी "हाय री ये दुनिया?" के दिक्कतो से खुद रूबरू हो और हमे करवा रहे है। अभी भी नारी नाम की बीमारी खत्‍म होने का नाम नही ले रही है क्‍योकि 'नारी' की चिंता में दुबले कुछ ब्लॉगर मित्र ! होगे भी क्‍योकि नारी पोस्‍टो से कुछ लोगो को पारा हाई हो जाता है, और पारा हाई होने पर उनकी मंशा भी पूरी हो जाती है। इस महगाई के दौर मे सेकुलरों और वामपंथियों के लिये एक खुशखबरी है की खबर भी सुनाई दे रही है, जनता बेहाल है किन्‍तु इस बेहाली के दौर मे कोई तो खुश है। वाह फिर नारी पर प्रश्‍न क्या विवाहिता को सुश्री कहना अनुचित है? शिकुमार जी कसाब को लेकर खुश हो रहे है क्‍योकि "इसे अगर फांसी की सज़ा नहीं होगी तो बचेगा कैसे?" और कव्‍वाल की कौव्‍वाली कैसे सुनी जायेगी।


गिरिजेश राव भाई साहब ने एक लेख लिखा कि .जिस स्पिरिट के साथ मैं लिख रहा हूँ वह आप लोगों में नहीं है। सही बात है कि स्पिरिट लोग खोते जा रहे है क्‍योकि "दिल है कि मानता नही" हमारी शहर महिला शक्ति ने महिला के मर्म को अच्‍छी तरह पहचाना और लिखा कि जिस दिन एक गृहिणी के कार्यों को महत्व मिलने लगेगा उसी दिन नारीवादी आन्दोलन समाप्त हो जायेगा…। कमाल तो अ‍वधिया जी के हाथ मे कमाल है और धान के देश में का यह नया हेडर ललित शर्मा जी के ग्राफिक्स का कमाल है! आज आदमी दान देने से कतराता है किन्‍तु कबूतरों ने दिया गौशाला के लिए लाखों का दान पर आदमी पिछड़ जाता है। आप जिस देश मे रहते है और उसी की जानकारी न हो ठीक उसी प्रकार यह कैसे हो सकता है कि जबलपुर ब्रिगेड हो और जबलपुर के बारे में जानकारी न हो यह जानकारी आपको मिलेगी जबलपुर ब्रिगेड मे।


इसी के साथ महाशक्ति को आज के चिट्ठी चर्चा से अनुमति दीजिए


जय हिन्‍द
जय भारत
जय श्रीराम


15 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

उत्तम चर्चा...देर से आई दुरुस्त आई.

बी एस पाबला ने कहा…

बढ़िया

ये भूली हुई चर्चा थी? तो याद कर की गई कैसी होगी!

बी एस पाबला

संगीता पुरी ने कहा…

देर से आई,छोटी भी है, पर बढिया है !!
जय हिन्‍द
जय भारत
जय श्रीराम

राज भाटिय़ा ने कहा…

मजा आ गया जी बहुत सुंदर चर्चा कि आप ने

ललित शर्मा ने कहा…

मिसिर जी-सुंदर चर्चा के लिए बधाई-आभार

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत सुंदर चर्चा.

रामराम.

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

दिल से स्वागत है आपकी प्रस्तुति का मतलब देर से नही है बात आपकी प्रस्तुति का है जो हमेशा की तरह शानदार और बढ़िया पोस्ट से सराबोर..बहुत बहुत बधाई!!!

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) ने कहा…

बहुते बेहतरीन

Mithilesh dubey ने कहा…

bahut badhiya charcha ,.

'अदा' ने कहा…

bahut khoob rahi charcha Mahashakti ji..!!

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

भाई प्रमेन्द्र जी,
कल कार्यक्रम में व्यस्तता के चलते समय पर पोस्ट नहीं देख सका जिसके लिए मुझे खेद है. बहुत बढ़िया धाँसू चर्चा की है .

जी.के. अवधिया ने कहा…

सुबह का भूला शाम को आ जाये तो उसे भूला हुआ नहीं कहते।

आपको याद आ गया और आपने आनन फानन में जोरदार चर्चा भी कर दी!

शहरोज़ ने कहा…

आप ने बात जहां से शुरू की , वो महज़ खीचने का बहाना था.आखिर में आग्रह-पुराग्रह में उलझ गए.इन दिनों बिना पढ़े कमेंट्स करने की जो आदत लोगों को पड़ गयी है,उस से न लिखने वालों का भला हो रहा है न ही सुधी पाठकों का.आप सर्वे बताएं कि कितने प्रतिशत में मुस्लिम ब्लागेर कसाब प्रेम दिखा रहे हैं.
और हाँ नारी-विमर्श पर औरकुछ दीगर मुद्दे पर ज़रूर पढ़ें.

निर्मला कपिला ने कहा…

बडिया चर्चा धन्यवाद्

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सुंदर चर्चा है .........