19.11.09

चिट्टी चर्चा - आज सिर्फ महाशक्ति का वार

गरूवार की चिट्ठी चर्चा लेकर आज हम आपके सामने हाजिर हो रहा है, आज सबसे पहले मायाजाल की ओर आपके ले चल रहा हूँ जहाँ पर भारत के धाकड़ और प्रशिद्ध ब्‍लागरो में एक सुरेश भाई चिपलूकर जी ने दया के मसीहा करूणानिधि की पहली किस्‍त जारी की है।

वही अपने राकेश जी ने सनसनी खेज खुलासा कर सबको स्‍तब्‍ध कर दिया कि हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन, हिन्दुओं के पैसे से ..... वाकईये बात बहुत ही अपत्ति जनक है कि सरकार ऐसे कामों को रोकने के बाजय प्रोत्‍साहन दे रही है।

वही संगीता पुरी जी अपने ब्‍लाग में हमारे धार्मिक ग्रंथों के पात्र और घटनाएं वास्‍तविक हैं या फिर काल्‍पनिक ?? शीर्षक से धर्म की व्याख्‍या करती हुई दिखती है।

दूसरी ओर कुछ-कुछ भी ब्‍लाग पर ब्‍लाग बैठकी के दौर में कौन कहता है ये आभासी दुनिया है ,दिल्ली में ब्लौग बैठकी के बहाने, से चर्चा हो रही है और ब्‍लागर मिल रहे है और कहीं किसी के दिल जल रहे है।

महफूज भाई को आज से कई साल पहले उनके पिताजी ने याद दिलाया कि  साला! मालूम कैसे चलेगा कि मुसलमान है? और आज वो यही बात याद कर रहे है।

वही नारी ब्‍लाग में नारी नारी समझने के लिये  विवाह की अनिवार्यता पर प्रश्‍न करते हुये कहा जा रहा है कि क्‍या शादी आज भी एक जरुरी चीज़ हैं औरत को औरत समझे जाने के लिये । वही नारी के अन्‍य रूप के दर्शन मां बनिए या फाइटर पायलट के रूप में नुक्कड़ पर देखने को मिला। वही हमारी मौसी बासूती जी मुझे आओ खेलें खेल का लालच देकर रिझाने की कोशिश कर रही है।

वही हिन्‍दी साहित्‍य मंच आशा में निराशा की किरण लेकर आ रहा असफलता और निराशा में सफलता व आशा का दर्शन करें, इसी बीच प्रतिवाद ब्‍लाग पर अश्लीलता और आंखें देखने को मिली सोचे जा रहा हँ क्‍या देखूँ ।

प्‍यार के दर्द को समझ न पाये और कविता लिख दिया पर तब तक बुजदिली का अहसास हुआ "नेक्स्ट स्टॉप दिल्ली".. से माफी !!!  मॉंग ली पर ये ठीक नही था, प्‍यार कर डटकर सामना करना था।

ललित जी अपने ब्‍लाग पर "शिल्पकार का 100 पोस्ट का सफ़र" की घो‍षण की बधाई की बौझार चालू हो गई और हमारी तरफ से भी बहुत बहुत बधाई, बधाई के चर्चा  के बीच राजतंत्र ब्‍लाग पर एक दु:खद समाचार मिला कि सड़क हादसे में चार खिलाडिय़ों की मौत से खेल बिरादरी सकते में यह देश की बहुत बड़ी छति है।

पचासवीं पोस्ट और मेरी पहली कहानी..."उन्माद की उड़नतश्तरी" की उडान को कौन रोक सकता है हम भी इसी दौर से गुजरे है। चंदन जी अपने ही किस्‍से में नोएडा से चलनेवाली मेट्रो के क़िस्से को जोड़ दिये। भई अब हँसे की रोये या सद्भावना व्‍यक्‍त करे जब “बोरोप्लस” निकली “वोलिनी” देख कर लगाना था।

