व्यंग्य - अश्लील गालियो पर ब्लागर्स मीट...
बात बड़ी गंभ्भीर थी सभी ब्लॉगर परेशान थे और वे मिलकर एकजुट होकर चौपाल पर बैठे थे . सभी ब्लॉगर चौपाल की सभागार में अपने चेहरों पे उदासी का भाव लिए मुंह लटकाए बड़े चिंतित दिख रहे थे . चिंता का कारण उनका खुद का व्यक्तिगत नहीं था . बात असल में ये थी की ब्लॉग जगत रूपी तालाब में कुछ गन्दी मछलियां अनाप शनाप गन्दी टीप भेजकर ब्लागजगत के कवि साहित्यकार लेखको की छबी खराब करने की भरसक कोशिश कर रहे है इसको लेकर और टीप चिंतन करने के लिए मंगाई गई थी जिन पर विचार किया जाना था .
एजेंडा था की एक ब्लॉगर को एक अनामी द्वारा खूब अश्लील टिप्पणी भेजी गई और खूब गाली दी गई . जिनको खूब गाली भेजी गई थी और जो महोदय इस दुर्घटना के शिकार हुए थे जिसके कारण उनके दिमाग पर गहरा सदमा पहुंचा था . सबसे पहले उन्होंने बेनामी द्वारा भेजी गई गालियों के बारे में सभी सभासद ब्लागरो को बताया और अपने भाषण में उन्होंने कहा आज गाज मेरे ऊपर गिरी है कल आपके ऊपर गालियों की गाज गिर सकती है अथ समय रहते हम चेत जावे और अपना मुंह लटकाकर बैठ गए. वे भी कम न थे तत्काल सभी बुलाई थी . नए पुराने घिसे पिटे सभी नामी गिरामी ब्लागर्स उपस्थित थे.
एक ने सहानुभूति प्रगट करते हुए कहा भाई मरते दम तक हम सब तुम्हारे साथ है देखते है अब कैसे कोई माई का लाल गाली देता है इस संकट की घधि में हम सब साथ है . एक ने कहा टिप्पणी बॉक्स में माडुरेशन लगा लो अपनी पसंद की टीप सिलेक्ट कर लो और खुश रहो . एक गांधीवादी बोले इस घटना की पुनरावर्ती न हो हमें सत्याग्रह का मार्ग अपनाना चाहिए . चलो सत्याग्रह करेंगे भूख हड़ताल करेंगे तभी एक ब्लॉगर ने कहा रहने दो वो दिन अब गुजर गाये है चलो कलेक्टर एग्रीकेटर को ज्ञापन देंगे .
सभा में तभी एक आवाज आई इन महोदय ने अपने कमेंट्स बॉक्स में गाली भरा कमेंट्स आने ही क्यों दिया . हाल में एक और आवाज गूंजी भाई पिछली बार किसी अनाम मुखौटे ने मेरे ब्लॉग में खूब गन्दी गाली प्रेषित की थी तब किसी ने उनका साथ नहीं दिया था और गन्दी गाली देने वाले के खिलाफ अपनी आवाज किसी ने बुलंद नहीं की थी तब आप लोगो की संम्वेदना कहाँ चली गई थी.. तभी एक समीक्षा करने वाले ने ऊँचे स्वर में कहा गाली इनको दी यह उनका व्यक्तिगत मामला है हमें क्या लेना देना है . सभी ने उनके स्वर में स्वर मिला दिए . तभी एक व्यंग्यकार ने कहा क्यों न हम गाली ही न दें और इसका खात्मा कर दे न गाली रहेगी और न गाली देने वाले गंदे लोग रहेंगे. इस विषय पर जितने लोग थे उतनी तरह तरह की बाते ब्लागरो के बीच हो रही थी
सभा में तो भरी गर्मागर्मी थी पर सभा से जाने के बाद सभी ब्लागर्स अपने अपने घरो में अपने अपने ब्लॉग देख रहे रहे थे की किसी बेनामी ने उन्हें गाली भरी टीप तो प्रेषित नहीं कर दी है उन्हें यह डर सता रहा था और भविष्य में भी सताता रहेगा.
इस पर मेरा कहना - अभी हाल में बेनामी और मुखौटे लगाये कुछ गंदे लोगो द्वारा लगातार चरित्र हनन करने के उद्देश्य से ब्लागरो के ब्लागों में अश्श्लील टिप्पणी भेजे जाने का दौर लगातार जारी है जिस पर सभी को विचार करना चाहिए . बेनामी गन्दी टिप्पणियों से ब्लाग जगत का सागर गन्दा हो रहा है . साहित्यकारों कवि लेखको के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और हिंदी भाषा की आन बान शान और गरिमा विश्व स्तर पर प्रभावित हो रही है . हमें बेनामी टिप्पणीकारों को पकड़ कर उन्हें सबक सिखाना होगा . ऐसे अवांछित तत्वों का हर हाल में विरोध किया जाना चाहिए और उनका बहिष्कार किया जाना चाहिए . आधुनिक आई टी. के युग में अवांछित तत्वों को पकडा जाना कठिन नहीं है इस पर भी ब्लागजगत में कार्य किये जाने चाहिए.
