12.11.16

देशहित में मुद्रा का विमुद्रीकरण क्या उचित है ...

हमारे देश में मुद्रा परिवार सत्रह माई बाप खसम की फेमिली का परिवार है जिनको धकापेल निकाला तो गया पर कभी बदला नहीं गया बंद नहीं किया गया | पहले 38 साल पहले एक हजार का नोट बदला गया था उसके बाद अभी पांच और एक हजार के पुराने नोट बंद कर नये नोट जारी कर मुद्रा का विमुद्रीकरण किया गया है ।

हमारे देश में पांच रुपये के सिक्के दस रुपये के सिक्के और 1,2, 5 रुपये के और 10, 20,50,100, 500,1000 रुपये के नोटों का मुद्रा के रूप में चलन है कई रुपये तो आजादी के बाद से अभीतक चलायमान हैं जिसका भरपूर फायदा कालेधन इकठ्ठा करने वालों ने खूब उठाया उन्हें मालूम था कि मुद्रा के रूप में ये नोट कभी बंद नहीं होंगें और बदले नहीं जायेंगें तो मनमर्जी से कानून की नजर बचाकर ये लोग रुपये इकठ्ठा करते रहे और देश की असल पूँजी इनके पास कैद हो गई जिससे देश में व्यापार भी प्रभावित होते रहे और बेरोजगारी भी बढती रही विकास कार्य ठप्प रहे ।

जब देश में कालाधन इकठ्ठा होने लगता है तो व्यापाऱ और रोजगार पर भी उसका प्रभाव पड़ता है और अर्थ व्यवस्था के लिए खतरा बन जाते हैं तब सरकार पुरानी मुद्रा को बंद कर देती है जिससे काले धन वालों का काफी नुकसान हो जाता है और वह नष्ट हो जाती है जैसाकि अभी देखने को मिल रहा है पढ़ रहे है । किसी ने बताया कि विदेशों में मुद्रा का बार बार विमुद्रीकरण किया जाता है जिससे वहां लोगबाग कालाधन का संग्रह नहीं कर पाते हैं और नकली नोट पूँजी भी बाजार में नहीं चल पाती है ।

काश हमारे देश में गत 60 सालों में विमुद्रीकरण की नीति पर बार बार अमल किया जाता तो देश और देश के लोगों का देश और विदेशों में इतना काला धन जमा न हो पाता और नकली नोट चलाने वाले सक्रिय न हो पाते ... साथ ही यह कोई बतायेगा कि जैसे हमारे देश में पांच रुपये के सिक्के दस रुपये के सिक्के और 1,2, 5 रुपये के और 10, 20,50,100, 500,1000 रुपये के नोटों का मुद्रा के रूप में चलन है क्या हमारे देश की तरह की तरह डॉलर,येन भी फुटकर नोट और सिक्के के रूप में मिलते हैं और क्या इनका समय समय पर विमुद्रीकरण नहीं किया जाता है ?

6.7.16

मेरा फोटोग्राफी का शौक : तब और अब

एक समय बचपन में यदि कोई फोटोग्राफर फोटो खींचता था तो मैं उसे और उसके कैमरे को बड़े ध्यान से देखता था । उस समय बॉक्सनुमा कैमरा होता था । कैमरे में आगे लैंस लगा होता था और उस बॉक्स के पीछे एक काला कपड़ा लगा होता था फोटो खींचते समय फोटोग्राफर बॉक्स के अंदर अपना सिर घुसेड़ लेता और अपना सिर काले कपडे से ढँक लेता था और उस बॉक्स के पीछे खड़े होकर फोटो खींचता था । यह सब देखकर मन में बड़ी इच्छा होती थी कि मैं भी कभी फोटो खींचूंगा । पास में कैमरा नहीं था तो बचपन में फोटो खींचने का मौका नहीं मिला । नौकरी में आने के बाद सन् 1982 में करीब 34 साल पहले अपनी हैसियत के अनुसार हॉट शॉट - 110 कैमरा लिया था ।