मै काफी दिनो से 10 रूपये का सिक्‍का खोज रहा था वो मुझे मिल गया इतनी खुशी मुझे जब नही जब खुशदीप जी को 1 रूपये का का सिक्का मिलने से हुई और उन्‍होने एक पूरी पोस्‍ट ही लिख डाली कि मिल ही गया एक रुपया

कृतीश भाई ने सचिन केनाम बिल भेजा बाल ठाकरे को अच्‍छा हुआ सम्‍मन नही भेजा।

हमारे गुरू जी अधिवक्ता श्री द्विवेदी जी ने एक सही न्याय व्यवस्था के लिए भी इंकलाब से ही गुजरना पड़ेगा की बात कही है बिल्‍कुल सही है क्‍योकि कानून की परिकल्‍पना गरीबो के लिये ही है पर आज गरीबो को ही न्‍याय के लिये भटकना पड़ रहा है।

आज सुबोध राय तथा गिरीन्द्रनाथ झा का जन्मदिन है दोनो को बहुत बहुत बधाई

वही जबलपुर ब्रिगेट में आचार्य सलिल जी तेवरी के तेवर दिखा रहे है।  और मंत्रियों की शाहखर्ची पर लगाम ज़रूरी बात है यह कह रहे है शेष नारायण सिंह जी वकाई गरीबो का पैसा नेताओ के भोग के लिये क्‍या हो ?

अलबेला जी ने विवेकानंद जी की ब्रह्मवाणी "धर्म सम्बन्धी झगड़े सदैव खोखली और असार बातों पर ही होते हैं" के रूप में प्रस्‍तुत किया और अंत में हमने खुद कल भारतीय  नारियो के सम्‍बन्‍ध में लिख था कि “ नारी ” तू हैं बड़ी महान

कुछ को साथ ले पाया कुछ को नही, आपके स्‍नेह के साथ आज की चर्चा यहीं खत्‍म करना हूँ, फिर मिलेगे अगले बृहस्‍पतिवार को, तब के लिये वंदेमातरम्।

15.11.09

चिठ्ठी चर्चा : अब किसका विश्वास हो किसका करें विश्वास....न कौडी के तीन है और न तेरह में तीन

आज रविवार अवकाश का दिन और आज मै महेन्द्र मिश्र जबलपुर से आप सभी का सादर अभिवादन करते हुए ब्लागर भाई बहिनों की पोस्टो को चिठ्ठी में समेट कर चिठ्ठी चर्चा सहित आपके समक्ष उपस्थित हूँ . विगत छ माहो से मै हिंदी नव और पुराने ब्लागरो की पोस्टो का जिक्र चिठ्ठी चर्चा के माध्यम से लगातार करने का अकेले भरसक प्रयास करता रहा हूँ . काफी जनों द्वारा इस चिठ्ठी चर्चा को सराहा गया और इस चर्चा को नियमित जारी रखने हेतु लगातार मुझे प्रोत्साहित किया गया जिससे मै ह्रदय से अभिभूत हूँ .

अब चिठ्ठी चर्चा को नई दिशा और गति प्रदान करने के उद्देश्य से नियमित करने हेतु कोशिश कर रहा हूँ . इस "चिठ्ठी चर्चा" में मेरे साथ भाई प्रमेन्द्र सिह भी इलाहाबाद से जुड़ गए है वे प्रति गुरूवार को हिंदी ब्लागों की पोस्टो पर "साप्ताहिक चिठ्ठी चर्चा" करेंगे. भाई प्रेमेन्द्र जी के जुड़ने से चिठ्ठी चर्चा में नये आयाम जुडेंगे यह मेरा विचार है . आज काफी अच्छे नए और वरिष्ट ब्लागरो की पोस्टो को पढ़ने का मौका मिला जिनका समावेश इस चिठ्ठी चर्चा में किया है....आपको भी पसंद आएंगे...चिठ्ठी चर्चा के पूर्व कुछ चुटकुले हँसने हँसाने और मुस्कुराने के लिए जिससे आपको चिठ्ठी पढ़ने के स्वाद में रोचकता बढेगी ....