सौजन्य से - जय हिंदी भाषा
साभार- तीसरी आंख
बात बड़ी गंभ्भीर थी सभी ब्लॉगर परेशान थे और वे मिलकर एकजुट होकर चौपाल पर बैठे थे . सभी ब्लॉगर चौपाल की सभागार में अपने चेहरों पे उदासी का भाव लिए मुंह लटकाए बड़े चिंतित दिख रहे थे . चिंता का कारण उनका खुद का व्यक्तिगत नहीं था . बात असल में ये थी की ब्लॉग जगत रूपी तालाब में कुछ गन्दी मछलियां अनाप शनाप गन्दी टीप भेजकर ब्लागजगत के कवि साहित्यकार लेखको की छबी खराब करने की भरसक कोशिश कर रहे है इसको लेकर और टीप चिंतन करने के लिए मंगाई गई थी जिन पर विचार किया जाना था .
एजेंडा था की एक ब्लॉगर को एक अनामी द्वारा खूब अश्लील टिप्पणी भेजी गई और खूब गाली दी गई . जिनको खूब गाली भेजी गई थी और जो महोदय इस दुर्घटना के शिकार हुए थे जिसके कारण उनके दिमाग पर गहरा सदमा पहुंचा था . सबसे पहले उन्होंने बेनामी द्वारा भेजी गई गालियों के बारे में सभी सभासद ब्लागरो को बताया और अपने भाषण में उन्होंने कहा आज गाज मेरे ऊपर गिरी है कल आपके ऊपर गालियों की गाज गिर सकती है अथ समय रहते हम चेत जावे और अपना मुंह लटकाकर बैठ गए. वे भी कम न थे तत्काल सभी बुलाई थी . नए पुराने घिसे पिटे सभी नामी गिरामी ब्लागर्स उपस्थित थे.
एक ने सहानुभूति प्रगट करते हुए कहा भाई मरते दम तक हम सब तुम्हारे साथ है देखते है अब कैसे कोई माई का लाल गाली देता है इस संकट की घधि में हम सब साथ है . एक ने कहा टिप्पणी बॉक्स में माडुरेशन लगा लो अपनी पसंद की टीप सिलेक्ट कर लो और खुश रहो . एक गांधीवादी बोले इस घटना की पुनरावर्ती न हो हमें सत्याग्रह का मार्ग अपनाना चाहिए . चलो सत्याग्रह करेंगे भूख हड़ताल करेंगे तभी एक ब्लॉगर ने कहा रहने दो वो दिन अब गुजर गाये है चलो कलेक्टर एग्रीकेटर को ज्ञापन देंगे .
सभा में तभी एक आवाज आई इन महोदय ने अपने कमेंट्स बॉक्स में गाली भरा कमेंट्स आने ही क्यों दिया . हाल में एक और आवाज गूंजी भाई पिछली बार किसी अनाम मुखौटे ने मेरे ब्लॉग में खूब गन्दी गाली प्रेषित की थी तब किसी ने उनका साथ नहीं दिया था और गन्दी गाली देने वाले के खिलाफ अपनी आवाज किसी ने बुलंद नहीं की थी तब आप लोगो की संम्वेदना कहाँ चली गई थी.. तभी एक समीक्षा करने वाले ने ऊँचे स्वर में कहा गाली इनको दी यह उनका व्यक्तिगत मामला है हमें क्या लेना देना है . सभी ने उनके स्वर में स्वर मिला दिए . तभी एक व्यंग्यकार ने कहा क्यों न हम गाली ही न दें और इसका खात्मा कर दे न गाली रहेगी और न गाली देने वाले गंदे लोग रहेंगे. इस विषय पर जितने लोग थे उतनी तरह तरह की बाते ब्लागरो के बीच हो रही थी
सभा में तो भरी गर्मागर्मी थी पर सभा से जाने के बाद सभी ब्लागर्स अपने अपने घरो में अपने अपने ब्लॉग देख रहे रहे थे की किसी बेनामी ने उन्हें गाली भरी टीप तो प्रेषित नहीं कर दी है उन्हें यह डर सता रहा था और भविष्य में भी सताता रहेगा.