फोटोग्राफी सिखाने के लिए कोई गुरु नहीं था बस अंधाधुंध फोटो लेना शुरू कर दिया था और इतना भी तरीका नहीं था कि सूर्य के सामने कैमरे की आँख कर फोटो नहीं ली जाती । उस समय कैमरे में 110 एमएम की रील लगती थी जिसमें करीब 22 फोटो खींच सकते थे । कैमरे से फोटो तो खींच लेता था पर फोटो का रिजल्ट फोटो की धुलाई करवाने के बाद नेगेटिव और फोटो के प्रिंट निकलवाने के बाद ही पता चलता था कि फोटो अच्छी या खराब आई हैं । मार्केट में कैमरे की रील खरीदने और फिर उसको धुलवाने के लिए भागदौड़ करना पड़ती थी । उस समय के हिसाब से कैमरे की रील और उसकी धुलवाई और प्रिंट निकलवाना थोड़ा मंहगा लगता था और फोटो खराब निकल आने पर मन भी खराब हो जाता था ।

 फोटो - हॉट शॉट कैमरा - 110 एमएम

फोटो - हॉट शॉट कैमरा - 110 एमएम

एक दिन लगा कि फोटो खींचना अपने बस की बात नहीं है तो अपने इस कैमरे को घर के संग्रहालय में सुरक्षित रख दिया था । आज इसे देख कर 34 वर्ष पुरानी यादें तरोताजा हो गई ।

सन् 2003 में इंटरनेट में ऑरकुट की प्रोफाइल बनाई थी और उसमें और हिंदी ब्लॉग में फोटो अपलोड करने के लिए फिर से फोटोग्राफी का शौक जाग उठा और फोटो अपलोड करने के लिए मोबाईल का सहारा लेना शुरू कर दिया था । फोटोग्राफी के साथ वीडियो बनाना सीखा फिर करीब 150 यू टूयूब अपलोड की ।

समय बदलने के साथ साथ अब एक से एक डिजिटल कैमरे मार्केट  में आ गए हैं जिनमें फोटो खींचने के बाद तुरंत फोटो देख लेने की सुविधायें भी दी गई हैं और अपनी फोटो डेटा केबिल के माध्यम से सीधे अपलोड कर सकते हैं । थ्री जी मोबाईल के माध्यम से आप अपनी फोटो और वीडियो को किसी भी स्पॉट से सोशल साइड में अपलोड कर सभी को दिखा सकते हैं । आजकल मोबाइलों में अधिकाधिक मेगापिक्सल के कैमरे आ रहे हैं जिनसे बढ़िया फोटो ली जा सकती है और इनके माध्यम से वर्ल्ड वेब साइड में किसी भी स्पॉट से किसी भी कार्यक्रम के अच्छे वीडियो का लाइव वेब कास्टिंग (सीधा प्रसारण) कर सकते हैं ।

उस दौर के कैमरे और आज के दौर के कैमरों में काफी अंतर आ गया आया है और अब फोटोग्राफी सहजता और सुगमता के साथ की जा सकती है । न रील खरीदने की झंझट न प्रिंट निकलवाने की झंझट है और तुरंत ही कैमरे में फोटो देख लो । उस दौर की फोटोग्राफी और कैमरे देख कर मन आज भी खट्टा हो जाता है कि एक फोटो के लिए कितनी मसक्कत भागदौड़ करना पड़ती थी । इंटरनेट से जुड़ने के बाद से मेरा फोटोग्राफी का शौक सबसे पसंदीदा शौक बन गया है और इसके कारण मेरा समय भी बढ़िया कट जाता है और जहाँ कहीं भी जाता हूँ तो फोटो खींच लेने का मोह नहीं छोड़ पाता हूँ । 

29.6.16

... देश में राजनेता राजा और साधु-संत महाराजा ...