* ताऊ महाताऊ से - यार मै अब हवाई यात्रा नहीं करूँगा
महाताऊजी - आखिर बात का है ?
ताऊजी महाताऊ से - यार प्लेन में बैठो तो एयर होस्टेज कमर में बैल्ट बांध देती है फिर बांध कर मेरी खातिरदारी शुरू कर देती है ऐसे में अगर ताई ने देख लिया तो वह मुझे जर्मन मेड लट्ठ लेकर खदेड़ देगी......
........
* एक बच्चा अपने मित्र से - पता है यार तुझे बचपन में मेरे बापू ने मुझसे कहा था की अगर तू फेल हो जाए तो मुझे " बापू" मत कहना...और उन्हें मैंने बापू कहना छोड़ दिया ...
मिरे - फिर क्या हुआ ?
बच्चा मित्र से - कुछ नहीं .. रिजल्ट के बाद बापू ने पूछा क्या हुआ . मैंने कहा कुछ नहीं हुआ " मिस्टर शुक्ल साब"
,,,,,,,,
* ताऊजी अपने घर आये मेहमान से - ठंडा लेंगें या गरम ?
मेहमान - यार दोनों मंगवा दो ?
ताऊ ताईजी से - एक गिलास गीजर से और एक गिलास पानी फ्रीजर से ले आओ ..


देश में कालिदास के

अब किसका विश्वास हो किसका करें विश्वास
न कौडी के तीन है और न तेरह में तीन
.

योगेन्द्र मौदगिल में द्वारा कवि योगेन्द्र मौदगिल कुछ सामायिक दोहे ......

स्माईल प्लीज..स्माईल प्लीज !अबे मुस्कुराने को कहां है,फ़ाड कर हंस क्यो रहा है,नमस्कार...छोटी छोटी बातें में राज भाटिय़ा.

साले...नमक हराम क्रिकेटर....हास्यकवि अलबेला खत्री....आज कबीर होते तो वो भी यही कहते...

मै सचिन के खेल की ही नहीं सचिन की फेन हूँ....सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट खेलते हुए आज बीस साल पूरे कर लिये हैं । एक लम्बी लिस्ट हैं क्रीतिमानो की उनके इस २० साल के क्रिकेट दौर की । इस सब से ऊपर भी एक बात हैं जो बहुत महत्व पूर्ण हैं । एक सेलेब्रिटी हैं सचिन और फिर भी इस पूरे २० साल मे कही भी उनके...नारी में...रचना की कलम से अभिव्यक्ति ...

ज्ञान दर्पण...में बता रहे है ..रतन सिंह शेखावत और कहते है..... अब घर में ही घोटो और पीवो

" हिन्दी ब्लॉगर्स की " डायरेक्टरी तैयार कर रहे है ...डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक".. आप भाई अपना नाम सम्मिलित कराये....भविष्य में यह डायरी आपसी संपर्क करने में महत्व पूर्ण भूमिका अदा करेगी...

चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में -1
राजीव तनेजा*** आईए...आईए...आईए...पहचानिए...और पूरे ब्लॉगजगत को बताईए कि इस चित्र रूपी नकाब के अन्दर किस ब्लॉगर का चेहरा छुपा है ? और बदले में ईनाम स्वरूप "खंबा नोचती खिसियानी बिल्ली के टूटे नाखूनों" का एक सैट बिलकुल मुफ्त...पाईए क्या कहा ?..हँसते रहो हँसाते रहो में..

मथुरा कलौनी...उसके बारे में...कच्‍चा चिट्ठा लिख रहे है ...

फूल से होते बच्चे प्यारे
....बाल-उद्यान में.

बाल दिवस पर जारी डाक टिकट...ब्लॉगवुड में सैयद डाक टिकटों की जानकारी दे रहे है.