इस पर मेरा कहना - अभी हाल में बेनामी और मुखौटे लगाये कुछ गंदे लोगो द्वारा लगातार चरित्र हनन करने के उद्देश्य से ब्लागरो के ब्लागों में अश्श्लील टिप्पणी भेजे जाने का दौर लगातार जारी है जिस पर सभी को विचार करना चाहिए . बेनामी गन्दी टिप्पणियों से ब्लाग जगत का सागर गन्दा हो रहा है . साहित्यकारों कवि लेखको के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और हिंदी भाषा की आन बान शान और गरिमा विश्व स्तर पर प्रभावित हो रही है . हमें बेनामी टिप्पणीकारों को पकड़ कर उन्हें सबक सिखाना होगा . ऐसे अवांछित तत्वों का हर हाल में विरोध किया जाना चाहिए और उनका बहिष्कार किया जाना चाहिए . आधुनिक आई टी. के युग में अवांछित तत्वों को पकडा जाना कठिन नहीं है इस पर भी ब्लागजगत में कार्य किये जाने चाहिए.
सौजन्य से - जय हिंदी भाषा
साभार- तीसरी आंख


20 टिप्पणियाँ:
नेक खयाल हैं मिश्र जी और इसमें मुझे भी साथ समझिये।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
लेख तो बड़ा दिलचस्प है
बड़ी भीषण ब्लॉगर्स मीट की परिकल्पना है भाई!! बेहतरीन!!
चेत तो जाना ही चाहिये सभी को!!
बिलकुल सही कहा आपने...पर गाँधीगीरी में दम तो है...जैसे 'लगे रहो मुन्ना भाई' में दिखाया था...आजमाने में क्या हर्ज है
achchha likhe hai mishra jee.
दिलचस्प विचार है
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विज्ञान । HASH OUT SCIENCE
बहुत सुंदर मिश्रा जी, लेकिन सिर्फ़ साबधान होने से काम नही चलेगा, इसे पकडना जरुरी है, ओर वो भी सबूत समेत... ओर वो दिन द्रुर नही....
धन्यवाद आप के लेख का
मै आपके साथ हूं महेन्द्र भैया।
जब कोई नेक कम के लिए आगे बढ़ता है तो हमें उसका साथ देना चाहिए न की मुह फेर के निकल जाना चाहिए ....???
ऐसे कार्यों की जीतनी भत्सना की जाये कम है .....!
हम आपके साथ हैं ....!!
समय रहते इसका उपाय नही खोजा गया तो आगे ये नासूर बनने वाला है.
रामराम.
रोचक मामला है।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
दिलचस्प लेख...........
हमारा विचार है कि आप इन्हें गम्भीरता से नहीं ले रहे हैं इसीलिए लगातार इन्हें भाव देते जा रहे हैं .
जरा सोचिए पानी में पत्थर फेंकने वाला किसलिए पत्थर फेंकता है , इसीलिए न कि पानी में विक्षोभ होगा . और होता भी है . लेकिन कल्पना करिये कि पत्थर फेंकने वाले को पत्थर फेंकने के बाद पता चले कि जहाँ उसने पत्थर फ़ेंका है वहाँ दरअसल पानी है ही नहीं , सिर्फ़ पानी होने का भ्रम हो रहा था और पत्थर जमीन पर जा गिरा फ़लस्वरूप कोई विक्षोभ उत्पन्न नहीं हुआ जिसे देखने की लालसा से उसने पत्थर फ़ेंका था, तो वह दोबारा पत्थर कदापि न फ़ेंकेगा . क्योंकि ऐसा करने से उसके साथी ही उसे मूर्ख बताएंगे .
इसलिए हमारी राय यही है कि ऐसे तत्वों को भाव न दिया जाय . यही इनका इलाज है .
आगे आप स्वयं समझदार हैं ही !
धन्यवाद !
इनकी उपेक्षा ही इनका इलाज है
आपका कहना बिल्कुल सही है.. गंदगी को हटाकर ब्लॉगजगत को साफ़ करना हर ब्लॉगर का दायित्व होना चाहिए.. हम एक हो जाएं तो यह ब्लॉग आतंकवाद ज्यादा दिन नहीं टिक सकता.. आभार
आपका कहना बिल्कुल सही है.. गंदगी को हटाकर ब्लॉगजगत को साफ़ करना हर ब्लॉगर का दायित्व होना चाहिए.. हम एक हो जाएं तो यह ब्लॉग आतंकवाद ज्यादा दिन नहीं टिक सकता.. आभार
मै भी आपके साथ हूं महेन्द्र जी
मुझे यह प्रतीत होता है कि
इस तरह का किसी व्यक्ति या
व्यक्ति समूह के इशारे पर होती
है
बहुत ही बढ़िया व जगाऊ लेख धन्यवाद .
मिश्र जी ,
सोच सराहनीय है. बधाई
bahut achchhi shuruaat.
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आपका ब्लॉग समयचक्र में हार्दिक स्वागत है आपकी अभिव्यक्ति से मेरा मानसिक मनोबल बढ़ता है .