किसी समय राजबाड़ा और देश का राजा ही सर्वोच्च होता था और प्रजा को उसके हर आदेश का पालन करना पड़ता था । राजा को यह अधिकार होता था कि वो जो भी कहें जनता उसे माने यदि जनता राजा के आदेशों का पालन नहीं करती थी तो राजा को अधिकार होता था कि उसे दंड दें और जनता को राजा के आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य करें । राजा देश का खर्चा चलाने के लिए जनता से टैक्स और लगान वसूल करता था और उसे अपनी मनमर्जी से खर्च करता था चाहे देश की जनता का भला हो या न हो ।

आज देश में राजनेता ही राजा हैं वे जो कुछ चाहते हैं वही कर रहे हैं चाहे जनता के साथ साथ विपक्ष ही उनका प्रबल विरोध क्यों न करें । देश में दिनोंदिन मंहगाई बढती जा रही है पर हमारे देश के कर्णधार फर्जी आंकड़े प्रस्तुत कर जनता को गुमराह कर बता रहे हैं कि मंहगाई बिल्कुल नहीं बढ़ी है और हमारा देश विकास कर रहा है और जनता मंहगाई के कारण कारण त्राहि त्राहि कर रही है । अब तो आरबीआई भी सरकार को सलाह दे रही है कि खाने पीने की सामगी में निरन्तर बढ़ोतरी होने के कारण अधिकाधिक मंहगाई बढ़ गई है अब आगे देखने वाली बात होगी कि आरबीआई की सलाह पर हमारे देश के कर्णधार राजनेता नेता जनता के हित में मंहगाई घटाने हेतु क्या कार्यवाही करते हैं या नहीं ये अब उनकी मर्जी ।

जनता भी अब जानने लगी है कि उनकी गाडी कमाई से उलजुलूल टैक्स वसूल कर नेतागण अपनी मर्जी से खर्च कर रहे हैं । कोई नेता देश की रकम को विदेश में दान कर अपनी लोकप्रियता बढ़ाने का प्रयास कर वाहवाही लूट रहा है तो कोई जनता की गाढ़ी कमाई को बुलेट ट्रैन सेमी बुलेट ट्रैन चलाने के नाम पर फूंक देने को आमादा है जैसे नेताजी की कमाई की रकम हो या उनकी कोई खानदानी रकम हो । देश की जनता की रकम को दूसरे देश को दान करने से या देश में मंहगी बुलेट ट्रैन चलाने से आम जनता को कोई फायदा नहीं होने वाला है।  मंहगाई के कारण जनता की दिनोदिन आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है।  देश के लोकतांत्रिक राजाओं के कारण देश में अमीर दिनोदिन अमीर होता जा रहा है और गरीब दिनोदिन गरीब होता जा रहा है ।

इसी तरह देश के साधु संत भी राजे महाराजाओं की तरह रहने लगे हैं । देश में धार्मिक प्रवृत्ति के अधिकतर लोगबाग रहते हैं उसका फायदा आजकल के साधु संत उठा रहे हैं । कभी जनता से परिक्रमा कराने के नाम से तो कभी गौ सेवा की नाम पर तो कभी विश्व का सबसे बड़ा मंदिर बनाने के नाम पर धर्मभीरू जनता से ये महाराजे साधु संत लंबी लंबी रकमें ऐंठा करते हैं और धर्म के नाम पर जनता को उल्लू बना रहे है। ये साधु संत खुद ऐसी लकदक गाड़ियों में घूमते हैं और इनका खानपान भी ऊँचे स्तर  का होता है। कोई बादाम का हलुआ खाता है तो कोई मलमल के बिस्तर पर सोता है और देश विदेश में जनता के चंदे से हवाई यात्राएं करते हैं । आजकल के साधु - संतों के रहन सहन का स्तर राजे महाराजों से कम नहीं है इनके करोड़ों के ट्रस्ट हैं जिसके मालिक ये खुद हैं और ये चाहें तो किसी क्षेत्र को गोद  में लेकर उसका उद्धार करा सकते हैं ।

हमारे देश की जनता का दुर्भाग्य है कि देश की जनता से वोट बटोरने की राजनीति कर राजनेताओं ने और धर्म के नाम पर प्रचार प्रसार करने के नाम पर इन साधु संत राजे महाराजों ने खूब जी भर कर छला और लूटा है जिसका खामियाजा आम जनता जी भरकर भुगत रही है और खूब उल्लू बन रही है ।

@ महेन्द्र मिश्र, जबलपुर  ..