कहाँ है आपका गाँव पता मिले तो मुझे जरूर बताएं....मुझे याद है फोचाय मरर का वह गीत " कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ " इसी गीत से हमारी सुबह की शुरुआत होती थी .फोचाय मरर के इस गीत के साथ शुरू होती थी कई आवाजे ..... मवेशियों के गले मे बंधी घंटिया ,किसानो की चहल पहल ... दूर से आती ढेकी की आवाज ... उखल समाठ की हमारगम...विनोद कुमार मिश्रा के ब्लॉग में.

ख़बर वो, जो ले सबकी ख़बर...में .. अनुपम मिश्रा .... बुढ़ापे की संवेदना रचना के माध्यम से बाँट रहे है...

बुरा भला में शिवम् मिश्रा की अभिव्यक्ति... कौन लिख रहा है इन नौनिहालों की तकदीर ?

किसी तूफाँ के आने की ख़बर है, जिधर देखो इबादत हो रही है....हमराही में भाई ज़ाकिर अली ‘रजनीश’

खाना पसंद न आये तो क्राकरी-चम्मच मत पटकना....धान के देश में ... जी.के.अवधिया

"चर्चा पान की दुकान" पर बता रहे है....ललित शर्मा....और भईया "दखल" भी चल पड़े " भुतहा-तालाब.

तो राज ठाकरे की ठुकाई हो जाती....एकोऽहम् में विष्णु बैरागी की विचारोक्ति ...

सच्चा शरणम् में हिमांशु....कल की ना-ना तुम्हारी.

भड़ास ..राज बाल की हिम्मत को दिया चुनौती कईयों ने पत्रकार तो पत्रकार चिट्ठाकार भी कम नहीं पत्रकारों ने बिक्री बढ़ाई अखबार और पत्रिकाओं की दूरदर्शन ने टी आर पी बढ़ाई नेताओं के झूठे मंतव्यों से फिर चिट्ठाकार क्यों पीछे रहें हमने अपने चिट्ठों से राज बाल के...कुसुम ठाकुर की अभिव्यक्ति.

फोन का झुमका ....ज्ञानदत्त पाण्डेय की मानसिक हलचल में ज्ञानदत्त पाण्डेय.

क्या भीख मांगने की शिक्षा लेने स्कूल जाते हैं बच्चे....राजतन्त्र में राजकुमार ग्वालानी की सामयिक अभिव्यक्ति.

ऐसा क्या है, इसे खेलने में जो हमें देखना चाहिए ? वह हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं ? प्राइमरी का मास्टर में प्रवीण त्रिवेदी.

ठुमरी में विमल वर्मा...नन्हें मुन्हें बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है ?

चित्रगीत में निशांत मिश्र....नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए.

देशनामा में खुशदीप सहगल....ब्लॉगिंग की 'काला पत्थर'...खुशदीप

नवोदित ब्रिगेडियर अंकुर का स्वागत है...."खज़ाना"...गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'.

क्या पता-कल हो न हो !! - एक लघु कथा....मेरे घर के बाजू में मोड़ पर एक जंगल रहता है. जबसे इस घर में आया हूँ, तबसे उसे देखता आ रहा हूँ. उसे न कहीं आना और न कहीं जाना. तरह तरह के पेड़ हैं. मौसम के हिसाब से पत्तियाँ रंग बदलती रहती है. हरे से लाल, फिर पीली और भूरी होकर पेड़ों का साथ छोड़ देती है बरफ गिरने से थोड़ा पहले. ...बर्फिली आँधियों में जब पेड़ों को सबसे ज्यादा उनके साथ की जरुरत होती है , तब वो पत्तियाँ उनके साथ नहीं होती....समीर लाल "उड़न तश्तरी" की कलम से...

मेरी भावनाये में...रश्मिप्रभा...चाँद रोया....

लगते हैं केले के पत्ते, हाथी जैसे कान...बाल-मन...पर सुरेश विमल की रचना प्रस्तुत कर रहे है भाई ज़ाकिर अली ‘रजनीश’..

हिन्दी साहित्य संगम जबलपुर में विजय तिवारी जी की प्रस्तुति ....ऐसी हैं पुण्य सलिला माँ नर्मदा -- दूसरा भाग






0000000