18.9.09

माई तेरे रूप हजार माई जगदम्बे भवानी : नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाये



असुरो के अत्याचारों से देवता बड़े दुखी त्रसित थे. देवताओं को ब्रम्हा जी ने बताया की असुरराज की मृत्यु किसी कुँआरी कन्या के हाथो से होगी . समस्त देवताओं के शक्ति तेज प्रताप से जगतजननी की उत्पत्ति हुई. देवी का मुख भगवान शंकर के तेज से हुआ . यमराज के तेज से मस्तक और केश, विष्णु के तेज से भुजाये, चंद्रमा के तेज से स्तन, इन्द्र के तेज से कमर और वरुण के तेज से जंघा पृथ्वी के तेज से नितम्ब, ब्रम्हा के तेज से चरण, सूर्य के तेज से दोनों पोरों की अंगुलियां, प्रजापति के तेज से दांत, अग्नि के तेज से दोनों नेत्र, संध्या के तेज से भौहे, वायु के तेज से कान और देवताओं के तेज से देवी के भिन्न भिन्न अंग बने.

महाशक्ति को शिवाजी ने त्रिशूल, लक्ष्मी ने कमल का फूल, विष्णु ने चक्र, अग्नि ने शक्ति और वाणों के तरकश, प्रजापति ने स्फटिक की माला, वरुण ने दिव्य शंख, हनुमान ने गदा, इन्द्र ने वज्र, भगवान राम ने धनुष बाण, वरुणदेव ने पाश और वाण, ब्रम्हाजी ने चारो वेद, हिमालय पर्वत ने सवारी करने के लिए सिह दिया और इसके अतिरिक्त समुंद्र ने उज्जवल हार, चूडामणि ,दो कुंडल, पैरो के नुपुर और ढेरो अंगूठियाँ माँ को भैट किये . इन सभी वस्तुओ को माँ जगदम्बे भवानी ने अपने अठारह हाथो में धारण किया. माँ दुर्गा इस धरा की आद्य शक्ति है अर्थात आदिशक्ति है.

पितामह ब्रम्हा भगवान विष्णु और भगवान शंकर उन्ही की शक्ति से स्रष्टि का की उत्पत्ति पालन और पोषण और संहार करते है अन्य देवता भी उन्ही की शक्ति से उर्जाकृत होकर कार्य करते है. नवरात्रि पर्व के प्रथम दिन माँ दुर्गा के प्रथम रूप शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है उन्होंने हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया था इसीलिए इन्हें शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है. इनका वाहन वृषभ है, इनके बाए हाथ में कमल है और दांये हाथ में त्रिशूल होता है इन्हें सती के नाम से भी जाना जाता है. एक बार दक्ष प्रजापति ने एक यज्ञ किया जिसमे भगवान शंकर को नहीं बाला गया था.

सती यज्ञ में जाने के लिए बैचेन थी. भगवान को नहीं बुलाया गया था तो वे नहीं गए पर उन्होंने सती को यज्ञ में जाने दिया. उनकी बहिनों ने उनका तिरस्कार किया और खूब सती का उपहास उड़ाया उनके पिता ने भी उन्हें अपमानजनक शब्द कहे. वे अपने पति का अपमान नहीं सह सकी और उन्होंने स्वयं को योगाग्नि द्वारा भस्म कर लिया इससे दुखित होकर भगवान शंकर ने उस यज्ञ का विध्वंस कर दिया. इन्ही सती ने अगले जन्म में शैलराज हिमालय के यहाँ जन्म लिया और शैलपुत्री कहलाई. इनका महत्त्व और शक्ति अनंत है.

ॐ दुर्गा देव्यो नमः
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता नमोस्तुते नमोस्तुते नमो नमः
सभी हिंदी ब्लागर भाई और बहिनों को नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाये .

17 टिप्‍पणियां:

aarya ने कहा…

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः.
रत्नेश त्रिपाठी

AlbelaKhatri.com ने कहा…

बहुत ही सुंदर लेख........
जय माता दी........

Pankaj Mishra ने कहा…

आपको भी नवरात्री की शुभकमानाये मिश्रा जी

शिवम् मिश्रा ने कहा…

नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाये |

मीनू खरे ने कहा…

“सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥”

नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाये .

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey ने कहा…

मातृशक्ति को नमन।

Nirmla Kapila ने कहा…

“सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
नवरात्र पर्व की शुभकामनायें आभार इस माँ महिमा के लिये

vandana ने कहा…

navratron ki hardik shubhkamnayein aur lekh ke liye badhayi

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

शारदीय नवरात्रारम्भ की हार्दिक शुभकामनाएं।

देवी माँ आपको सपरिवार सुख समृद्धि प्रदान करें।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

शारदीय नवरात्रारम्भ की हार्दिक शुभकामनाएं।

देवी माँ आपको सपरिवार सुख समृद्धि प्रदान करें।

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाये |

ऋषभ ने कहा…

shaaradeeya navaraatra par mangal kaamanaaen!!!

योगेश स्वप्न ने कहा…

matra shakti ko mera bhi naman.

Udan Tashtari ने कहा…

नवरात्र की मंगल कामनाएँ.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

rupam dehi jayam dehi yasho dehi dwisho jayi.......shubhkamnayen

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

aaiye navratrein bhakton maa ko mana lo,
maa ki sewa kar to sewa ka mewa paa lo !!

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें…। सर्व स्वरूपे सर्वेशे, सर्वशक्ति समन्विते। भयेभयस्त्राहि नो देवि, दुर्गे देवी नमोस्तुते॥ मां भगवति जगत का कल्याण करे…।