27.6.16

गबरु का मोबाईल सेल्फी सुख ...


एक गांव में गवरु नाम का कम पढ़ा लिखा एक नवयुवक रहता था ।  एक बार किसी काम से शहर गया था तो शहर के लड़कों ने उसे मोबाईल  का चस्का लगा दिया । गबरु घर की खेतीबाड़ी का कामधाम छोड़कर मोबाईल से दिनरात खेलता रहता था ।

 किसी ने उसके मोबाईल में एक सोशल साइड  की एप्लिकेशन अपलोड कर दी और उसे फोटो अपलोड करना और सेल्फी फोटो लेना सिखा दिया फिर क्या था गबरु जैसे पागल सा हो गया था ।  वह जहाँ भी जाता तो एक दो ठो फोटो खींचता था । कभी सड़क पर तो कभी रेलवे की पटरियों में खड़ा होकर तो कभी नदी नालों के किनारे फोटो खींचता और मन ही मन अपनी फोटो देख कर खूब खुश होता कि मैं जब इन फोटो को सोशल साइड में डालूंगा तो खूब लाइक कमेंट्स मिलेगें और मैं सारी दुनिया में छा जाऊंगा ।

एक दिन गाँव की मलकाईन जाति की ठकुराइन बीच बाजार में लाला की दुकान में खड़ी थी  वह बहुत सुँदर थी जिसे देख कर लोगबाग हैरत में अपने दांतों तले अपनी उंगलियां चबा डालते थे।  गबरु ने ठकुराइन को देखा तो बस उसे देखता रह गया तुरंत उसके मन में आया कि ठकुराइन के किनारे में जाकर बस एक सेल्फी ले लूँ तो खूब वाहवाही मिलेगी और लोगबाग गबरु की खूब तारीफ करेगें और उसकी जोरदार पीठ ठोकेंगे । बस फिर क्या था गबरु लाला की दुकान दौड़कर पहुँच गया और मलकाईन के बाजू में खड़े होकर अपना मोबाईल लेकर अपना हाथ मलकाईन के चेहरे के सामने किया तो उसी समय किसी ने पीछे से गबरु के पिछवाड़े में जोरदार ठोकर मारी जिससे गबरु गिर गया फिर कुछ लोग लट्ठ लेकर उसके ऊपर टूट पड़े जिससे गबरु बेहोश हो गया ।

होश आने पर गबरु ने खुद को हॉस्पिटल में पड़े देखा और उसके हाथ पाँव और कमर में प्लास्टर चढ़ा था । गबरू जिस पलंग में  लेटा था उसके सामने एक स्टैंड रखा था जिसमें ग्लुकोस की बोतल लटकी थी जिससे गबरू को सीरिंज के द्वारा ग्लुकोस दी जा रही थी । ग्लुकोस की बोतल देख कर गबरू को लगा कि मोबाईल से उसकी इस दशा में  सेल्फी खींची जा रही है वह जोर जोर से दर्द से चींखने चिल्लाने लगा कि मेरी सेल्फी मत लो इसी सेल्फी की वजह से मेरी यह दुर्दशा हो गई है और वह जोर जोर से रोने लगा कि मलकाईन के साथ सेल्फी न लेता तो इतनी प्रसिद्धि उसे  सोशल मीडिया साइड में  न मिलती जितनी उसे अभी मिल रही है ।

थोड़ी देर बाद उसके मोबाईल की लोकेशन ट्रेस कर पुलिस हॉस्पिटल पहुंच गई ओर उसे लाला की दुकान में ठकुराईन से छेड़ छाड़ करने के आरोप में  गिरफ्तार कर कोतवाली ले गई ।

आजकल गबरु जेल की सलाखों के पीछे बैठकर सेल्फी का भरपूर आनंद ले रहा है ...

_महेन्द्र मिश्रा, जबलपुर_