आज सुबह सुबह ये गाना सुना " सावन का महिना पवन करे शोर मोरा जियरा ऐसे नाचे जैसे नाचे मोर " तो यह पुराना गाना सुनकर तबियत खुश हो गई की सावन तो आ गया है . पर तबके सावन और अबके सावन के विषय में सोचने को मजबूर हो गया की तबके सावनो में जोरदार बारिश होती थी और तेज हवाए चलती थी और सररर सररर सन्न्न करती हुई खूब शोर किया करती थी . तेज बारिश के बीच झूला झूलने का आनंद ही कुछ और होता था . समय बदलने के साथ साथ लगता है की सावन भी बदल गया है न तेज जोरदार हवाए चलती है और न जोरदार बारिश होती है . अब तो ऐसा आभास होता है की सावन बारिश के वगैर सूना सूना सा है . भविष्य में सावन के महीने में हरियाली का वातावरण बनाने के लिए और जियरा को खुश करने के लिए और मनवा को मोर जैसे नचाने के लिए कहीं कृत्रिम बारिश का सहारा न लेना पड़े. इस सप्ताह कुछ अच्छे चिठ्ठे पढ़ने का मौका मिला जिनका सार इस चर्चा में शामिल कर प्रस्तुत कर रहा हूँ .
कुछ तो समझो दुनिया वालो.
फूलों से खुशबू मत छीनो.
जो गुलशन के हैं मतवाले.
उनको मधुबन से मत छीनो.
मानव नरभक्षी दानव क्यों.
जीने वालों को जीने दो.
शिव देख रहे दो नैनों से.
मत आंख तीसरी खुलने दो.
करनी हमारी - स्तुतिगान इन्द्र देव का मा पलायनम में डॉ.मनोज मिश्र.
बूढ़े,न समझो कूढ़े
इन्साँ कोई बूढ़ा है
मत समझो वह कूढ़ा है
अनुभव उसकी झोली में
ज्ञान है उसकी बोली में
अच्छे और बुरे देखे
बच्चे और बड़े देखे
उसने देखे हैं जीवन में
बहुत मुनाफ़े घाटे.......स्वप्नलोक...पर विवेक सिंह.
अगर तू बूँद स्वाती की, तो मैं इक सीप बन जाऊँ
कहीं बन जाओ तुम बाती, तो मैं इक दीप बन जाऊँ
अंधेरे और नफरत को मिटाता प्रेम का दीपक
बनो तुम प्रेम की पाँती, तो मैं इक गीत बन जाऊँ
तस्वीर ......मनोरमा में श्यामल सुमन.
पहेली - इस तस्वीर को पहचानिये. इस पहेली के नियमों के लिये यहां चटका लगा कर देख लीजिये....ताऊ-भतीजे के चुटकुले ताऊजी .
"वो जिसकी जुबां उर्दू की तरह" ताहम.. में.
कैसेट !! अरे बिरादर !! जितेन्द़ भगत.
एक छलाँग भर दूर है ये फासला ....... संजय व्यास.
"सपने में सजन से दो बातें" : मदनमोहन - २ ...... किस से कहें ? मीत.
मैं आप ही का प्रतिबिम्ब हूं ...सुधा ओम ढींगरा....पिताजी... पर अविनाश वाचस्पति.
सच्चा शरणम् में ...तुम कौन हो ?...हिमांशु.
रचना से रचियेता तक : क्या ब्लॉग लेखन , साहित्य है ? लावण्यम्-अन्तर्मन् में लावण्या जी की दिलचस्प रचना रोचक प्रस्तुति.
बहर तुम टूटी कहाँ - कहाँ...शेर कहा या दोहा ... बात तब की है जब मिथुन चक्रवर्ती हीरो नहीं बने थे, मिथुन चक्रवर्ती को अपने पड़ोस में रहने वाली एक नवयुवती से प्रेम हो गया, समस्या यह थी कि नवयुवती बंगला भाषा से अज्ञान थी इसलिए प्रेम निवेदन थोड़ा कठिन हो रहा था मिथुन के लिए, बहुत सोच समझ कर ..काव्य मंजूषा में अदा जी.
छत्तीसगढ़ द मोस्ट हैप्पेनिंग स्टेट
बीते दिनों में छत्तीसगढ़ में बहुत कुछ हुआ, इन बहुत कुछ होने के दौर में मेरे कुछ अपनों नें मुझे टोका कि क्या बात है इतना कुछ हुआ लेकिन तुम्हारा ब्लॉग खामोश क्यों है। जवाब मेरे पास नहीं था पर मन में कुछ शायद बहुत कुछ चल रहा था....जो कुछ हुआ उसमें बारिश की.....आवारा बंजारा में भाई संजीत त्रिपाठी जी के विचार.
कच्ची धूप, भोला बछड़ा और सयाने कौव्वे .......बर्ग वार्ता में स्मार्ट इंडियन की रोचक प्रस्तुति.
