गरूवार की चिट्ठी चर्चा लेकर आज हम आपके सामने हाजिर हो रहा है, आज सबसे पहले मायाजाल की ओर आपके ले चल रहा हूँ जहाँ पर भारत के धाकड़ और प्रशिद्ध ब्लागरो में एक सुरेश भाई चिपलूकर जी ने दया के मसीहा करूणानिधि की पहली किस्त जारी की है।
वही अपने राकेश जी ने सनसनी खेज खुलासा कर सबको स्तब्ध कर दिया कि हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन, हिन्दुओं के पैसे से ..... वाकईये बात बहुत ही अपत्ति जनक है कि सरकार ऐसे कामों को रोकने के बाजय प्रोत्साहन दे रही है।
वही संगीता पुरी जी अपने ब्लाग में हमारे धार्मिक ग्रंथों के पात्र और घटनाएं वास्तविक हैं या फिर काल्पनिक ?? शीर्षक से धर्म की व्याख्या करती हुई दिखती है।
दूसरी ओर कुछ-कुछ भी ब्लाग पर ब्लाग बैठकी के दौर में कौन कहता है ये आभासी दुनिया है ,दिल्ली में ब्लौग बैठकी के बहाने, से चर्चा हो रही है और ब्लागर मिल रहे है और कहीं किसी के दिल जल रहे है।
महफूज भाई को आज से कई साल पहले उनके पिताजी ने याद दिलाया कि साला! मालूम कैसे चलेगा कि मुसलमान है? और आज वो यही बात याद कर रहे है।
वही नारी ब्लाग में नारी नारी समझने के लिये विवाह की अनिवार्यता पर प्रश्न करते हुये कहा जा रहा है कि क्या शादी आज भी एक जरुरी चीज़ हैं औरत को औरत समझे जाने के लिये । वही नारी के अन्य रूप के दर्शन मां बनिए या फाइटर पायलट के रूप में नुक्कड़ पर देखने को मिला। वही हमारी मौसी बासूती जी मुझे आओ खेलें खेल का लालच देकर रिझाने की कोशिश कर रही है।
वही हिन्दी साहित्य मंच आशा में निराशा की किरण लेकर आ रहा असफलता और निराशा में सफलता व आशा का दर्शन करें, इसी बीच प्रतिवाद ब्लाग पर अश्लीलता और आंखें देखने को मिली सोचे जा रहा हँ क्या देखूँ ।
प्यार के दर्द को समझ न पाये और कविता लिख दिया पर तब तक बुजदिली का अहसास हुआ "नेक्स्ट स्टॉप दिल्ली".. से माफी !!! मॉंग ली पर ये ठीक नही था, प्यार कर डटकर सामना करना था।
ललित जी अपने ब्लाग पर "शिल्पकार का 100 पोस्ट का सफ़र" की घोषण की बधाई की बौझार चालू हो गई और हमारी तरफ से भी बहुत बहुत बधाई, बधाई के चर्चा के बीच राजतंत्र ब्लाग पर एक दु:खद समाचार मिला कि सड़क हादसे में चार खिलाडिय़ों की मौत से खेल बिरादरी सकते में यह देश की बहुत बड़ी छति है।
पचासवीं पोस्ट और मेरी पहली कहानी..."उन्माद की उड़नतश्तरी" की उडान को कौन रोक सकता है हम भी इसी दौर से गुजरे है। चंदन जी अपने ही किस्से में नोएडा से चलनेवाली मेट्रो के क़िस्से को जोड़ दिये। भई अब हँसे की रोये या सद्भावना व्यक्त करे जब “बोरोप्लस” निकली “वोलिनी” देख कर लगाना था।
मै काफी दिनो से 10 रूपये का सिक्का खोज रहा था वो मुझे मिल गया इतनी खुशी मुझे जब नही जब खुशदीप जी को 1 रूपये का का सिक्का मिलने से हुई और उन्होने एक पूरी पोस्ट ही लिख डाली कि मिल ही गया एक रुपया
कृतीश भाई ने सचिन केनाम बिल भेजा बाल ठाकरे को अच्छा हुआ सम्मन नही भेजा।
हमारे गुरू जी अधिवक्ता श्री द्विवेदी जी ने एक सही न्याय व्यवस्था के लिए भी इंकलाब से ही गुजरना पड़ेगा की बात कही है बिल्कुल सही है क्योकि कानून की परिकल्पना गरीबो के लिये ही है पर आज गरीबो को ही न्याय के लिये भटकना पड़ रहा है।
आज सुबोध राय तथा गिरीन्द्रनाथ झा का जन्मदिन है दोनो को बहुत बहुत बधाई
वही जबलपुर ब्रिगेट में आचार्य सलिल जी तेवरी के तेवर दिखा रहे है। और मंत्रियों की शाहखर्ची पर लगाम ज़रूरी बात है यह कह रहे है शेष नारायण सिंह जी वकाई गरीबो का पैसा नेताओ के भोग के लिये क्या हो ?
अलबेला जी ने विवेकानंद जी की ब्रह्मवाणी "धर्म सम्बन्धी झगड़े सदैव खोखली और असार बातों पर ही होते हैं" के रूप में प्रस्तुत किया और अंत में हमने खुद कल भारतीय नारियो के सम्बन्ध में लिख था कि “ नारी ” तू हैं बड़ी महान।
कुछ को साथ ले पाया कुछ को नही, आपके स्नेह के साथ आज की चर्चा यहीं खत्म करना हूँ, फिर मिलेगे अगले बृहस्पतिवार को, तब के लिये वंदेमातरम्।