नज़्म- ये शहर छोड़ के गया था जब ......नेपथ्यलीला में वीरेन्द्र जैन.
जिन्दगी चल नहीं रही दौ़ड़ रही है ....वक़्त में.....शान.
ब्लॉगों को ब्लॉक किए जाने पर दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट ...यह बात पची नहीं ?
कभी तो में .......दोहे ....... संजीव गौतम.
फ़िल्म जगत् के आइफा पुरस्कार ...... orld General Knowledge... पर अनिल कान्त जी जानकारी दे रहे है.
सोमरस
उन्होनें कहा ये जो सोमरस है
हलक से नीचे उतार कर देखो
बन जायेगा अमृत थोड़ा-थोड़ा मिलाकर पियो
संस्कृति -विरासत में मनोज गौतम की रचना.
इतिहास बदल सकता है..... आदमी चाहे तो विश्वास बदल सकता है.......ये घटा और ये आकाश बदल सकता है ......डॉ.चन्द्रकुमार जैन की रचना.
उड़न तश्तरी .... इत्ते सारे..बाप रे!! अब समझे इत्ते सारे कहाँ से आ गये ?
'मटककली' का मोहपाश और मटुकनाथ गेट आउट... बहरहाल... पर अभिनव आदित्य.
अनवरत ...... हाथी को ओवरटेक करने का नतीजा ... दिनेशराय द्विवेदी.
एक पहेली एज ये फिलर आईटम ... प्रस्तुतकर्ता : अरविन्द मिश्र. तसलीम.
कर्तव्य निभाने की सज़ा ? राज भाटिया पराया देश में.
संयुक्त अरब अमीरात से अरविन्द ब्यास ने ऑरकुट में ये रचना मुझे प्रेषित की है जो मै प्रस्तुत कर रहा हूँ.
गुरू कबीरा को प्रणाम
शूभ्र शुभ शुभ दिन, चैन पल पल आधीन
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मायामयी मस्ती की पाठशाला
ज्ञान ले ही लो प्यारा निराला
"प्यास" परम हो, पर न हो,
यू ही मधहोश करती, मधुशाला
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भूत भूल मत, तू भूत है
जवाब ले चुका, खतूत है
माया की बस, मार है सारी
अब तक अगर कुछ है जारी
बस "प्यास" की करतूत है ॥
भूत भूल मत, तू भूत है
जवाब ले चुका, खतूत है
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शुभ शुभ दिन, चैन पल पल आधीन
अरविन्द व्यास "प्यास"


19 टिप्पणियाँ:
सुंदर चर्चा!
समय चक्र का यह प्रयास सराहनीय है..
आज भी उम्दा प्रस्तुति..
बधाई हो!!!
बहुत बढिया चर्चा .. सावन के पुराने गीत ही तो सुनने होंगे .. इस वर्ष सावन में बारिश की झडी तो है नहीं .. कि ब्लागवाणी सावन के आलेखों से पटी रहे .. दूसरे आलेखों की ही तो चर्चा करनी पडेगी।
बहुत ख़ूब, बढ़िया पोस्टें पढ़वा रहे हैं!
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पढ़िए: सबसे दूर स्थित सुपरनोवा खोजा गया
वाह बहुत मस्त और श्रावनमयी चर्चा. बहुत धन्यवाद.
रामराम.
सावन का महीना - और बेजोड़ चर्चा की बरसात। वाह महेन्द्र भाई।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
आपकी चर्चा से हमें लिखने का प्रोत्साहन मिलता है .
धन्यवाद !
अच्छी चर्चा-सार।
बहुत सुन्दर चर्चा. ऑरकुट की रचना भी अच्छी लगी.
सावन की रिमझिम और चिट्ठों का चर्चा..
बहुत अच्छा भाई बहुत ही अच्छा..
सावन की रिमझिम और चिट्ठों का चर्चा..
बहुत अच्छा भाई बहुत ही अच्छा..
सावन तो सच में लड़खड़ाया चला करता है अब ।
काफी कुछ पढ़कर उसका सारांश यहाँ रख देते हैं - सब लाभान्वित होते हैं । धन्यवाद ।
अच्छी चर्चा रही. कई नए ब्लाग देखने को मिले. आभार.
आभार इस चर्चा के लिए
बहुत मस्त
बढ़िया चर्चा की आपने, कई मजेदार पोस्ट का लिंक मिला।
धन्यवाद।
सुन्दर ब्लॉग चर्चा........
बहुत बहुत शुक्रिया आपकी टिपण्णी के लिए!
वाह आपका ये पोस्ट बहुत बढ़िया लगा! मज़ा आ गया!
श्री मिश्रा जी,
चर्चा अनुठी लगी, ब्लॉग जगत का व्यापक कव्हरेज और पैना नज़रिया चर्चा को रोचक बना रहा है।
सादर,
मुकेश कुमार तिवारी
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